लखनऊ नगर निगम (एलएमसी) जिला अदालत, कैसरबाग के आसपास करीब 150 और ऐसे निर्माणों को चिह्नित करेगा, जो कथित तौर पर नालों और सरकारी जमीन पर बिना वैध दस्तावेजों के बनाए गए हैं। यह कदम अदालत के उस आदेश के बाद उठाया जा रहा है, जिसमें अतिक्रमण हटाने को कहा गया था।
एलएमसी के जोनल अधिकारी ओम प्रकाश ने शनिवार को बताया कि नगर निगम कब्जेदारों को नए सिरे से नोटिस जारी करेगा, उसके बाद ही इलाके में एक और तोड़फोड़ अभियान शुरू किया जाएगा।
कोर्ट का निर्देश और अधिकारियों की योजना
अदालत ने नालों या सरकारी संपत्तियों पर बने अवैध निर्माणों को पांच हफ्तों के भीतर हटाने का निर्देश दिया था। अधिकारियों के मुताबिक, इस नई कार्रवाई की शुरुआत ढांचों की पहचान और चिह्नांकन से होगी, इसके बाद नोटिस तामील या चस्पा किए जाएंगे और फिर नियम तोड़ने वालों के खिलाफ अगली कार्रवाई होगी।
ओम प्रकाश ने कहा, "एलएमसी की टीमों ने शनिवार को कब्जेदारों को नोटिस देने की कोशिश की, लेकिन किसी ने भी उसे स्वीकार नहीं किया। अब हम ढांचों पर नोटिस चस्पा करेंगे और कोर्ट के आदेश के अनुसार आगे कार्रवाई करेंगे।"
पहले हो चुकी हैं दो मुहिम
यह ताजा कार्रवाई ऐसे समय हो रही है जब एलएमसी इसी इलाके में दो पूर्व मुहिमों में पहले ही 143 ढांचे गिरा चुका है। अधिकारियों ने बताया कि इन निर्माणों की पहचान नालों और अन्य सरकारी जमीन पर अतिक्रमण के रूप में की गई थी।
17 मई को हुई पहली बड़ी मुहिम में एलएमसी ने एक हिस्से में 72 निर्माण ध्वस्त किए थे। इसके बाद 30 अगस्त को दूसरा अभियान चलाया गया, जिससे इलाके में कुल ध्वस्त ढांचों की संख्या 143 पहुंच गई।
दस्तावेज न होने पर ही होगी कार्रवाई
ओम प्रकाश ने स्पष्ट किया कि कार्रवाई केवल उन्हीं निर्माणों पर की जाएगी, जो अवैध पाए जाएंगे और जिनके कब्जेदार वैध दस्तावेज पेश नहीं कर सकेंगे। नोटिस चस्पा किए जाने के बाद अगली मुहिम की तारीख तय होगी।