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पांच करोड़ की दवाएं जब्त, सरगना छापे से पहले फरार

धनौली और टेढ़ी बगिया के गोदामों से जुड़े तार, तीन गुर्गे जेल भेजे गए, मुख्य आरोपी हिमांशु अग्रवाल पुलिस की पकड़ से बाहर

आगरा के गोदाम में जब्त नकली दवाओं के बोरे और जांच करते अधिकारी
प्रतीकात्मक तस्वीर, AI से बनाई गई। यह वास्तविक घटना का चित्रण नहीं है।

आगरा के धनौली इलाके में चल रहे अवैध दवा गोदाम से औषधि विभाग की टीम ने करीब पांच करोड़ रुपये की दवाएं जब्त की हैं। इस मामले में पुलिस ने तीन आरोपियों को बुधवार को जेल भेज दिया, लेकिन मुख्य सरगना अब भी पुलिस की पहुंच से बाहर है।

औषधि निरीक्षक आशुतोष मिश्रा की तहरीर पर धोखाधड़ी समेत कई धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की गई है। इसमें धनौली निवासी इकरार, टेढ़ी बगिया निवासी शामिन उर्फ छोटू, सलुआ उर्फ मुकीम, हिमांशु अग्रवाल और आशीष जैन को नामजद किया गया है।

इकरार ने खोले राज

पूछताछ में इकरार ने बताया कि जिस गोदाम में दवाएं रखी जा रही थीं, वह उसके भाई दिलशाद का है। रिश्तेदार शामिन और सलुआ ने उसे दवाओं के कारोबार के बारे में बताया था। अधिक मुनाफे के लालच में वह उनके संपर्क में आ गया।

इकरार की निशानदेही पर पुलिस ने सलुआ और शामिन को भी पकड़ लिया। गोदाम के पास न तो भंडारण का लाइसेंस था, न ही खरीद के कोई कागजात। पूछताछ में दवाओं के नकली होने की बात भी सामने आई।

वीडियो से खुला नया राज़

जांच में सलुआ के मोबाइल से एक वीडियो मिला, जिसमें यमुनापार क्षेत्र में दवाएं जलती दिखाई दे रही हैं। इस आधार पर पुलिस ने दोनों से फिर पूछताछ की। उन्होंने बताया कि ट्रांसपोर्टर आशीष जैन ने उनकी मुलाकात दवा व्यापारी हिमांशु अग्रवाल से कराई थी।

हिमांशु अगस्त 2025 में दवाओं के मामले में पकड़ा गया था। उस समय उसने एसटीएफ इंस्पेक्टर यतेंद्र शर्मा को एक करोड़ रुपये रिश्वत देने की कोशिश की थी। उस पर तीन मामले दर्ज हुए, एक रिश्वत का और दो दवा भंडारण से जुड़े। तीनों मामलों में उसे दिसंबर 2025 में जमानत मिल गई थी।

जमानत के बाद उसने टेढ़ी बगिया में सोनू के गोदाम को किराये पर लिया, जिसकी बात उसके पिता पवन कुमार ने की थी। पूछताछ में राजस्थान में भी दवाओं की सप्लाई की जानकारी मिली है। छापे से दो दिन पहले ही गोदाम खाली कर दिया गया, जिससे शक है कि उसे पहले ही छापे की भनक लग गई थी।

33 बोरे में मिलीं नकली और असली दवाएं

खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) की टीम ने छापे में लगभग 33 बोरे दवाएं बरामद कीं। इनमें ज्यादातर ब्रांडेड कंपनियों के नाम वाली दवाएं थीं।

औषधि निरीक्षक आशुतोष मिश्रा के अनुसार गोदाम से अलेग्रा-एम, जानूमेट, रोसूवास-20, रोसूवास-40, एमआईरिल-1, एमआईरिल-2, कैट्रोल और लोसर-एच जैसी दवाएं मिलीं। इनमें मधुमेह, हृदय रोग, एलर्जी और कोलेस्ट्रॉल की दवाएं शामिल थीं। बरामद दवाएं सात-आठ कंपनियों की बताई गई हैं।

आगे की जांच जारी

पुलिस और औषधि विभाग की टीमें अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि ये दवाएं कहां से आईं और किन इलाकों में भेजी गईं। क्षेत्र में ऐसे अन्य गोदामों की भी तलाश की जा रही है।

डीसीपी पश्चिमी जोन आदित्य सिंह ने बताया कि इकरार, शामिन और सलुआ को न्यायालय से जेल भेजा गया है, जबकि आशीष जैन और हिमांशु अग्रवाल की तलाश जारी है।