उत्तर प्रदेश के जालौन जिले में मादक पदार्थों के अवैध कारोबार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई सामने आई है। राजस्व आसूचना निदेशालय (DRI) और उत्तर प्रदेश एंटी टेररिस्ट स्क्वॉड (ATS) की संयुक्त टीम ने उरई क्षेत्र के रामपुर गांव के बाहर एक खेत में चल रही कथित मेफेड्रोन निर्माण इकाई का भंडाफोड़ किया है।
29 अक्टूबर 2026 की सुबह की गई इस कार्रवाई में दो लोगों को गिरफ्तार किया गया। एजेंसियों ने लैब और आरोपियों के आवासों से कुल 1,102.88 किलोग्राम ड्रग्स, अर्धनिर्मित पदार्थ, रसायन और निर्माण में इस्तेमाल होने वाले उपकरण जब्त किए। बरामद सामग्री की कीमत को लेकर अलग-अलग मीडिया रिपोर्टों में 200 करोड़ रुपये से अधिक और करीब 300 करोड़ रुपये का अनुमान दिया गया है।
इस कार्रवाई का एक अहम पहलू यह है कि कथित ड्रग्स निर्माण इकाई को गुलाब जल बनाने के कारोबार की आड़ में संचालित किए जाने की बात सामने आई है। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल थे तथा तैयार नशीले पदार्थों की सप्लाई किन शहरों तक की जाती थी।
खुफिया सूचना के बाद गांव में पहुंची संयुक्त टीम
DRI को सूचना मिली थी कि जालौन के उरई क्षेत्र में बड़े स्तर पर सिंथेटिक ड्रग्स तैयार की जा रही हैं और वहां से अलग-अलग शहरों में उनकी सप्लाई की जा रही है।
सूचना की पुष्टि के बाद DRI ने उत्तर प्रदेश ATS से संपर्क किया। इसके बाद दोनों एजेंसियों ने संयुक्त अभियान की योजना बनाई। 29 अक्टूबर की सुबह टीम ने गांव की संकरी गलियों से होते हुए एक संदिग्ध परिसर पर छापा मारा। कार्रवाई में ATS कमांडो भी शामिल थे।
तलाशी के दौरान परिसर में सिंथेटिक नशीले पदार्थों के निर्माण के लिए इस्तेमाल की जा रही एक सक्रिय प्रयोगशाला मिली। अधिकारियों के मुताबिक, वहां ड्रग्स तैयार करने से संबंधित उपकरण और बड़ी मात्रा में रसायन मौजूद थे।
1,102 किलो से ज्यादा सामग्री जब्त, क्या-क्या मिला?
संयुक्त कार्रवाई के दौरान लैब और दोनों आरोपियों के आवासों की तलाशी ली गई। एजेंसियों के अनुसार, कुल बरामदगी में तैयार मेफेड्रोन के साथ अर्धनिर्मित पदार्थ, रसायन और उपकरण शामिल थे।
रिपोर्टों में बरामदगी का विवरण इस प्रकार दिया गया है:
बरामद सामग्री
मात्रा
लैब से अर्धनिर्मित ड्रग्स
लगभग 184 किलो
लैब से रसायन व अन्य सामग्री
582.2 किलो
एक आरोपी के घर से तैयार मेफेड्रोन
15.44 किलो
उसी घर से रसायन
152.94 किलो
दूसरे आरोपी के परिसर से रसायन
168.3 किलो
कुल बरामदगी
1,102.88 किलो
यह स्पष्ट करना जरूरी है कि 1,102.88 किलोग्राम की पूरी मात्रा तैयार मेफेड्रोन नहीं थी। इसमें तैयार नशीले पदार्थ, अर्धनिर्मित सामग्री, रसायन और उपकरणों से संबंधित जब्ती शामिल है।
दो आरोपी गिरफ्तार, महाराष्ट्र से भी जुड़ा मामला
इस मामले में गिरफ्तार आरोपियों की पहचान हेमेंद्र कुशवाह और संतोष कुमार के रूप में हुई है।
रिपोर्टों के अनुसार, हेमेंद्र कुशवाह जालौन का निवासी है, जबकि संतोष कुमार महाराष्ट्र के सांगली का रहने वाला बताया गया है। दोनों की उम्र अलग-अलग रिपोर्टों में थोड़ी अलग दी गई है; संतोष की उम्र 37 वर्ष और हेमेंद्र की उम्र 27 या 28 वर्ष बताई गई है।
Times of India की रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों की मुलाकात मुंबई की आर्थर रोड जेल में हुई थी। संतोष के खिलाफ पहले से NDPS कानून के तहत मामला दर्ज होने की जानकारी भी रिपोर्ट में दी गई है। एजेंसियां अब दोनों से पूछताछ कर कथित नेटवर्क के अन्य सदस्यों और वित्तीय संबंधों का पता लगाने में जुटी हैं।
गुलाब जल के कारोबार की आड़ में चल रही थी लैब?
अमर उजाला और दैनिक जागरण की रिपोर्टों में बताया गया है कि खेत में चल रही कथित ड्रग्स निर्माण इकाई को गुलाब जल बनाने के कारोबार की आड़ में संचालित किया जा रहा था।
इस कथित व्यवस्था का उद्देश्य वास्तविक गतिविधियों को छिपाना था या नहीं, इसकी जांच एजेंसियां कर रही हैं। फिलहाल यह मामला जांच के अधीन है और एजेंसियां परिसर, वहां मौजूद उपकरणों तथा बरामद सामग्री से जुड़े सभी तथ्यों की पुष्टि कर रही हैं।
दिल्ली-NCR और मुंबई तक सप्लाई की आशंका
अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, जांच में यह जानकारी सामने आई है कि आरोपी उत्तर प्रदेश के अलग-अलग शहरों के अलावा दिल्ली-NCR और मुंबई तक नशीले पदार्थों की सप्लाई करते थे।
रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि कथित यूनिट में हर तीन दिन में लगभग 20 किलोग्राम ड्रग्स तैयार की जाती थी। हालांकि, यह उत्पादन क्षमता और सप्लाई से संबंधित जानकारी अभी जांच एजेंसियों के सामने मौजूद आरोपों और मीडिया रिपोर्टों पर आधारित है। इसे अंतिम रूप से स्थापित तथ्य नहीं माना जाना चाहिए।
बरामदगी की कीमत ₹200 करोड़ या ₹300 करोड़?
इस मामले में बरामद सामग्री के मूल्य को लेकर खबरों में अंतर है।
Indian Express की रिपोर्ट में DRI के हवाले से ड्रग्स और रसायनों की कुल बरामदगी का अंतरराष्ट्रीय बाजार मूल्य 200 करोड़ रुपये से अधिक बताया गया है। वहीं, Times of India, Hindustan Times और दैनिक जागरण की रिपोर्टों में इसका अनुमानित मूल्य करीब 300 करोड़ रुपये बताया गया है।
इसलिए फिलहाल खबर में इसे करीब 300 करोड़ रुपये की अनुमानित बरामदगी कहना उचित है, लेकिन यह भी बताना जरूरी है कि अलग-अलग रिपोर्टों में मूल्यांकन का आंकड़ा अलग है।
अब किन सवालों के जवाब तलाशेंगी एजेंसियां?
दो आरोपियों की गिरफ्तारी और कथित निर्माण इकाई मिलने के बाद जांच का दायरा बढ़ गया है। एजेंसियां मुख्य रूप से इन सवालों के जवाब तलाश रही हैं:
निर्माण में इस्तेमाल होने वाले रसायन कहां से खरीदे गए?
कथित लैब कितने समय से संचालित हो रही थी?
तैयार मेफेड्रोन किन शहरों और लोगों तक पहुंचाई जाती थी?
क्या इस नेटवर्क में अन्य कारोबारी, सप्लायर या वित्तीय मददगार भी शामिल थे?
कथित फैक्ट्री के संचालन और निवेश के पीछे कौन लोग थे?
इन सवालों के जवाब मिलने के बाद ही इस नेटवर्क के वास्तविक आकार और उसकी पहुंच का पता चल सकेगा।
निष्कर्ष
जालौन के उरई क्षेत्र में DRI और UP ATS की संयुक्त कार्रवाई में कथित मेफेड्रोन निर्माण इकाई का पकड़ा जाना राज्य में अवैध सिंथेटिक ड्रग्स कारोबार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई है। दो आरोपियों की गिरफ्तारी के साथ 1,102.88 किलोग्राम ड्रग्स, अर्धनिर्मित पदार्थ और रसायन जब्त किए गए हैं। अब जांच का अगला चरण कथित सप्लाई नेटवर्क, रसायनों के स्रोत और इस कारोबार से जुड़े अन्य लोगों की पहचान करना है।