आगरा विकास प्राधिकरण ने सरकारी नजूल भूमि पर फर्जी दस्तावेजों से बने अवैध निर्माण मामले में बड़ी कार्रवाई की तैयारी कर ली है। जांच में लापरवाही पाए जाने पर संबंधित इंजीनियर और मानचित्र पटल प्रभारी के निलंबन की प्रक्रिया शुरू हो गई है।
जिलाधिकारी मनीष बंसल के निर्देश पर एडीएम प्रोटोकॉल अमरेंद्र कुमार वर्मा और एडीए सचिव संजय कुमार की संयुक्त कमेटी ने जांच की थी। रिपोर्ट में कई कर्मियों की शिथिलता सामने आई।
कर्मियों से मांगा जाएगा जवाब
विभागीय सूत्रों के अनुसार पहले संबंधित कर्मियों से जवाब लिया जाएगा। उसके बाद ही उनके खिलाफ औपचारिक कार्रवाई होगी।
दूसरी ओर प्राधिकरण अवैध इमारत को ध्वस्त करने के लिए कागजी प्रक्रिया भी पूरी कर रहा है। सचिव संजय कुमार ने बताया कि सरकारी जमीन पर जानबूझकर कब्जा कर फर्जी दस्तावेज से निर्माण कराया गया।
आवासीय मंजूरी, व्यावसायिक इमारत
जांच में यह भी सामने आया कि आवासीय निर्माण की अनुमति लेकर व्यावसायिक भवन खड़ा कर दिया गया। संजय कुमार ने कहा कि इस गड़बड़ी के चलते इमारत को ध्वस्त किया जाएगा।
यह मामला गुड़ की मंडी स्थित हनुमान गली की सरकारी जमीन से जुड़ा है। प्राधिकरण ने इस प्रकरण में लोहा मंडी निवासी बिल्डर मालती शर्मा, अहमदाबाद निवासी विष्णु कुमार शिवलाल और शाहगंज निवासी इंजीनियर गोविंद सिंह के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धाराओं में मामला दर्ज कराया था।
गोविंद सिंह आर्किटेक्ट नहीं, इंजीनियर
शुरुआत में गोविंद सिंह को आर्किटेक्ट बताया गया था। बाद में प्राधिकरण ने स्पष्ट किया कि वह आर्किटेक्ट नहीं बल्कि इंजीनियर हैं।
इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ आर्किटेक्ट्स के आगरा चैप्टर ने भी पुष्टि की कि इस नाम का कोई आर्किटेक्ट पंजीकृत नहीं है। पुलिस अब तीनों आरोपियों से पूछताछ की तैयारी कर रही है।
पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि आरोपियों ने कूटरचित दस्तावेज कहां और कैसे तैयार कराए। साथ ही इस धोखाधड़ी में किन सरकारी कर्मियों ने मदद की, इसकी भी जांच की जा रही है।