Skip to content
24/7 News Uttar Pradesh
Breaking

इलाहाबाद हाईकोर्ट का आदेश: समलैंगिक जोड़े को पुलिस सुरक्षा दें

हिंदू-मुस्लिम समलैंगिक जोड़े को परिवार से मिल रही धमकियों के बीच कोर्ट ने कहा, लिव-इन में रहना मौलिक अधिकार

इलाहाबाद हाईकोर्ट की इमारत के बाहर खड़े पुलिस अधिकारी
प्रतीकात्मक तस्वीर, AI से बनाई गई। यह वास्तविक घटना का चित्रण नहीं है।

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश पुलिस को एक हिंदू-मुस्लिम समलैंगिक जोड़े को सुरक्षा देने का निर्देश दिया है। जोड़े का लिव-इन रिश्ता उनके परिवार वालों की धमकियों से खतरे में था।

जस्टिस गौतम चौधरी ने 14 सितंबर को दिए अपने आदेश में कहा कि दोनों को बिना किसी बाधा के साथ रहने की आजादी है। परिवार के सदस्य या कोई अन्य व्यक्ति उनके रिश्ते में दखल नहीं दे सकता।

कोर्ट ने पुलिस को क्या निर्देश दिए

कोर्ट ने साफ कहा कि यदि जोड़े के लिव-इन रिश्ते में कोई बाधा आती है, तो पुलिस को उनकी उम्र और सहमति की पुष्टि करने के बाद तुरंत सुरक्षा देनी होगी।

जोड़े के वकील ने अदालत में बताया कि परिवार वालों से उनकी जान को खतरा था, इसलिए तत्काल पुलिस सुरक्षा जरूरी है। दूसरी ओर, राज्य सरकार के वकील ने दलील दी कि समलैंगिक संबंधों को समाज में स्वीकार नहीं किया जाता और यह पारंपरिक ढांचे के खिलाफ है।

कोर्ट ने जोड़े से की बातचीत

अदालत ने जोड़े से सीधे बातचीत की। इसके बाद कोर्ट ने पाया कि दोनों बालिग हैं और बिना किसी दबाव, डर या अनुचित प्रभाव के अपनी मर्जी से साथ रहने का फैसला लिया है।

सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय किए गए कानून का हवाला देते हुए कोर्ट ने कहा कि लिव-इन रिश्ते में रहना दो बालिग नागरिकों का मौलिक अधिकार है, जो अपनी इच्छा से साथ रहने का फैसला करते हैं।

कोर्ट ने आगे कहा कि परिवार, अन्य रिश्तेदार या समाज के किसी भी हिस्से को उनकी शारीरिक स्वतंत्रता को बाधित या उल्लंघित करने का कानूनी अधिकार नहीं है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि विवाह की मान्यता न होने से किसी को भी बालिग नागरिकों की गरिमा और शारीरिक सुरक्षा पर हमला करने की छूट नहीं मिल जाती।