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ब्राजील में लूला की ऐतिहासिक वापसी, चौथी बार राष्ट्रपति बने; पहले दौर में पिछड़ने के बाद पलटा चुनावी खेल

पहले दौर में पीछे रहने के बाद लूला ने दूसरे चरण में पलटा चुनावी समीकरण; 51.79% वोट के साथ ऐतिहासिक जीत, फ्लावियो बोल्सोनारो को 48.21% मत मिले

ब्राजील में लूला की ऐतिहासिक वापसी, चौथी बार राष्ट्रपति बने; पहले दौर में पिछड़ने के बाद पलटा चुनावी खेल
प्रतीकात्मक तस्वीर, AI से बनाई गई। यह वास्तविक घटना का चित्रण नहीं है।

ब्राजील में लूला की ऐतिहासिक जीत

दक्षिण अमेरिका के सबसे बड़े देश ब्राजील में राष्ट्रपति चुनाव का नतीजा बेहद महत्वपूर्ण रहा। मौजूदा राष्ट्रपति लुइज़ इनासियो लूला दा सिल्वा ने 2026 के राष्ट्रपति चुनाव में जीत दर्ज करते हुए चौथा गैर-लगातार कार्यकाल हासिल कर लिया है।

ब्राजील के Superior Electoral Court (TSE) ने लूला की जीत की आधिकारिक घोषणा की। TSE के अंतिम आंकड़ों के अनुसार लूला को 64,256,232 वोट यानी 51.79% वैध मत मिले, जबकि दक्षिणपंथी उम्मीदवार फ्लावियो बोल्सोनारो को 59,826,041 वोट यानी 48.21% मिले।

यह मुकाबला बेहद करीबी रहा, लेकिन आखिरी दौर में लूला ने बढ़त कायम रखते हुए चुनाव अपने नाम कर लिया।

पहले दौर में पीछे थे लूला, दूसरे दौर में बदली पूरी तस्वीर

लूला की जीत इसलिए भी खास मानी जा रही है क्योंकि पहले दौर में वह फ्लावियो बोल्सोनारो से पीछे रह गए थे।

पहले चरण में फ्लावियो बोल्सोनारो को लगभग 47.03%, जबकि लूला को करीब 45.16% वोट मिले थे। इसके बाद दोनों उम्मीदवारों के बीच सीधा मुकाबला दूसरे दौर में पहुंचा।

पहले दौर के नतीजों के बाद लूला के सामने चुनौती थी कि वह अपने समर्थक आधार को दोबारा सक्रिय करें और दूसरे उम्मीदवारों के मतदाताओं को अपने पक्ष में लाएं।

दूसरे दौर में यही रणनीति निर्णायक साबित हुई और लूला ने शुरुआती पिछड़ने के बावजूद चुनावी बाजी पलट दी।

फ्लावियो बोल्सोनारो को मिली बड़ी चुनौती

लूला के सामने मुकाबला फ्लावियो बोल्सोनारो से था, जो पूर्व राष्ट्रपति जायर बोल्सोनारो के बेटे हैं।

फ्लावियो ने दक्षिणपंथी और रूढ़िवादी मतदाताओं को अपने साथ जोड़ने की कोशिश की। चुनाव के दौरान ब्राजील की राजनीति स्पष्ट रूप से वामपंथी बनाम दक्षिणपंथी ध्रुवीकरण में दिखाई दी।

लेकिन अंतिम परिणाम में लूला मामूली अंतर से आगे निकल गए।

TSE के मुताबिक दोनों उम्मीदवारों के बीच अंतर लगभग 4.43 मिलियन वोट का रहा।

लूला के राजनीतिक करियर में एक और बड़ा अध्याय

इस जीत के साथ लूला ने ब्राजील के आधुनिक राजनीतिक इतिहास में अपना नाम और मजबूत कर लिया है।

लूला इससे पहले 2003 से 2010 तक लगातार दो कार्यकाल राष्ट्रपति रह चुके हैं। इसके बाद 2022 के चुनाव में उन्होंने तीसरी बार राष्ट्रपति पद जीता और 2023 में फिर सत्ता संभाली।

अब 2026 की जीत के बाद वह चौथी बार ब्राजील के राष्ट्रपति बनने जा रहे हैं। उनका नया कार्यकाल जनवरी 2027 में शुरू होगा।

इस तरह लूला ने एक ऐसी राजनीतिक वापसी दर्ज की है जो ब्राजील की हालिया राजनीति में बेहद असाधारण मानी जा रही है।

लूला के लिए यह सिर्फ जीत नहीं, बड़ी राजनीतिक वापसी है

इस चुनाव का सबसे बड़ा पहलू सिर्फ यह नहीं है कि लूला जीत गए। उनकी जीत की कहानी इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि पहले दौर में पीछे रहने के बाद उन्होंने दूसरे दौर में वापसी की।

इंडियन एक्सप्रेस की चुनावी समीक्षा के अनुसार, 1989 में ब्राजील में दो-दौर वाली राष्ट्रपति चुनाव प्रणाली शुरू होने के बाद यह एक ऐतिहासिक स्थिति बनी कि पहले दौर में दूसरे स्थान पर रहने वाला उम्मीदवार दूसरे दौर में चुनाव जीत गया।

लूला ने चुनाव अभियान के अंतिम चरण में अपने समर्थकों को सक्रिय करने, युवा मतदाताओं तक पहुंच बनाने और सड़कों तथा सोशल मीडिया पर अभियान तेज करने पर जोर दिया।

लूला ने जीत के बाद क्या कहा?

जीत के बाद समर्थकों को संबोधित करते हुए लूला ने लोकतंत्र और ब्राजील की संप्रभुता पर जोर दिया।

उन्होंने चुनाव को उन लोगों की जीत बताया जो लोकतंत्र और देश के भविष्य में विश्वास रखते हैं। जीत के बाद साओ पाउलो में उनके समर्थकों के बीच जश्न का माहौल देखने को मिला।

लूला के सामने अब चुनाव जीतने के बाद देश को राजनीतिक रूप से एकजुट करने की चुनौती होगी।

फ्लावियो बोल्सोनारो ने नतीजे स्वीकार नहीं किए

चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद विवाद पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है।

फ्लावियो बोल्सोनारो ने लूला की जीत को स्वीकार करने से इनकार किया है। उन्होंने मतदान के अंतिम घंटों में मतदान का समय बढ़ाए जाने पर सवाल उठाया और परिणाम को रद्द कराने की मांग करने की बात कही है।

यह विवाद अब ब्राजील की चुनावी राजनीति में अगला बड़ा मुद्दा बन सकता है।

हालांकि, महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि ब्राजील के आधिकारिक चुनाव प्राधिकरण TSE ने लूला को विजेता घोषित कर दिया है।

ब्राजील की राजनीति में आगे क्या बदलेगा?

लूला की जीत से ब्राजील में वामपंथी राजनीति को बड़ा बल मिला है। लेकिन उनके सामने कई गंभीर चुनौतियां भी रहेंगी।

सबसे बड़ी चुनौती होगी अर्थव्यवस्था, रोजगार, महंगाई, सार्वजनिक खर्च और निवेश के बीच संतुलन बनाना।

इसके अलावा ब्राजील की राजनीति में दक्षिणपंथी ताकतें अभी भी मजबूत हैं। चुनाव में फ्लावियो बोल्सोनारो को मिले करीब 48% वोट बताते हैं कि देश में राजनीतिक ध्रुवीकरण बना हुआ है।

इसलिए लूला के लिए केवल चुनाव जीतना पर्याप्त नहीं होगा। उन्हें अपनी सरकार के अगले चरण में विरोधी राजनीतिक खेमे के बड़े हिस्से को साथ लेकर चलने की चुनौती का सामना करना पड़ेगा।

अमेरिका और वैश्विक राजनीति पर भी पड़ेगा असर

लूला की जीत का असर केवल ब्राजील तक सीमित नहीं रहेगा।

ब्राजील लैटिन अमेरिका की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में से एक है और वैश्विक दक्षिण की राजनीति में उसकी महत्वपूर्ण भूमिका है।

लूला लंबे समय से बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था, विकासशील देशों के सहयोग और ब्राजील की स्वतंत्र विदेश नीति पर जोर देते रहे हैं।

उनकी चौथी जीत से लैटिन अमेरिका में वामपंथी राजनीति को एक महत्वपूर्ण राजनीतिक बढ़ावा मिल सकता है। दूसरी तरफ, यह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की लैटिन अमेरिका में बढ़ती राजनीतिक प्रभाव-रणनीति के लिए भी चुनौती मानी जा रही है।

भारत-ब्राजील संबंधों के लिए भी अहम

भारत और ब्राजील दोनों BRICS के महत्वपूर्ण सदस्य हैं और वैश्विक दक्षिण के मुद्दों पर दोनों देशों के बीच सहयोग लगातार बढ़ा है।

लूला की वापसी से भारत-ब्राजील संबंधों में व्यापार, ऊर्जा, कृषि, रक्षा, डिजिटल सहयोग और बहुपक्षीय मंचों पर साझेदारी आगे बढ़ने की संभावना बनी रहेगी।

ब्राजील की अर्थव्यवस्था और विशाल बाजार भारतीय कंपनियों के लिए भी महत्वपूर्ण हैं। वहीं भारत और ब्राजील दोनों G20 और BRICS जैसे मंचों पर विकासशील देशों की आवाज को मजबूत करने की कोशिश करते रहे हैं।

लूला के सामने अब सबसे बड़ी परीक्षा

चुनाव प्रचार के दौरान लूला ने लोकतंत्र, सामाजिक न्याय और आर्थिक विकास को प्रमुख मुद्दा बनाया।

अब उनके सामने वास्तविक परीक्षा सरकार चलाने की होगी।

एक तरफ उनके समर्थक बेहतर सामाजिक नीतियों और आर्थिक अवसरों की उम्मीद कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ करीब आधे मतदाताओं ने उनके प्रतिद्वंद्वी का समर्थन किया है।

इसलिए आने वाले कार्यकाल में लूला को राजनीतिक ध्रुवीकरण कम करने, अर्थव्यवस्था को स्थिर रखने और अपनी नीतियों के लिए व्यापक समर्थन जुटाने पर ध्यान देना होगा।

अब आगे क्या?

ब्राजील के चुनाव प्राधिकरण द्वारा लूला की जीत की घोषणा के साथ चुनावी प्रक्रिया का सबसे महत्वपूर्ण चरण पूरा हो गया है। अब सत्ता हस्तांतरण और जनवरी 2027 में नए कार्यकाल की शुरुआत पर नजर रहेगी।

दूसरी ओर, फ्लावियो बोल्सोनारो द्वारा परिणामों पर आपत्ति जताए जाने से कानूनी और राजनीतिक बहस आगे भी जारी रह सकती है।

लेकिन फिलहाल तस्वीर साफ है—लूला दा सिल्वा ने चौथी बार ब्राजील के राष्ट्रपति पद पर जीत हासिल कर इतिहास रच दिया है।

पहले दौर में पीछे रहने के बाद उनकी यह वापसी ब्राजील के 2026 चुनाव की सबसे बड़ी राजनीतिक कहानी बन गई है।