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ब्राज़ील में Lula की ऐतिहासिक वापसी, चौथी बार राष्ट्रपति चुने गए; Bolsonaro के बेटे को दी मात

Lula da Silva ने 51.79% वोट हासिल कर Flávio Bolsonaro को हराया; करीब 12.8 करोड़ मतदाताओं ने दूसरे दौर में डाला वोट, 5 जनवरी 2027 से शुरू होगा नया कार्यकाल

ब्राज़ील में Lula की ऐतिहासिक वापसी, चौथी बार राष्ट्रपति चुने गए; Bolsonaro के बेटे को दी मात
प्रतीकात्मक तस्वीर, AI से बनाई गई। यह वास्तविक घटना का चित्रण नहीं है।

चार दशक बाद ऐसा राजनीतिक कमबैक

ब्राज़ील की राजनीति में Luiz Inácio Lula da Silva ने एक बार फिर इतिहास रच दिया है। 25 अक्टूबर 2026 को हुए राष्ट्रपति चुनाव के दूसरे दौर में Lula ने दक्षिणपंथी उम्मीदवार Flávio Bolsonaro को हराकर राष्ट्रपति पद पर अपनी वापसी पक्की कर ली। इस जीत के साथ Lula ब्राज़ील के आधुनिक लोकतांत्रिक इतिहास में चौथी बार राष्ट्रपति बनने वाले पहले नेता बन गए हैं।

ब्राज़ील के Superior Electoral Court (TSE) के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक Lula को 64,256,232 वोट यानी 51.79% वैध वोट मिले। वहीं Jair Bolsonaro के बेटे Flávio Bolsonaro को 59,826,041 वोट यानी 48.21% मिले। दोनों के बीच अंतर लगभग 44.3 लाख वोट का रहा।

यह नतीजा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि मुकाबला बेहद करीबी था और चुनाव से पहले दोनों उम्मीदवारों के बीच कांटे की टक्कर दिखाई दे रही थी।

पहले दौर में पिछड़े, दूसरे दौर में पलटी बाजी

इस चुनाव की सबसे बड़ी कहानी Lula की comeback politics रही। पहले दौर में Flávio Bolsonaro आगे रहे थे, जबकि Lula दूसरे स्थान पर थे। इसके बाद दोनों उम्मीदवारों के बीच सीधे मुकाबले के लिए दूसरा दौर हुआ।

दूसरे दौर में Lula ने अपनी राजनीतिक पकड़, सामाजिक कल्याण के मुद्दों और व्यापक चुनावी लामबंदी के सहारे तस्वीर बदल दी। Reuters के अनुसार, Lula पहले दौर में दूसरे स्थान पर रहने के बाद राष्ट्रपति चुनाव के रनऑफ में जीत हासिल करने वाले लोकतांत्रिक दौर के पहले उम्मीदवार बने हैं।

उनकी जीत को दक्षिणपंथी राजनीति के बढ़ते प्रभाव के बीच ब्राज़ील की राजनीति में महत्वपूर्ण मोड़ के तौर पर देखा जा रहा है।

Flávio Bolsonaro की हार, परिवार की सत्ता वापसी की कोशिश को झटका

Lula के सामने उम्मीदवार थे Flávio Bolsonaro, जो पूर्व राष्ट्रपति Jair Bolsonaro के बेटे हैं। Flávio ने दक्षिणपंथी मतदाताओं को लामबंद करने और Bolsonaro परिवार की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाने की कोशिश की।

पहले दौर में बढ़त मिलने के बाद उनके समर्थकों को उम्मीद थी कि दूसरे दौर में वे Lula को हरा सकते हैं। लेकिन अंतिम मुकाबले में Lula ने बढ़त हासिल कर ली।

Reuters के मुताबिक Flávio Bolsonaro ने चुनाव परिणाम को स्वीकार करने से इनकार किया है और मतदान के समय बढ़ाए जाने के फैसले को लेकर नतीजे को चुनौती देने की बात कही है। हालांकि, चुनाव परिणाम पलटने की संभावना को विश्लेषकों ने बेहद कम बताया है।

मतदान के दौरान क्यों बढ़ा विवाद?

राष्ट्रपति चुनाव के दूसरे दौर में मतदान केंद्रों पर कुछ क्षेत्रों में समस्याओं के कारण मतदान का समय दो घंटे बढ़ाया गया। इस फैसले को लेकर राजनीतिक विवाद भी खड़ा हुआ।

दोनों प्रमुख अभियानों ने अलग-अलग कारणों से मतदान अवधि बढ़ाने की मांग की थी। बाद में Flávio Bolsonaro की ओर से इस फैसले पर सवाल उठाए गए।

इसके बावजूद ब्राज़ील के चुनाव प्राधिकरण ने मतगणना पूरी की और Lula की जीत की आधिकारिक घोषणा की। TSE के मुताबिक दूसरे दौर में 12.82 करोड़ से अधिक मतदाता मतदान करने पहुंचे और मतदान प्रतिशत पहले दौर की तुलना में बेहतर रहा।

Lula के लिए चौथा कार्यकाल क्यों खास है?

Lula की राजनीतिक यात्रा बेहद असाधारण रही है। वे पहले 2003 से 2010 तक राष्ट्रपति रहे। इसके बाद कई वर्षों तक वे सत्ता से बाहर रहे और 2022 में Jair Bolsonaro को हराकर फिर राष्ट्रपति बने।

अब 2026 की जीत के बाद वे चौथी बार राष्ट्रपति पद संभालेंगे।

उनका राजनीतिक सफर केवल चुनावी जीत तक सीमित नहीं रहा। Lula ने खुद को लंबे समय से कामगारों, गरीबों और सामाजिक कल्याण से जुड़े मुद्दों के नेता के रूप में पेश किया है।

उनकी सरकार ने गरीबी, सामाजिक सहायता, रोजगार और आर्थिक विकास को चुनाव अभियान के प्रमुख मुद्दों में रखा। इस बार भी महंगाई, जीवन-यापन की लागत और सामाजिक सुरक्षा जैसे मुद्दे चुनावी बहस के केंद्र में रहे।

80 साल की उम्र में एक और बड़ी राजनीतिक उपलब्धि

Lula की उम्र भी इस चुनाव को ऐतिहासिक बनाती है। वे 80 वर्ष की उम्र में फिर राष्ट्रपति चुने गए हैं।

आधिकारिक जानकारी के अनुसार उनका नया कार्यकाल 5 जनवरी 2027 से शुरू होगा। इससे वे ब्राज़ील के लोकतांत्रिक दौर में राष्ट्रपति पद की शपथ लेने वाले सबसे उम्रदराज नेताओं में अपना ही रिकॉर्ड आगे बढ़ाएंगे।

आगे Lula के सामने बड़ी चुनौतियां

हालांकि चुनाव जीतना Lula के लिए बड़ी उपलब्धि है, लेकिन नया कार्यकाल आसान नहीं होगा।

सबसे बड़ी चुनौती होगी अर्थव्यवस्था और सरकारी खर्च के बीच संतुलन बनाना। Reuters के अनुसार ब्राज़ील में सार्वजनिक कर्ज GDP के 82% से ऊपर पहुंच चुका है और अगले साल आर्थिक वृद्धि करीब 2.3% रहने का अनुमान है। ऊंची ब्याज दरें भी सरकार के लिए चुनौती बनी हुई हैं।

इसके अलावा संसद में विपक्ष का प्रभाव मजबूत है। Bolsonaro की Liberal Party और उसके सहयोगी दलों की मौजूदगी Lula सरकार के लिए कई महत्वपूर्ण विधेयकों और आर्थिक नीतियों को आगे बढ़ाना मुश्किल बना सकती है।

इसका मतलब है कि Lula को केवल जनता का समर्थन ही नहीं, बल्कि संसदीय सहयोग और राजनीतिक समझौते भी जुटाने होंगे।

लैटिन अमेरिका की राजनीति पर भी पड़ेगा असर

Lula की जीत का असर ब्राज़ील की सीमाओं से बाहर भी देखा जा रहा है। हाल के वर्षों में लैटिन अमेरिका के कई देशों में दक्षिणपंथी राजनीति मजबूत हुई है। ऐसे माहौल में Lula की वापसी क्षेत्रीय राजनीति में एक अलग राजनीतिक संतुलन पैदा कर सकती है।

अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump के साथ Lula के राजनीतिक मतभेद भी पहले से चर्चा में रहे हैं। इसलिए आने वाले वर्षों में Brazil-US relations, व्यापार, पर्यावरण नीति और वैश्विक कूटनीति महत्वपूर्ण मुद्दे रहेंगे।

अब आगे क्या?

Lula का नया कार्यकाल जनवरी 2027 में शुरू होगा। तब तक नई सरकार के गठन, मंत्रालयों और नीतिगत प्राथमिकताओं पर काम होगा।

सबसे बड़ा सवाल यह रहेगा कि क्या Lula अपनी चुनावी जीत को आर्थिक सुधार, सामाजिक योजनाओं और राजनीतिक स्थिरता में बदल पाएंगे।

फिलहाल इतना साफ है कि 2026 का ब्राज़ील चुनाव केवल सत्ता परिवर्तन की कहानी नहीं है। यह एक ऐसे नेता की राजनीतिक वापसी है, जिसने पहले दौर की हार के बाद दूसरे दौर में बाजी पलटकर चौथी बार राष्ट्रपति पद हासिल किया और ब्राज़ील की आधुनिक लोकतांत्रिक राजनीति में एक नया रिकॉर्ड कायम किया।