Skip to content
24/7 News Uttar Pradesh
Breaking

G20 में जयशंकर का दुनिया को संदेश—जंग से नहीं सुलझेंगे संकट, बातचीत और कूटनीति को मिले मौका

अटलांटा में G20 विदेश मंत्रियों की बैठक के दौरान भारत ने सैन्य कार्रवाई के बजाय कूटनीतिक प्रयासों पर जोर दिया। जयशंकर ने समुद्री रास्तों की सुरक्षा, जहाजों पर हमले रोकने और वैश्विक व्यापारिक आपूर्ति श्रृंखला को सुरक्षित रखने की भी मांग उठाई।

G20 में जयशंकर का दुनिया को संदेश—जंग से नहीं सुलझेंगे संकट, बातचीत और कूटनीति को मिले मौका
प्रतीकात्मक तस्वीर, AI से बनाई गई। यह वास्तविक घटना का चित्रण नहीं है।

G20 मंच से भारत की अपील: सैन्य समाधान नहीं, कूटनीति जरूरी
दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में जारी संघर्षों और बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच भारत ने बातचीत और कूटनीति को प्राथमिकता देने की अपील की है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने शुक्रवार को अमेरिका के अटलांटा में आयोजित G20 विदेश मंत्रियों की बैठक के पहले पूर्ण सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि वैश्विक चुनौतियों का समाधान सैन्य ताकत से नहीं निकलेगा। ऐसे हालात में कूटनीति को अपना काम करने का मौका दिया जाना चाहिए।

यह बैठक अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो की मेजबानी में हुई। जयशंकर ने बैठक के बाद सोशल मीडिया पोस्ट में भी अपने विचार साझा करते हुए कहा कि दुनिया की चुनौतियों के सामने सैन्य समाधान कारगर नहीं होंगे और कूटनीति को अवसर देना जरूरी है।

रूस-यूक्रेन और पश्चिम एशिया के तनाव के बीच बयान
जयशंकर की यह अपील ऐसे समय आई है, जब रूस-यूक्रेन युद्ध और पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण अंतरराष्ट्रीय राजनीति, ऊर्जा बाजार और व्यापारिक मार्गों पर दबाव बना हुआ है।

भारत का जोर इस बात पर रहा कि संघर्षों का असर केवल संबंधित देशों तक सीमित नहीं रहता। युद्ध और समुद्री असुरक्षा के कारण ईंधन, खाद्य पदार्थों और उर्वरकों की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। इसका असर खासतौर पर विकासशील देशों और आम लोगों पर पड़ता है।

समुद्री रास्तों की सुरक्षा पर भी उठाई आवाज
G20 बैठक में जयशंकर ने समुद्री मार्गों से सुरक्षित आवाजाही की स्वतंत्रता बनाए रखने की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने नागरिक जहाजों और नाविकों पर होने वाले हमलों को रोकने की मांग की और कहा कि समुद्री सुरक्षा से जुड़े नियमों का पालन अंतरराष्ट्रीय कानूनों के तहत होना चाहिए।

इस संदर्भ में उन्होंने संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून संधि (UNCLOS) का उल्लेख किया। भारत की चिंता यह भी है कि समुद्री रास्तों पर हमलों और बाधाओं से वैश्विक व्यापार तथा जरूरी वस्तुओं की उपलब्धता प्रभावित होती है।

जयशंकर के मुताबिक, ग्लोबल साउथ के देश नागरिक जहाजों और नाविकों पर हमलों का असमान रूप से अधिक बोझ उठा रहे हैं। इससे ईंधन, भोजन और उर्वरकों की उपलब्धता के साथ उनकी कीमतों पर भी असर पड़ता है।

22 भारतीयों की मौत का भी किया उल्लेख
आकाशवाणी की रिपोर्ट के अनुसार, पश्चिम एशिया में फरवरी 2026 में संघर्ष शुरू होने के बाद से अब तक कम-से-कम 22 भारतीयों की जान जा चुकी है, जिनमें 14 नाविक शामिल हैं। यह आंकड़ा क्षेत्र में जारी संघर्ष और समुद्री असुरक्षा के भारतीय नागरिकों पर पड़ रहे असर को भी सामने लाता है।

आतंकवाद को लेकर भी देशों को चेताया
जयशंकर ने आतंकवाद के मुद्दे पर भी देशों को आगाह किया। उन्होंने कहा कि रणनीतिक या तात्कालिक राजनीतिक हितों के कारण आतंकवाद के खतरों को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। उनके अनुसार, आतंकवाद एक गंभीर जोखिम है और इसे बढ़ावा देने या अनदेखा करने के परिणाम सामने आ सकते हैं।

आपूर्ति श्रृंखला को हथियार बनाने पर चिंता
विदेश मंत्री ने वैश्विक व्यापार और औद्योगिक विकास से जुड़े मुद्दे भी उठाए। उन्होंने आपूर्ति श्रृंखलाओं को दबाव बनाने के साधन के रूप में इस्तेमाल करने, बाजारों तक पहुंच सीमित करने और व्यापार में असंतुलन पैदा करने जैसी प्रवृत्तियों पर चिंता जताई।

उन्होंने ऐसे वैकल्पिक और भरोसेमंद संपर्क मार्ग विकसित करने की जरूरत बताई, ताकि किसी एक क्षेत्र में संकट आने पर वैश्विक व्यापार पूरी तरह बाधित न हो।

आगे क्या?
G20 बैठक में भारत की ओर से उठाए गए मुद्दे बताते हैं कि नई दिल्ली वैश्विक संघर्षों के समाधान में कूटनीति, अंतरराष्ट्रीय कानून और सुरक्षित व्यापारिक मार्गों को महत्वपूर्ण मानती है। हालांकि, इन अपीलों के बाद संबंधित देशों के बीच क्या ठोस सहमति बनती है और समुद्री सुरक्षा को लेकर कौन-से कदम उठाए जाते हैं, यह आगे की बातचीत पर निर्भर करेगा।