महाराष्ट्र के मुंबई स्थित IIT बॉम्बे के छात्र साहिल वाकोड़े की मौत का मामला एक बार फिर चर्चा में है। छात्र के माता-पिता रवींद्र और सोनाली वाकोड़े ने अपने बेटे की मौत की निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच की मांग करते हुए बॉम्बे हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। परिवार चाहता है कि जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) या किसी विशेष जांच दल (SIT) को सौंपी जाए और इसकी निगरानी बॉम्बे हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश करें।
18 सितंबर को हुई थी छात्र की मौत
20 वर्षीय साहिल IIT बॉम्बे में BTech के दूसरे वर्ष का छात्र था। उसकी मौत 18 सितंबर 2026 को हुई थी। संस्थान की ओर से सामने आए शुरुआती विवरण के अनुसार, परीक्षा के दौरान मोबाइल फोन के इस्तेमाल को लेकर उसे पकड़े जाने के बाद यह घटना हुई थी।
हालांकि, परिवार ने इस घटनाक्रम को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। माता-पिता का आरोप है कि परीक्षा के दौरान और उसके बाद साहिल के साथ जातिगत आधार पर अपमानजनक व्यवहार किया गया। उनका दावा है कि संस्थान के कुछ अधिकारियों और शिक्षकों के कथित व्यवहार की स्वतंत्र जांच होनी चाहिए। ये आरोप अभी अदालत में साबित नहीं हुए हैं।
परिवार ने शिक्षक और संस्थान के अधिकारियों पर लगाए आरोप
माता-पिता की याचिका में आरोप लगाया गया है कि 18 सितंबर को परीक्षा के दौरान कथित अनियमितता के मामले में साहिल की उत्तर पुस्तिका जब्त करने और नियमानुसार दूसरी उत्तर पुस्तिका देने के बजाय उसे परीक्षा कक्ष से बाहर ले जाया गया। परिवार का दावा है कि वहां उसके साथ कथित तौर पर अपमानजनक व्यवहार किया गया और उसे विभागाध्यक्ष के कार्यालय में ले जाया गया।
याचिका में IIT के प्रोफेसर सूर्यनारायण दुल्ला का नाम भी शामिल है। परिवार ने आरोप लगाया है कि साहिल को पहले भी जातिगत टिप्पणियों का सामना करना पड़ा था। पुलिस ने पहले ही आत्महत्या के लिए उकसाने और SC/ST अत्याचार निवारण कानून के तहत मामला दर्ज किया था। इन आरोपों की जांच जारी है।
CBI या SIT जांच के साथ सबूत सुरक्षित रखने की मांग
परिवार ने हाईकोर्ट से केवल जांच एजेंसी बदलने की मांग नहीं की है। याचिका में 18 सितंबर की पूरी CCTV फुटेज सुरक्षित रखने, घटना के गवाह छात्रों और कर्मचारियों को किसी भी तरह के दबाव से बचाने तथा जांच की निगरानी सेवानिवृत्त न्यायाधीश से कराने की मांग भी की गई है।
माता-पिता ने एक विशेष SC/ST अदालत में अलग आवेदन देकर जांच की प्रगति पर रिपोर्ट मांगी है। उन्होंने आरोप लगाया है कि CCTV फुटेज, निजी फोन बातचीत और कथित माफीनामे से जुड़ी जानकारी चुनिंदा तरीके से मीडिया में लीक की गई। परिवार ने परीक्षा की उत्तर पुस्तिका के एक पन्ने के गायब होने का दावा भी किया है और मूल उत्तर पुस्तिका को फॉरेंसिक जांच के लिए सुरक्षित रखने की मांग की है।
मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच कर रही है जांच
साहिल के माता-पिता की शिकायत के बाद पवई पुलिस ने 19 सितंबर को आत्महत्या के लिए उकसाने और SC/ST अत्याचार निवारण कानून के प्रावधानों के तहत FIR दर्ज की थी। बाद में जांच मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच को सौंप दी गई।
राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष ने भी 24 सितंबर को IIT बॉम्बे परिसर का दौरा कर परिवार की शिकायतें सुनी थीं और संबंधित साक्ष्य सुरक्षित रखने तथा उनकी जांच करने पर जोर दिया था।
अब हाईकोर्ट के रुख पर नजर
माता-पिता की याचिका में पुलिस जांच की निष्पक्षता पर सवाल उठाए गए हैं। परिवार चाहता है कि मामले की जांच स्वतंत्र एजेंसी करे और सभी महत्वपूर्ण साक्ष्यों की फॉरेंसिक जांच हो। फिलहाल CBI जांच का आदेश दिए जाने की पुष्टि नहीं है—यह परिवार की ओर से हाईकोर्ट में की गई मांग है। अदालत का आगे का रुख इस मामले में महत्वपूर्ण होगा।