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H-1B Visa विवाद में भारत की एंट्री, अमेरिका को क्यों याद दिलाए अपने तर्क?

जेडी वेंस के एच-1बी कर्मचारियों को 'बंधुआ मजदूर' कहने पर विदेश मंत्रालय ने कड़ी आपत्ति जताई।

सरकारी कार्यालय में वीजा नीति से संबंधित दस्तावेज़
प्रतीकात्मक तस्वीर, AI से बनाई गई। यह वास्तविक घटना का चित्रण नहीं है।

अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के एच-1बी वीजा धारकों को 'बंधुआ मजदूर' कहने पर भारत ने कड़ी आपत्ति जताई है। भारत के विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को इस बयान को गहरे तौर पर अपमानजनक बताया।

वेंस ने बृहस्पतिवार को एक समाचार सम्मेलन में कहा, 'आप विदेश से बंधुआ मजदूर लाते हैं, अमेरिकी कर्मचारियों को निकालते हैं और वेतन कम करके उन्हें विदेशियों से बदल देते हैं।' उन्होंने माइक्रोसॉफ्ट पर 6,000 कर्मचारियों को निकालकर एच-1बी वीजा धारकों से बदलने का आरोप लगाया।

भारत की आपत्ति

विदेश मंत्रालय के बयान में कहा गया कि ऐसी भाषा औपनिवेशिक विरासत से जुड़ी दर्दनाक परंपरा को दर्शाती है। मंत्रालय ने कहा कि भारतीय पेशेवर उच्च शिक्षित और कुशल हैं, जो अमेरिकी अर्थव्यवस्था और तकनीकी विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

भारत ने अपने बयान में कहा कि इस तरह की टिप्पणी अनुचित है और प्रतिभा की गतिविधि दोनों देशों के लिए मूल्य जोड़ती है।

अमेरिकी कार्रवाई

अमेरिकी श्रम विभाग ने माइक्रोसॉफ्ट, एडोब और 6 भारतीय आईटी कंपनियों - कॉग्निजेंट, इन्फोसिस, कैपजेमिनी, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज, विप्रो और एचसीएल को परमानेंट लेबर सर्टिफिकेशन कार्यक्रम से निलंबित कर दिया है। इसका मतलब है कि ये कंपनियां अब अपने कर्मचारियों के लिए एच-1बी वीजा के माध्यम से स्थायी निवास के लिए आवेदन नहीं कर सकती।

विदेश मंत्रालय ने भारतीय नागरिकों को आश्वस्त किया कि अमेरिका की यह कार्रवाई पहले से जारी एच-1बी वीजा या धारकों और उनके आश्रितों की स्थिति को प्रभावित नहीं करेगी।