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झांसी में ड्रग्स वसूली के लिए बीए एलएलबी छात्र की हत्या, आठ गिरफ्तार

पोस्टमार्टम में दांत के निशान मिलने से पुलिस को अपहरण और मारपीट का सुराग मिला।

दांत के निशान की जांच करते फोरेंसिक विशेषज्ञ के साथ प्रयोगशाला में सबूत।
प्रतीकात्मक तस्वीर, AI से बनाई गई। यह वास्तविक घटना का चित्रण नहीं है।

झांसी में बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के बीए एलएलबी अंतिम वर्ष के छात्र परवेज अली की हत्या का मामला पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद सुलझ गया। शुरू में पुलिस मौत को नशे के कारण गिरने की वजह से हुई हादसा मानती थी, लेकिन 14 सितंबर को आई पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने सब कुछ बदल दिया।

दाहिनी जांघ पर दांत से काटे जाने के छह निशान मिले। पुलिस की जांच की दिशा तुरंत बदल गई और मामला हत्या के दायरे में आ गया। एसएसपी विकास कुमार ने एएसपी अरीबा नोमान की अगुआई में तीन वरिष्ठ अफसरों की टीम गठित की। पुलिस ने 150 से अधिक सीसीटीवी कैमरों की फुटेज, कॉल डिटेल रिकॉर्ड और परवेज की आखिरी गतिविधियों की जांच शुरू की।

अपहरण का खेल

13 सितंबर की रात परवेज एक दोस्त से मिलने की बात कहकर घर से निकला। सुकुवां-ढुकुवां कॉलोनी में राहगीर को अपने दोस्त साहिल मिश्रा की लाल मारुति एस-क्रॉस कार मिली। साहिल ने फोन करके परवेज को बुलाया और उसके खाते में पांच हजार रुपये ट्रांसफर किए। परवेज को कार में बिठाते समय उसे पता नहीं था कि क्या होने वाला है।

कार में प्रेमनगर थाने का सिपाही आशीष सिंह, प्रयांश, जय श्रीवास्तव और भूपेंद्र बैठे थे। तीन कारों में कुल 11 युवक सवार थे। परवेज को अचानक एहसास हो गया और वह चिल्लाने लगा। तब उसके साथ मारपीट शुरू हुई। घायल परवेज को नगरा हाट मैदान में छोड़ दिया गया। सिपाही आशीष घटना के साथ मौजूद थे, लेकिन उन्होंने अपनी पुलिस को सूचित नहीं किया।

दांत के निशान बोल गए

राहगीरों से सूचना मिलने पर पुलिस पहुंची। परवेज अचेत अवस्था में पड़ा था। मेडिकल अस्पताल में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। पोस्टमार्टम में पता चला कि भूपेंद्र और सनी ने परवेज की जांघ में दांत से काटा था। पूछताछ में उन्होंने कहा कि मारपीट के दौरान परवेज बेहोश होने लगा था। उन्हें लगा कि नशे का असर है, इसलिए उसे होश में लाने के लिए काटा।

एसएसपी विकास कुमार के अनुसार भूपेंद्र और सनी के दांतों के सैंपल लिए गए हैं। ये सैंपल मिलान के लिए भेजे जा रहे हैं। रिपोर्ट आने के बाद दांत से काटे गए निशानों की पुष्टि हो जाएगी।

सिपाही का रिश्ता और ड्रग्स कनेक्शन

जांच में यह भी सामने आया कि सिपाही आशीष कुछ समय परवेज के घर किराये पर रहते थे। इसी दौरान उन्हें परवेज के बारे में जानकारी मिली कि वह कश्मीर से ड्रग्स मंगवाता था। परवेज की हत्या के बाद पुलिस को पता चला कि वह सिंथेटिक ड्रग्स की सप्लाई का हिस्सा था।

ड्रग्स का अपराध रिकॉर्ड देखते हुए पुलिस को संदेह है कि परवेज को ड्रग्स की वसूली के लिए मारा गया। साहिल मिश्रा के फोन से पांच हजार रुपये ट्रांसफर का सबूत मिला। सीसीटीवी फुटेज में परवेज साहिल की कार में बैठता नजर आया। प्रयांश सोनी भी ड्रग्स का कारोबार करता है और पुलिस के रिकॉर्ड में है।

एमडीएमए नेटवर्क का खुलासा

परवेज हत्याकांड की जांच से झांसी में चल रहे सिंथेटिक ड्रग्स नेटवर्क की परतें खुलने लगी हैं। पुलिस को संदेह है कि पाकिस्तान के कथित हैंडलर के संपर्क में परवेज सीमा पार से ड्रोन के जरिये नशे का सामान प्राप्त करता था। जम्मू-कश्मीर में उसके साथ काम करने वाले लोग इसे दिल्ली, मुंबई और अन्य शहरों तक पहुंचाते थे।

पुलिस के अनुसार, एमडीएमए जैसे महंगे सिंथेटिक ड्रग्स झांसी में भी सप्लाई किए जा रहे थे। परवेज खुद भी इसका आदी था। 2022 में ग्वालियर पुलिस ने 720 ग्राम एमडीएमए बरामद किया था। उस मामले में आरोपियों ने कहा था कि ड्रग्स चिरगांव से खरीदा था। इस खुलासे के बाद पुलिस को पता चला कि यह नेटवर्क कई शहरों में फैला है।

कश्मीर में भी दर्ज था मामला

परवेज के खिलाफ फरवरी में जम्मू-कश्मीर में नारकोटिक्स ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सबस्टेंसेस (एनडीपीएस) एक्ट और आर्म्स एक्ट के तहत प्राथमिकी दर्ज हुई थी। यह रिपोर्ट सेना की ओर से दर्ज कराई गई थी। परवेज कुछ समय जेल में भी रहा। जेल से बाहर आने के बाद वह झांसी लौट आया।

पुलिस जम्मू-कश्मीर में दर्ज मामले, वहां परवेज के संपर्कों और झांसी में सक्रिय नेटवर्क के बीच संबंधों की जांच कर रही है। जांच का मुख्य बिंदु यह जानना है कि सीमा पार से आने वाला ड्रग्स नेटवर्क झांसी तक किस तरह पहुंचा और स्थानीय स्तर पर कौन-कौन इसमें जुड़े हैं।

पुलिस ने प्रेमनगर थाने के सिपाही आशीष सिंह को निलंबित कर दिया है। बाकी सात आरोपियों में साहिल मिश्रा, प्रयांश, जय श्रीवास्तव, भूपेंद्र, सनी और अन्य शामिल हैं।