लखनऊ पुलिस ने अलीगंज के रिध्या प्लाजा में चल रहे एक फर्जी कॉल सेंटर का भंडाफोड़ करते हुए 12 पुरुषों और चार महिलाओं समेत कुल 16 लोगों को गिरफ्तार किया है। कपूरथला पुलिस चौकी के ठीक पास चल रहा यह सेंटर अमेरिकी नागरिकों को फर्जी टेक्निकल सपोर्ट के नाम पर ठगता था।
पुलिस के मुताबिक 18 सितंबर की सुबह करीब चार बजे अलीगंज पुलिस गश्त के दौरान रिध्या प्लाजा के पास एक संदिग्ध व्यक्ति मिला, जिसने प्लाजा में काम करने की बात कबूल की। इसी सुराग पर सुबह करीब सात बजे अलीगंज पुलिस और साइबर क्राइम टीम ने संयुक्त छापेमारी की, जिसमें रैकेट का पर्दाफाश हुआ। यह जानकारी डीसीपी नॉर्थ अमित कुमार आनंद ने दी।
चार महीने से चल रहा था सेंटर, बगल में पुलिस चौकी
यह कॉल सेंटर रिध्या प्लाजा में करीब चार महीने पहले किराए के कार्यालय में शुरू हुआ था। बिल्डिंग के भूतल पर कुछ नहीं था, पहले तल पर कॉल सेंटर, दूसरे तल पर एक ऑनलाइन गिफ्टिंग व डिलीवरी प्लेटफार्म का दफ्तर और उसके ऊपर जिम चलता था। इस वजह से तड़के से आधी रात तक इमारत में लोगों की आवाजाही बनी रहती थी, जिससे यह सेंटर काफी समय तक शक के दायरे से बाहर रहा।
मौके से 36 लैपटॉप, 20 माउस, 22 हेडफोन, 32 लैपटॉप चार्जर, पांच राउटर और 20 मोबाइल फोन बरामद हुए। जांच में यह भी सामने आया कि आरोपित यूजी सॉफ्टवेयर UltraViewer जैसे रिमोट एक्सेस टूल के जरिये पीड़ितों के कंप्यूटर का नियंत्रण अपने हाथ में ले लेते थे।
कैसे होती थी ठगी
पुलिस पूछताछ में सामने आया कि आरोपित इंटरनेट पर फर्जी कस्टमर केयर और टेक्निकल सपोर्ट नंबर चलाते थे। अमेरिकी नागरिक कंप्यूटर या सॉफ्टवेयर से जुड़ी दिक्कत के लिए फोन करता, तो कॉल इंटरनेट के जरिये इसी सेंटर में पहुंचती। इसके बाद आरोपित पीड़ित के कंप्यूटर तक पहुंच बनाकर उससे रकम ऐंठते थे।
पुलिस के अनुसार पूरे नेटवर्क का काम अलग-अलग टीमों में बंटा था। अलीगंज के आरोपितों की जिम्मेदारी अमेरिकी नागरिकों की जानकारी जुटाकर दूसरी टीम तक पहुंचाना था, जबकि रकम निकालने का काम अलग टीम करती थी। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि दूसरी टीम कहां से काम करती थी और ठगी की रकम किस माध्यम से आरोपितों तक पहुंचती थी। कर्मचारियों को 18 से 30 हजार रुपये मासिक वेतन के साथ रहने-खाने की सुविधा दी जाती थी।
अहमदाबाद से जुड़ा तार, मुख्य आरोपित फरार
छानबीन में सामने आया कि सेंटर के दो मैनेजर नेहल सिद्पुरा और मनसुख भाई पटेरिया अहमदाबाद के रहने वाले हैं। ये दोनों नए युवकों को नौकरी पर रखने के साथ उन्हें ठगी की ट्रेनिंग भी देते थे। सेंटर की जगह भी अहमदाबाद निवासी श्रीकुशवाहा प्रियांशु उर्फ शिव के नाम पर किराए पर ली गई थी, जो पूरे रैकेट का संचालन कर रहा था और फिलहाल फरार है। पकड़े गए ज्यादातर आरोपित पश्चिम बंगाल और गुजरात के रहने वाले बताए जा रहे हैं।
चार महीने में पांचवां कॉल सेंटर बेनकाब
लखनऊ में बीते कुछ महीनों में फर्जी कॉल सेंटरों पर लगातार कार्रवाई हो रही है। 15 जून को विभूति खंड के आरएस टावर में फर्जी जॉब प्लेसमेंट सेंटर से पांच लोग, 28 जून को विभूति खंड के ही एक और सेंटर से तीन लोग गिरफ्तार हुए थे। 1 जुलाई को विभूति खंड की समिट बिल्डिंग में फर्जी इंटरनेशनल कॉल सेंटर पकड़ा गया था, जिसमें 119 आरोपित गिरफ्तार हुए। 17 जुलाई को ओमैक्स आर-दो और 23 जुलाई को साइबर हाइट्स के एक फ्लैट में भी इसी तरह के सेंटर पकड़े गए थे।
पुलिस को शक है कि समिट बिल्डिंग, ओमैक्स आर-दो और अब अलीगंज के सेंटर एक ही पैटर्न पर काम कर रहे थे, क्योंकि तीनों जगह अमेरिकी नागरिकों को टेक्निकल सपोर्ट के नाम पर फंसाने का तरीका लगभग एक जैसा मिला है। समिट बिल्डिंग नेटवर्क का मुख्य आरोपित चार्ल्स अब तक पुलिस की पकड़ से बाहर है। अलीगंज की कार्रवाई के बाद पुलिस अब इन सभी सेंटरों के बीच डाटा आपूर्ति और आपसी संपर्क की भूमिका की भी पड़ताल कर रही है ताकि अहमदाबाद से जुड़े संचालकों और समिट बिल्डिंग नेटवर्क के बीच संबंध सामने आ सकें।