लखनऊ में आयोजित TOI Youth Icons Summit & Awards 2026 के उत्तर प्रदेश चैप्टर में फिल्म ‘हनुमान अंश’ चर्चा का केंद्र बनी। कार्यक्रम में फिल्म के निर्देशक विशाल चतुर्वेदी और लोकगायक सुनील लोधी ने बताया कि किस तरह भक्ति, लोकसंगीत और बाबा नीब करौरी के जीवन से जुड़ी कहानी ने दर्शकों के बीच अपनी जगह बनाई।
29 अक्टूबर को प्रकाशित द टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, निर्देशक ने कहा कि फिल्म ने शुरुआती दो सप्ताह में बॉक्स ऑफिस पर कमजोर प्रदर्शन किया, लेकिन बाद में इसकी लोकप्रियता तेजी से बढ़ी। उन्होंने इस बदलाव को भगवान हनुमान और बाबा के आशीर्वाद से जोड़ा। वहीं, गायक सुनील लोधी ने बताया कि सोशल मीडिया पर उनके भक्ति गीत की लोकप्रियता ने उन्हें फिल्म में गाने का अवसर दिलाया।
शुरुआती सुस्ती के बाद कैसे बढ़ी फिल्म की चर्चा?
निर्देशक विशाल चतुर्वेदी ने कार्यक्रम में अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि फिल्म की शुरुआत उम्मीद के मुताबिक नहीं रही थी। पहले दो सप्ताह में कमजोर प्रदर्शन के बाद फिल्म को दर्शकों से बेहतर प्रतिक्रिया मिलने लगी।
उन्होंने फिल्म की लोकप्रियता को बाबा नीब करौरी और भगवान हनुमान के प्रति लोगों की श्रद्धा से जोड़ा। निर्देशक ने यह भी दावा किया कि फिल्म ने ₹500 करोड़ का आंकड़ा पार कर लिया है। हालांकि, यह आंकड़ा कार्यक्रम में निर्देशक की ओर से बताया गया था; इसे स्वतंत्र रूप से सत्यापित बॉक्स ऑफिस आंकड़ा नहीं माना जाना चाहिए।
फिल्म की चर्चा से यह सवाल भी उठता है कि धार्मिक विषयों पर बनी कहानियां दर्शकों के साथ भावनात्मक संबंध कैसे बनाती हैं। फिल्म निर्माताओं के मुताबिक, यहां कहानी के साथ संगीत और श्रद्धा का मेल महत्वपूर्ण रहा।
‘मैंने तेरे ही भरोसे हनुमान’ गीत ने कैसे बनाई पहचान?
कार्यक्रम में लोकगायक सुनील लोधी ने फिल्म के गीत ‘मैंने तेरे ही भरोसे हनुमान’ से जुड़े अपने अनुभव सुनाए। उन्होंने बताया कि वह बचपन से भगवान राम की कृपा और आस्था से जुड़ी बातें सुनते आए थे। बाद में जब उन्होंने यह गीत गाया, तो वह सोशल मीडिया पर लोकप्रिय हुआ और इसी से उन्हें फिल्म में गाने का अवसर मिला।
यह उनके लिए ऐसा मौका था, जिसकी उन्होंने पहले कल्पना भी नहीं की थी। गीत की लोकप्रियता ने लोकगायकी को फिल्म के प्रचार और दर्शकों के बीच चर्चा से जोड़ने में भूमिका निभाई। <Cite refs={["turn761460view0"]}/>
आज सोशल मीडिया किसी गीत को पारंपरिक प्रचार के दायरे से बाहर ले जाकर नए श्रोताओं तक पहुंचा सकता है। हालांकि, किसी गीत के वायरल होने और फिल्म की कुल कमाई के बीच सीधा संबंध स्थापित करने के लिए अलग-अलग आंकड़ों और प्रमाणों की जरूरत होती है।
लोकसंगीत ने फिल्म को दिया स्थानीय जुड़ाव
विशाल चतुर्वेदी ने फिल्म में लोकसंगीत के इस्तेमाल को इसकी लोकप्रियता का एक अहम पहलू बताया। उनके अनुसार, लोकधुनों ने कहानी को दर्शकों के लिए अधिक सहज और जुड़ाव भरा बनाया।
लोकसंगीत की खासियत यह है कि उसकी भाषा, धुन और भाव आम लोगों के रोजमर्रा के सांस्कृतिक अनुभवों से जुड़े होते हैं। भक्ति गीतों में परिचित शब्द, पारंपरिक गायकी और भावनात्मक प्रस्तुति श्रोताओं को कहानी के साथ जोड़ सकती है।
‘हनुमान अंश’ को लेकर निर्देशक और गायक की टिप्पणियां इसी पहलू को सामने लाती हैं—धार्मिक विषय, लोकधुन और सोशल मीडिया पर गीत की पहुंच मिलकर फिल्म की पहचान का हिस्सा बने।
बाबा नीब करौरी के जीवन पर आधारित है फिल्म
‘हनुमान अंश’ बाबा नीब करौरी के जीवन और उनसे जुड़ी आध्यात्मिक परंपरा पर आधारित फिल्म है। बाबा को उनके अनुयायी नीम करौली बाबा के नाम से भी जानते हैं। उनकी शिक्षाओं और भगवान हनुमान के प्रति भक्ति ने देश-विदेश में अनेक लोगों को प्रभावित किया है।
फिल्म की टीम ने लखनऊ में इससे पहले भी प्रचार गतिविधियां की थीं। सितंबर में फिल्म की टीम ने भाजपा महिला उपाध्यक्ष अपर्णा यादव से मुलाकात की थी। एक कार्यक्रम में अपर्णा यादव ने फिल्म का भक्ति गीत भी गाया था, जिसे वहां मौजूद लोगों ने तालियों के साथ सराहा।
फिल्म की विशेष स्क्रीनिंग भी लखनऊ में आयोजित हुई थी। सितंबर में गोमती नगर स्थित फन रिपब्लिक में आयोजित एक स्क्रीनिंग में 200 से अधिक महिलाओं के शामिल होने की रिपोर्ट आई थी। इस तरह फिल्म को लेकर शहर में प्रचार, विशेष प्रदर्शन और सांस्कृतिक गतिविधियां अलग-अलग स्तरों पर हुईं।
क्या आस्था और मनोरंजन का मेल आगे भी दर्शकों को आकर्षित करेगा?
फिल्म के निर्देशक और गायक के अनुभव बताते हैं कि धार्मिक विषयों पर आधारित फिल्मों में कहानी के साथ संगीत और दर्शकों की निजी आस्था भी महत्वपूर्ण हो सकती है। लोकगीतों की लोकप्रियता फिल्म को सोशल मीडिया पर चर्चा दिला सकती है, जबकि सांस्कृतिक कार्यक्रम दर्शकों को फिल्म के कलाकारों और रचनाकारों से सीधे जुड़ने का अवसर देते हैं।
हालांकि, फिल्म की सफलता का आकलन केवल सोशल मीडिया पर गीत की लोकप्रियता या मंच से किए गए दावों के आधार पर नहीं किया जा सकता। इसके लिए सत्यापित बॉक्स ऑफिस आंकड़े, दर्शकों की प्रतिक्रिया और फिल्म के प्रदर्शन से जुड़े अन्य प्रमाण भी जरूरी हैं।
निष्कर्ष: लखनऊ के कार्यक्रम में ‘हनुमान अंश’ की चर्चा ने एक बार फिर दिखाया कि भारतीय लोकसंगीत और धार्मिक कथाएं मनोरंजन की दुनिया में किस तरह एक-दूसरे से जुड़ सकती हैं। निर्देशक विशाल चतुर्वेदी और गायक सुनील लोधी ने अपने अनुभवों के जरिए फिल्म की यात्रा साझा की। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि फिल्म और उसके भक्ति गीतों को लेकर दर्शकों की रुचि आगे किस तरह बनी रहती है।