रूसी सेना के ग्लाइड बम हमले में क्रामातोरस्क शहर की दो यात्री बसों पर सीधी मार पड़ी। डोनेट्स क्षेत्र के प्रशासक वदीम फिलाश्किन के अनुसार इस हमले में 33 लोग मारे गए और 18 जख़्मी हुए।
यूक्रेन में रूसी हमलों का सिलसिला एक बार फिर बेहद घातक साबित हुआ है। देश के पूर्वी हिस्से के फ्रंटलाइन शहर क्रामाटोर्स्क में दो नागरिक यात्री बसों को निशाना बनाकर किए गए रूसी हमले में कम से कम 33 लोगों की मौत हो गई, जबकि 18 अन्य घायल हुए हैं। यूक्रेनी अधिकारियों के अनुसार, हमला उस सड़क पर हुआ जहां दो यात्री बसें चल रही थीं। शुरुआती घंटों में मृतकों की संख्या कम बताई गई थी, लेकिन बचाव अभियान आगे बढ़ने के साथ यह आंकड़ा बढ़कर 33 हो गया।
यूक्रेनी अधिकारियों ने बताया कि हमले में गाइडेड/ग्लाइड बम का इस्तेमाल किया गया। यूक्रेन की पुलिस के शुरुआती बयान में UMPB D-30 SN बम का उल्लेख किया गया था। हमले के बाद घटनास्थल पर बसों का जला हुआ ढांचा, मलबा और क्षतिग्रस्त इमारतें दिखाई दीं। स्थानीय अधिकारियों के अनुसार, यह हमला करीब सुबह 10 बजे हुआ।
दो बसों पर हुआ हमला
क्रामाटोर्स्क डोनेत्स्क क्षेत्र का एक महत्वपूर्ण शहर है और युद्ध की अग्रिम पंक्ति से लगभग 15 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। शहर में रूसी ड्रोन और गाइडेड बम हमलों का खतरा लगातार बना हुआ है।
स्थानीय अधिकारियों के अनुसार, हमले के समय सड़क पर दो निर्धारित रूट वाली यात्री बसें चल रही थीं। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने हमले वाली जगह को बस स्टॉप के रूप में भी बताया है। हमले के बाद शहर में सार्वजनिक परिवहन को अस्थायी रूप से निलंबित कर दिया गया है।
डोनेत्स्क क्षेत्र के प्रमुख वादिम फिलाश्किन ने रूस पर नागरिकों को निशाना बनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि हमले में आम लोग मारे गए हैं। हालांकि, रूस की ओर से इस ताजा हमले पर तत्काल कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की गई थी। रूस लगातार जानबूझकर नागरिकों को निशाना बनाने के आरोपों से इनकार करता रहा है।
घटनास्थल की तस्वीरों ने दिखाई तबाही
हमले के बाद सामने आई तस्वीरों में सड़क पर बिखरा मलबा और जली हुई बस का ढांचा दिखाई दिया। कुछ तस्वीरों में सड़क पर पड़े पीड़ित भी दिखाई दिए। बचावकर्मी और आपातकालीन सेवाओं की टीमें घटनास्थल पर पहुंचीं और राहत एवं बचाव अभियान चलाया।
हमले के बाद क्रामाटोर्स्क में सुरक्षा को लेकर चिंता और बढ़ गई है। शहर और इसके आसपास के इलाकों में पहले भी ड्रोन, तोपखाने और निर्देशित बमों से हमले होते रहे हैं।
क्रामाटोर्स्क क्यों है महत्वपूर्ण?
क्रामाटोर्स्क और पड़ोसी स्लोवियांस्क डोनेत्स्क क्षेत्र में यूक्रेन के नियंत्रण वाले महत्वपूर्ण शहर हैं। दोनों को यूक्रेन की रक्षा व्यवस्था के तथाकथित “फोर्ट्रेस बेल्ट” का हिस्सा माना जाता है।
रूस लंबे समय से पूरे डोनेत्स्क क्षेत्र पर नियंत्रण हासिल करने की कोशिश कर रहा है। क्रामाटोर्स्क और स्लोवियांस्क इस लिहाज से रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हैं। इन शहरों पर नियंत्रण से रूस को डोनेत्स्क के उस हिस्से में आगे बढ़ने में मदद मिल सकती है, जिस पर अभी यूक्रेन का नियंत्रण है।
हाल के दिनों में इस इलाके में रूसी ड्रोन और गाइडेड बम हमलों में तेजी देखी गई है।
एक दिन पहले प्रिलुकी में भी बड़ा हमला
क्रामाटोर्स्क की घटना से ठीक एक दिन पहले यूक्रेन के चेर्निहीव क्षेत्र के प्रिलुकी शहर में भी रूसी मिसाइल हमले में भारी तबाही हुई थी।
एक पांच मंजिला रिहायशी इमारत को निशाना बनाए जाने के बाद वहां मलबे में बड़े पैमाने पर राहत और बचाव अभियान चलाया गया। गुरुवार तक इस हमले में 22 लोगों की मौत की पुष्टि हुई, जिनमें पांच बच्चे शामिल हैं। करीब 54 लोग घायल हुए हैं।यूक्रेनी अधिकारियों के मुताबिक, इमारत पर मिसाइल का सीधा असर हुआ था। बचावकर्मियों ने मलबे से कई लोगों को बाहर निकाला और रातभर तलाशी अभियान जारी रखा। अधिकारियों ने बताया कि मृतकों में बच्चे भी शामिल हैं, जिससे इस हमले ने देशभर में चिंता बढ़ा दी है।
आगे क्या?
क्रामाटोर्स्क में 33 लोगों की मौत और 18 लोगों के घायल होने की घटना ने यूक्रेन में नागरिकों की सुरक्षा को लेकर सवाल और गहरे कर दिए हैं। इसके साथ ही प्रिलुकी में 22 लोगों की मौत ने लगातार दूसरे दिन बड़े पैमाने पर नागरिक हताहतों की तस्वीर सामने रखी है।
दोनों घटनाएं ऐसे समय में हुई हैं जब रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध जारी है और हवाई हमलों की तीव्रता बढ़ी हुई है। क्रामाटोर्स्क जैसे फ्रंटलाइन शहरों में रहने वाले नागरिकों के लिए सार्वजनिक परिवहन और रोजमर्रा की आवाजाही भी जोखिम भरी होती जा रही है।
फिलहाल क्रामाटोर्स्क हमले की परिस्थितियों की जांच जारी है। यूक्रेनी अधिकारी इसे नागरिकों पर हमला बता रहे हैं, जबकि रूस की ओर से इस विशेष घटना पर अभी विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। इस बीच यूक्रेन अपने पश्चिमी सहयोगियों से एयर डिफेंस और सैन्य सहायता बढ़ाने की मांग कर रहा है।