Saudi Arabia पर बढ़ते हमलों का असर अब वैश्विक तेल बाजार पर साफ दिखाई देने लगा है। Middle East में ऊर्जा ढांचे और समुद्री मार्गों की सुरक्षा को लेकर बढ़ी चिंता के बीच Brent crude पिछले सत्र में करीब 4% उछलकर पांच महीने के उच्च स्तर पर पहुंच गया। 22 अक्टूबर को Brent ने करीब $113.17 प्रति बैरल पर कारोबार किया, जबकि दिन के दौरान कीमत $115 के करीब पहुंच गई। 23 अक्टूबर की शुरुआती एशियाई ट्रेडिंग में Brent थोड़ा फिसलकर $112.96 प्रति बैरल पर आ गया।
तेल की कीमतों में यह तेजी केवल बाजार की सामान्य हलचल नहीं है। इसके पीछे मुख्य चिंता यह है कि Saudi Arabia दुनिया के सबसे बड़े तेल उत्पादकों और निर्यातकों में शामिल है और वहां के तेल प्रतिष्ठानों, समुद्री मार्गों या निर्यात ढांचे पर लगातार हमले लंबे समय तक जारी रहे तो वैश्विक सप्लाई प्रभावित हो सकती है।
Saudi Arabia पर हमलों से क्यों बढ़ी तेल की चिंता?
हाल के दिनों में Yemen के Houthi बलों और Saudi-led forces के बीच तनाव फिर तेज हुआ है। Saudi Arabia के ऊर्जा और अन्य महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे पर हमलों की खबरों ने बाजार को यह आशंका दी है कि Middle East से आने वाली तेल आपूर्ति में आगे और व्यवधान पैदा हो सकता है।
Reuters के मुताबिक, Saudi Aramco ने भी Dhahran स्थित अपने मुख्यालय से कर्मचारियों को निकालने का आदेश दिया है। Dhahran Saudi Arabia के महत्वपूर्ण ऊर्जा क्षेत्र के पास स्थित है, इसलिए वहां सुरक्षा हालात बिगड़ने की खबर ने बाजार की चिंता और बढ़ा दी।
तेल बाजार में कीमतें केवल वास्तविक सप्लाई रुकने पर नहीं बढ़तीं। जब कारोबारियों को लगता है कि भविष्य में उत्पादन, निर्यात या shipping प्रभावित हो सकता है, तो वे पहले ही कीमतों में risk premium जोड़ना शुरू कर देते हैं।
Brent पांच महीने के उच्च स्तर पर
22 अक्टूबर की ट्रेडिंग में Brent futures करीब 4% बढ़कर पांच महीने के उच्च स्तर पर पहुंचा। Reuters के अनुसार, एक समय Brent करीब $113.17 पर था और दिन के दौरान इससे ऊपर भी कारोबार हुआ। 23 अक्टूबर को शुरुआती कारोबार में कीमत मामूली नीचे आई, लेकिन यह अभी भी ऊंचे स्तर पर बनी हुई है।
दूसरी तरफ अमेरिकी benchmark WTI भी तेजी के बाद करीब $98 प्रति बैरल के आसपास रहा। 23 अक्टूबर की शुरुआती ट्रेडिंग में WTI करीब $98.12 प्रति बैरल पर था।
इसका मतलब है कि बाजार फिलहाल Middle East में किसी भी नई सैन्य घटना को सीधे oil supply risk के नजरिए से देख रहा है।
असली चिंता सिर्फ तेल उत्पादन नहीं, shipping भी है
Middle East से तेल की वैश्विक सप्लाई केवल उत्पादन पर निर्भर नहीं करती। इसे दुनिया के अलग-अलग हिस्सों तक पहुंचाने के लिए कई महत्वपूर्ण समुद्री रास्तों का इस्तेमाल होता है।
Bab el-Mandeb और Red Sea जैसे समुद्री मार्गों पर बढ़ता सैन्य तनाव shipping companies के लिए जोखिम बढ़ा सकता है। यदि जहाजों को लंबे रास्ते अपनाने पड़ते हैं या बीमा और freight cost बढ़ती है, तो तेल और अन्य commodities की कुल लागत भी बढ़ सकती है।
Reuters की रिपोर्ट के मुताबिक, Middle East से crude exports पिछले सप्ताह करीब 17 million barrels per day रहे, लेकिन क्षेत्र में जारी संघर्ष और shipping risks ने बाजार की चिंता को खत्म नहीं होने दिया।
यानी फिलहाल समस्या यह नहीं है कि पूरी Middle East oil supply बंद हो गई है। समस्या यह है कि बाजार को भविष्य में सप्लाई बाधित होने का खतरा दिखाई दे रहा है।
भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह खबर?
भारत दुनिया के बड़े crude oil importers में शामिल है। इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत बढ़ने का असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर कई रास्तों से पड़ सकता है।
सबसे पहले तेल महंगा होने से भारत का oil import bill बढ़ सकता है। इसके बाद डॉलर की मांग बढ़ने और विदेशी मुद्रा बाजार में दबाव बनने की संभावना रहती है।
23 अक्टूबर की Reuters रिपोर्ट के अनुसार, बढ़ती oil prices और global risk-off sentiment ने भारतीय रुपये की recovery पर दबाव बढ़ाया है। रुपया पिछले सत्र में 94.30 के आसपास छह सप्ताह के उच्च स्तर तक पहुंचने के बाद कमजोर होकर करीब 94.82 पर बंद हुआ था और शुक्रवार को 94.84–94.88 के आसपास खुलने की उम्मीद जताई गई थी।
इसका अर्थ यह है कि भारत के लिए महंगा crude और कमजोर रुपया एक साथ आते हैं तो तेल आयात की रुपये में लागत और बढ़ सकती है।
क्या पेट्रोल-डीजल तुरंत महंगा होगा?
Brent के $113-$115 के आसपास पहुंचने का मतलब यह नहीं है कि भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमत अगले ही दिन उसी अनुपात में बढ़ जाएगी।
घरेलू fuel prices पर कई चीजों का असर होता है—international crude price, रुपये की exchange rate, refining costs, taxes, freight और oil marketing companies की pricing policy।
इसके अलावा crude oil का असर घरेलू बाजार तक पहुंचने में समय भी लग सकता है। इसलिए अभी केवल अंतरराष्ट्रीय कीमत में उछाल देखकर यह कहना जल्दबाजी होगी कि पेट्रोल-डीजल में कितनी वृद्धि होगी।
लेकिन यदि Brent लंबे समय तक $110 से ऊपर बना रहता है और रुपया भी दबाव में रहता है, तो भारत के लिए ऊर्जा लागत का जोखिम निश्चित रूप से बढ़ जाएगा।
Saudi Aramco और ऊर्जा बाजार पर नजर
Saudi Arabia की सरकारी तेल कंपनी Saudi Aramco दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा कंपनियों में से एक है। इसलिए उसके संचालन क्षेत्र के आसपास सुरक्षा स्थिति बिगड़ना वैश्विक बाजार के लिए संवेदनशील मुद्दा है।
Reuters के अनुसार, Dhahran में Aramco के मुख्यालय से कर्मचारियों को हटाने का कदम इस बात का संकेत है कि सुरक्षा जोखिम को गंभीरता से लिया जा रहा है।
हालांकि, इसका यह अर्थ नहीं है कि Saudi Arabia का तेल उत्पादन बंद हो गया है। फिलहाल बाजार मुख्य रूप से भविष्य की सप्लाई सुरक्षा को लेकर चिंतित है।
Libya से भी आया सप्लाई का झटका
तेल बाजार पर दबाव केवल Saudi Arabia से नहीं आया। Reuters ने बताया कि Libya में एक oil pipeline valve बंद होने के कारण Hamada और Tahara oilfields से उत्पादन प्रभावित हुआ है।
यानी एक तरफ Middle East में geopolitical risk बढ़ रहा है, वहीं दूसरी तरफ कुछ अन्य क्षेत्रों से भी supply-side disruptions की खबरें बाजार को अतिरिक्त चिंता दे रही हैं।
अगर ऐसे व्यवधान एक साथ बढ़ते हैं, तो traders को वैश्विक crude balance और ज्यादा तंग होने की आशंका हो सकती है।
क्या Brent $120 तक जा सकता है?
फिलहाल बाजार में सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर Saudi Arabia और Yemen के बीच तनाव और बढ़ा तो Brent कितना ऊपर जा सकता है।
कुछ विश्लेषकों ने पहले ही $115 और उससे ऊपर के स्तर की संभावना जताई थी, जबकि व्यापक Middle East conflict बढ़ने पर इससे भी ऊंचे स्तर की आशंका सामने आई है।
लेकिन तेल की कीमत का अगला कदम पूरी तरह इस बात पर निर्भर करेगा कि हमले कितने व्यापक होते हैं, Saudi oil infrastructure कितना सुरक्षित रहता है, shipping routes कितने प्रभावित होते हैं और diplomatic de-escalation की कोई संभावना बनती है या नहीं।
इसलिए अभी $120 या उससे ऊपर की कीमत को निश्चित भविष्यवाणी के तौर पर देखना सही नहीं होगा।
दुनिया की नजर अब अगले घटनाक्रम पर
Oil traders फिलहाल Saudi Arabia में ऊर्जा ढांचे की सुरक्षा, Red Sea और Bab el-Mandeb में shipping activity तथा Middle East में सैन्य तनाव पर नजर रख रहे हैं।
अगर हमलों की intensity कम होती है और crude exports सामान्य बने रहते हैं, तो risk premium धीरे-धीरे कम हो सकता है। लेकिन अगर Saudi oil facilities, export terminals या महत्वपूर्ण shipping routes पर नए हमले होते हैं, तो बाजार में फिर तेज उछाल आ सकता है।
इसी वजह से आने वाले कुछ दिन oil prices के लिए बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।
भारत के लिए तीन बड़े जोखिम
भारत के नजरिए से मौजूदा स्थिति में तीन चीजें सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण हैं—
पहला, Brent crude कितने समय तक $110 से ऊपर रहता है।
दूसरा, रुपये की डॉलर के मुकाबले चाल कैसी रहती है।
तीसरा, Saudi Arabia और दूसरे Middle Eastern देशों से भारत की oil supply और shipping कितनी सामान्य रहती है।
अगर crude महंगा और रुपया कमजोर दोनों होते हैं, तो भारत की import cost, inflation और trade balance पर दबाव बढ़ सकता है।
फिलहाल बाजार का संकेत
अभी तक तेल बाजार में घबराहट के बावजूद global oil supply पूरी तरह बाधित नहीं हुई है। Brent 22 अक्टूबर को करीब $113 के आसपास पहुंचने के बाद 23 अक्टूबर की शुरुआत में मामूली नीचे आया। लेकिन यह स्तर पिछले कुछ महीनों की तुलना में काफी ऊंचा है और बाजार लगातार Middle East developments को price-in कर रहा है।
इसलिए फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यह नहीं है कि तेल एक दिन में कितना महंगा हुआ, बल्कि यह है कि क्या Saudi Arabia और आसपास का संकट इतना लंबा चलेगा कि global oil supply chain पर वास्तविक और लंबे समय का असर पड़े।