निठारी कांड में सभी 13 मामलों में बरी हो चुके सुरेंद्र कोली हरिद्वार में मृत पाए गए। वह पिछले चार दिन से कुम्भ मेला क्षेत्र में चाय की दुकान चला रहे थे। पुलिस मौत का सही कारण पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही बता पाएगी।
सिटी कोतवाली थानाध्यक्ष कुंदन सिंह राणा के अनुसार कोली अपनी असली पहचान छिपाकर सदा राम के नाम से काम कर रहे थे। पुलिस अधिकारी नेगी ने कहा कि आशंका है कि मौत के बाद फंदे की रस्सी वजन से टूट गई, जिससे शव फर्श पर गिर गया। हालांकि उन्होंने साफ किया कि इस बारे में पुख्ता बयान पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही दिया जा सकेगा।
निठारी कांड और कोली की कानूनी लड़ाई
निठारी कांड 2006 में उस समय सामने आया था जब नोएडा के सेक्टर 31 स्थित कारोबारी पंढेर के बंगले की नालियों और पिछवाड़े से नरकंकाल, खोपड़ियां और हड्डियां बरामद हुई थीं। इस घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया था और कई बच्चों तथा महिलाओं के लापता होने व हत्या की आशंका जताई गई थी।
कोली और पंढेर को 29 दिसंबर 2006 को गिरफ्तार किया गया था और उन पर बलात्कार, हत्या, अपहरण, तस्करी और सबूत मिटाने के आरोप लगे थे। जांच 11 जनवरी 2007 को सीबीआई को सौंपी गई। पंढेर को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अक्टूबर 2023 में बरी कर दिया था।
कोली के खिलाफ अधिकांश मामला उनके कथित इकबालिया बयान पर आधारित था, जो गिरफ्तारी के तीन महीने बाद 1 मार्च 2007 को दिल्ली के एक मजिस्ट्रेट के सामने सीआरपीसी की धारा 164 के तहत दर्ज किया गया था। सालों में कोली 12 मामलों में बरी हो चुके थे। 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने आखिरी मामले में भी उन्हें बरी कर दिया, जो निठारी की एक 15 वर्षीय लड़की से जुड़े बलात्कार और हत्या के आरोप से संबंधित था।
तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई और न्यायमूर्ति सूर्यकांत व विक्रम नाथ की पीठ ने कहा था कि निठारी के अपराध जघन्य थे और पीड़ित परिवारों का दुख असीमित है। पीठ ने कहा, "यह गहरे खेद की बात है कि लंबी जांच के बावजूद असली अपराधी की पहचान कानूनी मानकों के अनुरूप स्थापित नहीं हो पाई।" कोर्ट ने कहा था कि संदेह चाहे कितना भी गंभीर हो, वह ठोस सबूत की जगह नहीं ले सकता।
रिहाई के बाद चाय की दुकान से नई शुरुआत
कोली करीब दो दशक जेल में बिताने के बाद 12 नवंबर 2025 को रिहा हुए थे। हरिद्वार में जिस अनिल शर्मा ने उन्हें चाय की दुकान किराए पर दी थी, उनके अनुसार कोली ने खुद को सदा राम बताते हुए कहा था कि वह पहले रोशनाबाद में काम करता था। शर्मा ने बताया कि कोली परिवार के लिए बेहतर आजीविका के इरादे से हरिद्वार शहर आना चाहते थे। दुकान का किराया 7,000 रुपये मासिक और 14,000 रुपये अग्रिम तय हुआ था।
राणा ने बताया कि इससे पहले कोली रोशनाबाद में करीब 15 दिन तक सुरक्षा गार्ड का काम कर चुके थे और वहां एक खाने की रेहड़ी भी चलाते थे। पुलिस ने अल्मोड़ा में उनके परिवार को सूचना दे दी है और मौत की परिस्थितियों की जांच शुरू कर दी गई है।
परिवार से दूरी, पीड़ित पक्ष का सवाल
अल्मोड़ा के मंगरूखाल गांव में कोली का पैतृक घर वर्षों से वीरान पड़ा था। ग्रामीणों के अनुसार 2006 में नाम सामने आने के बाद भाइयों ने उनसे दूरी बना ली थी। मां कुंती देवी का 2022-23 में निधन हो गया था, जबकि पत्नी शांति देवी 2010 में दोनों बच्चों के साथ गांव छोड़कर गई थीं और कभी नहीं लौटीं।
नोएडा सेक्टर 31 के डी-5 बंगले से बरामद एक 10 वर्षीय पीड़िता के पिता ने मौत पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा, "जो व्यक्ति करीब दो दशक जेल में रहा हो, वह आत्महत्या नहीं कर सकता। इसमें कुछ गड़बड़ है, हमें हत्या की आशंका है।" उन्होंने मामले की गहन जांच की मांग की और कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद उन्होंने न्याय की उम्मीद छोड़ दी थी।
With inputs from Hindustan Times