देर रात धरती कांपी, कई इलाकों में दहशत
चीन के तिब्बत क्षेत्र में गुरुवार रात आए 7.0 तीव्रता के शक्तिशाली भूकंप ने बड़े इलाके को हिला दिया। भूकंप करीब रात 10:33 बजे स्थानीय समय पर आया। इसका केंद्र उत्तरी तिब्बत के नागकू (Nagqu) शहर के बाकेन काउंटी के एक दुर्गम और ऊंचाई वाले इलाके में बताया गया है। अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) के अनुसार भूकंप की गहराई करीब 18 किलोमीटर थी, जबकि चीन के भूकंप नेटवर्क केंद्र ने इसकी गहराई लगभग 10 किलोमीटर बताई।
स्थानीय अधिकारियों के मुताबिक अब तक कम से कम 16 लोगों की मौत हो चुकी है। घायलों की संख्या अलग-अलग अपडेट में बढ़ती रही है और ताजा रिपोर्टों में यह 65 से 76 तक पहुंच चुकी है। इसका मतलब है कि राहत एजेंसियों के प्रभावित इलाकों तक पहुंचने के साथ नुकसान का वास्तविक आकलन अभी भी जारी है।
300 से ज्यादा मकानों को नुकसान
भूकंप का सबसे बड़ा असर स्थानीय गांवों और आवासीय इलाकों में दिखाई दिया है। अधिकारियों के अनुसार 330 से ज्यादा मकान ढह गए या क्षतिग्रस्त हुए, जबकि शुरुआती रिपोर्टों में कम से कम 339 आवासीय इमारतों के प्रभावित होने की बात सामने आई थी। कुछ पशु शेड भी क्षतिग्रस्त हुए हैं।
भूकंप के दौरान कई लोग अपने घरों से बाहर निकल आए। स्थानीय मीडिया द्वारा जारी वीडियो में लोगों को सड़कों, खुले स्थानों और वाहनों के आसपास शरण लेते देखा गया। कई जगहों पर घरों की दीवारों में दरारें आईं और सामान गिरने की घटनाएं सामने आईं।
12 हजार से ज्यादा लोगों को सुरक्षित निकाला गया
स्थिति को देखते हुए बड़े पैमाने पर रेस्क्यू और राहत अभियान शुरू किया गया है। ताजा सरकारी रिपोर्टों के अनुसार 12,489 लोगों को प्रभावित क्षेत्र से निकालकर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। राहत के लिए टेंट, अस्थायी आवास, फोल्डिंग बेड, कंबल और अन्य जरूरी सामान भेजे गए हैं।
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने प्रभावित क्षेत्र में व्यापक खोज एवं बचाव अभियान चलाने, घायलों को तत्काल चिकित्सा उपलब्ध कराने और जनहानि को कम करने के लिए हरसंभव प्रयास करने के निर्देश दिए हैं। अधिकारियों को भूकंपीय गतिविधि और मौसम की निगरानी बढ़ाने को भी कहा गया है।
ऊंचाई और ठंड ने बढ़ाई चुनौती
भूकंप का केंद्र बेहद ऊंचाई वाले इलाके में है। रिपोर्टों के मुताबिक इसके केंद्र के आसपास की औसत ऊंचाई 4,800 मीटर से अधिक है। ऐसे इलाके में राहत और बचाव दलों के लिए पहुंचना सामान्य मैदानी क्षेत्रों की तुलना में काफी कठिन होता है।
स्थिति इसलिए भी चुनौतीपूर्ण है क्योंकि अगले कुछ दिनों में तापमान माइनस 9 डिग्री सेल्सियस तक गिरने का अनुमान है और कुछ इलाकों में बर्फबारी की संभावना भी जताई गई है। ऐसे में जिन लोगों के घर क्षतिग्रस्त हुए हैं, उनके लिए अस्थायी आश्रय और गर्म कपड़ों की व्यवस्था बेहद महत्वपूर्ण हो गई है।
बिजली और संचार व्यवस्था भी प्रभावित
भूकंप के बाद प्रभावित क्षेत्रों में बिजली और संचार सेवाओं में व्यवधान की जानकारी सामने आई। राहत एजेंसियों को पहले प्रभावित गांवों का आकलन करने और फिर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने का काम करना पड़ा। अधिकारियों ने प्रभावित परिवारों के लिए हजारों टेंट और अस्थायी आवास उपलब्ध कराए हैं।
क्विंगहाई-तिब्बत रेलवे के प्रभावित हिस्से में यात्री ट्रेन सेवाएं भी सुरक्षा जांच के बाद कम गति के साथ फिर शुरू की गईं। बिजली विभाग ने भी प्रभावित इलाके में हजारों घरों की बिजली बहाल किए जाने की जानकारी दी है।
आफ्टरशॉक्स का भी खतरा
मुख्य भूकंप के बाद आसपास के क्षेत्र में कई छोटे झटके भी दर्ज किए गए। रिपोर्टों के अनुसार कुछ आफ्टरशॉक्स की तीव्रता 3 से 4 के बीच रही। ऐसे में राहत दलों को क्षतिग्रस्त इमारतों के आसपास काम करते समय अतिरिक्त सावधानी बरतनी पड़ रही है।
विशेषज्ञों के लिए भी आने वाले घंटों में आफ्टरशॉक्स और नए नुकसान पर नजर रखना जरूरी होगा, क्योंकि पहले से कमजोर हो चुकी इमारतें दोबारा झटकों में गिर सकती हैं।
तिब्बती पठार में क्यों आते हैं शक्तिशाली भूकंप?
तिब्बत और आसपास का हिमालयी क्षेत्र दुनिया के सबसे अधिक भूकंपीय रूप से सक्रिय क्षेत्रों में शामिल है। यहां भारतीय और यूरेशियाई टेक्टोनिक प्लेटों की टक्कर लगातार भूगर्भीय तनाव पैदा करती है। यही वजह है कि इस क्षेत्र में समय-समय पर शक्तिशाली भूकंप आते रहे हैं।
जनवरी 2025 में भी तिब्बत के तिंगरी काउंटी में आए बड़े भूकंप में कम से कम 126 लोगों की मौत हुई थी। इससे पहले 2010 में पड़ोसी किंघाई प्रांत के युशू क्षेत्र में 7.1 तीव्रता के भूकंप ने बड़े पैमाने पर तबाही मचाई थी और हजारों लोगों की जान गई थी।
अब आगे क्या?
फिलहाल सबसे बड़ी प्राथमिकता मलबे में फंसे लोगों की तलाश, घायलों का इलाज और प्रभावित परिवारों को सुरक्षित आश्रय देना है। राहत एजेंसियां नुकसान का विस्तृत आकलन कर रही हैं और प्रभावित गांवों तक जरूरी सामान पहुंचाया जा रहा है।
मृतकों और घायलों की संख्या में अभी और बदलाव की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता, क्योंकि दुर्गम पहाड़ी इलाकों में सभी प्रभावित स्थानों तक पहुंचकर जांच पूरी होने में समय लग सकता है। अधिकारियों ने भी राहत एवं बचाव अभियान जारी रहने की बात कही है।