इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गांजा तस्करी के एक आरोपी की हिरासत रद्द कर दी है। कोर्ट ने पाया कि उसे हिरासत लेने वाले प्राधिकरण के सामने अभ्यावेदन देने के अधिकार की सही जानकारी नहीं दी गई थी।
न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन और न्यायमूर्ति अचल सचदेव की खंडपीठ ने यह आदेश सचिन पटेल की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर सुनाया। सचिन पटेल मिर्जापुर के रहने वाले हैं।
याची के खिलाफ 261.8 किलोग्राम गांजा बरामद होने के आरोप में प्राथमिकी दर्ज हुई थी। मुख्य आपराधिक मामले में उसे 16 जुलाई 2026 को जमानत मिल गई थी।
इसके बावजूद 23 मई 2026 को उसके खिलाफ पीआईटीएनडीपीएस एक्ट के तहत हिरासत में लेने का आदेश पारित किया गया। याची ने इस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।
कोर्ट ने बताई प्रक्रियात्मक खामी
कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के अल्फिया ए बनाम केरल राज्य (2026) मामले का हवाला दिया। खंडपीठ ने कहा कि निरुद्ध व्यक्ति को स्पष्ट और लिखित रूप में यह बताना कानूनी रूप से जरूरी है कि वह हिरासत का आदेश जारी करने वाले प्राधिकरण के सामने भी अभ्यावेदन रख सकता है।
इस मामले में हिरासत आदेश में याची को सिर्फ केंद्र सरकार, सलाहकारी बोर्ड और राज्य सरकार के सामने अभ्यावेदन देने की बात कही गई थी। निरोधक प्राधिकरण को सूचित करने के उसके अधिकार का कहीं उल्लेख नहीं था।
तुरंत रिहाई का आदेश
कोर्ट ने इस प्रक्रियात्मक खामी को आधार बनाकर हिरासत का पूरा आदेश निरस्त कर दिया। खंडपीठ ने निर्देश दिया कि यदि याचिकाकर्ता किसी अन्य मामले में वांछित नहीं है तो उसे तुरंत रिहा किया जाए।