मिर्जापुर के हलिया ब्लॉक स्थित लहुरियादह गांव में उच्च प्राथमिक विद्यालय का निर्माण कार्य वन विभाग की आपत्ति के बाद रुक गया है। पूर्व जिलाधिकारी दिव्या मित्तल के एक वायरल वीडियो के बाद तेज हुआ यह निर्माण अब भूमि विवाद में उलझ गया है।
29 सितंबर को दिव्या मित्तल ने एक वीडियो जारी कर कहा था, "जब मैं जिला अधिकारी थी स्कूल निर्माण के लिए प्रस्ताव बनाकर भेजा था लेकिन तीन साल होने के बाद भी निर्माण शुरू नहीं हुआ।" इस वीडियो के वायरल होते ही जिले का सियासी पारा चढ़ गया।
प्रशासन ने तेजी से शुरू किया काम
वीडियो सामने आने के बाद जिला प्रशासन हरकत में आया। राजस्व विभाग ने लहुरियादह में विद्यालय निर्माण के लिए आराजी नंबर 1116 ग, रकबा 0.169 हेक्टेयर भूमि तुरंत आवंटित कर दी।
जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी अनिल कुमार वर्मा के अनुसार, प्राथमिक विद्यालय लहुरियादह के उच्चीकरण का प्रस्ताव वर्ष 2024-25 में भेजा गया था। वर्ष 2025-26 में राज्य परियोजना निदेशक ने इसे मंजूरी देते हुए ₹25.58 लाख का बजट जारी किया। यह राशि विद्यालय प्रबंध समिति के खाते में पहले ही पहुंचाई जा चुकी है।
वन विभाग ने रोका निर्माण कार्य
निर्माण शुरू होने के पांचवें दिन, चार अक्टूबर को वन विभाग ने इसे वन भूमि बताते हुए काम रुकवा दिया। गांव के निवासी हरी लाल ने बताया, "विद्यालय का निर्माण कराया जा रहा था। वन विभाग की टीम ने आकर काम रुकवा दिया। काम कर रहे मिस्त्रियों से कहा कि यह वन विभाग की जमीन है, यहां काम नहीं होगा स्कूल का।"
रेंजर ड्रमंडगंज रविशंकर शर्मा ने बताया कि निर्माण वन भूमि पर हो रहा था, इसलिए डीएफओ राकेश कुमार को सूचित कर काम रुकवाया गया। डीएफओ राकेश कुमार ने कहा, "यह जमीन वन विभाग की है, जबकि राजस्व विभाग इसे अपना बता रहा है। इसको लेकर एक संयुक्त जांच टीम बनाई जा रही है, जो दो दिन में रिपोर्ट देगी।"
राजस्व और वन विभाग में टकराव
दूसरी तरफ एसडीएम लालगंज अजीत कुमार ने दावे को खारिज करते हुए कहा कि आवंटित भूमि राजस्व विभाग की है। उन्होंने कहा कि अगर वन विभाग इसे अपनी जमीन बता रहा है, तो वह इसका रिकार्ड प्रस्तुत करे।
भूमि विवाद उलझने के बाद जिला प्रशासन की नींद उड़ गई है। मंगलवार दोपहर राजस्व विभाग और वन विभाग की टीमें मौके पर पहुंचीं, जिससे प्रशासनिक पारा भी चढ़ गया।
दो दिन में आएगी जांच रिपोर्ट
मामले की गंभीरता देखते हुए जिलाधिकारी ने स्वयं संज्ञान लिया है। विवाद सुलझाने के लिए बनाई गई संयुक्त जांच टीम दो दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपेगी। रिपोर्ट आने तक गांव के बच्चों की पढ़ाई का मामला अधर में लटका रहेगा।