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दिव्या मित्तल के सवाल पर जागा प्रशासन, तीन साल बाद स्कूल में बड़ा बदलाव

तीन साल से रुके स्कूल भवन की नींव मिर्जापुर के लहुरियादह गांव में आखिरकार खुद गई

मिर्जापुर के लहुरियादह गांव में स्कूल भवन की नींव खुदाई का कार्य
प्रतीकात्मक तस्वीर, AI से बनाई गई। यह वास्तविक घटना का चित्रण नहीं है।

मिर्जापुर के लहुरियादह गांव में उच्च प्राथमिक विद्यालय का निर्माण कार्य बुधवार को शुरू हो गया। पूर्व आईएएस दिव्या मित्तल के एक्स पर वीडियो जारी करने के एक दिन बाद ही जिला प्रशासन हरकत में आ गया।

दिव्या मित्तल ने मंगलवार को वीडियो में सवाल उठाया था कि गांव में स्वीकृत स्कूल तीन साल बाद भी नहीं बना। अन्य रिपोर्टों के अनुसार यह वीडियो उन्होंने अपने चुनाव लड़ने के ऐलान के दौरान जारी किया था।

बुधवार से शुरू हुआ निर्माण कार्य

बेसिक शिक्षा अधिकारी ने बताया कि बुधवार को बीईओ हलिया प्रकाश चंद्र यादव और गांव के कौशलेंद्र कुमार गुप्ता मौके पर पहुंचे। उनकी देखरेख में विद्यालय के लिए आवंटित भूमि की नापी कराई गई।

इसके बाद नींव की खुदाई शुरू करा दी गई। एक अन्य रिपोर्ट के अनुसार जेसीबी से जमीन समतल करने का काम भी साथ में चल रहा था।

प्राथमिक विद्यालय लहुरियादह के प्रधानाध्यापक गंगा शंकर ओझा की देखरेख में भवन निर्माण कराया जाएगा। बीईओ प्रकाश चंद्र यादव ने बताया कि शासन से धनराशि आवंटित हो चुकी है और करीब 25 लाख रुपये की लागत से भवन बनेगा।

बीएसए अनिल कुमार वर्मा ने बताया कि राज्य परियोजना निदेशक ने वर्ष 2025-26 में 25.58 लाख रुपये की धनराशि आवंटित की थी। यह राशि विद्यालय की प्रबंध समिति के खाते में भेज दी गई थी, जिसके बाद समिति ने मंगलवार से ही निर्माण कार्य शुरू करा दिया।

2023 में महिला ने की थी मांग, 2024 में मिली मंजूरी

वर्ष 2023 में लहुरियादह गांव के निरीक्षण के दौरान गांव की महिला देवकली ने तत्कालीन डीएम दिव्या मित्तल से बच्चों के लिए उच्च प्राथमिक विद्यालय खोलने की मांग की थी। मित्तल ने उसी समय प्रस्ताव तैयार कराकर शासन को भेज दिया था।

शासन ने वर्ष 2024 में विद्यालय को मंजूरी दे दी। अगस्त 2025 में धनराशि भी जारी हो गई, लेकिन इसके बावजूद निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सका था।

दिव्या मित्तल ने उठाई गायब स्कूलों की बात

दिव्या मित्तल ने वीडियो में कहा, "मुझे गायब स्कूलों का हिसाब चाहिए।" उन्होंने बताया कि महिला ने उस दिन पेंशन या मकान नहीं, बल्कि आगे की पढ़ाई के लिए गांव में ही स्कूल मांगा था।

उन्होंने कहा कि उस वक्त महिला के घर में पानी तक नहीं था, फिर भी वह स्कूल मांग रही थी। मित्तल ने आगे कहा कि पैसा, नियम और स्वीकृति सब था, बस इरादा नहीं था।

ग्रामीणों में खुशी

निर्माण शुरू होने पर गांव की देवकली, कृष्णा वर्मा, गीता देवी, हीरा यादव, चौरसिया देवी, लालबहादुर यादव और रमेश यादव ने खुशी जताई। ग्रामीणों ने कहा कि अब बच्चों को आठवीं तक की पढ़ाई के लिए गांव से बाहर नहीं जाना पड़ेगा।

ग्राम प्रधान कौशलेंद्र गुप्ता ने भी इस पर संतोष जताया है।