विदेश में बैठे गैंग नेटवर्क पर बड़ा एक्शन
भारत में हत्या, रंगदारी, अपहरण और संगठित अपराध से जुड़े कई मामलों में वांछित गैंगस्टर हिमांशु भाऊ और उसके सहयोगी नीरज फरीदपुरिया को अमेरिका में पकड़ लिया गया है। ताजा रिपोर्टों के मुताबिक दोनों को Las Vegas, Nevada इलाके में अमेरिकी कानून प्रवर्तन एजेंसियों ने हिरासत में लिया।
यह कार्रवाई भारतीय एजेंसियों से मिली खुफिया जानकारी के बाद हुई। रिपोर्टों के अनुसार Haryana STF और केंद्रीय एजेंसियां लंबे समय से अमेरिकी अधिकारियों के संपर्क में थीं और हिमांशु भाऊ की लोकेशन का पता लगाने के लिए तकनीकी निगरानी तथा अन्य स्रोतों से जानकारी जुटाई गई थी।
भारतीय एजेंसियों के लिए यह कार्रवाई इसलिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि आरोप है कि हिमांशु भाऊ विदेश में रहकर भी Delhi-NCR, Haryana और Punjab में अपने आपराधिक नेटवर्क को संचालित कर रहा था।
हिमांशु भाऊ पर दर्ज हैं कई गंभीर मामले
हिमांशु भाऊ हरियाणा के रोहतक क्षेत्र का रहने वाला बताया जाता है और भारतीय पुलिस की मोस्ट-वॉन्टेड सूची में लंबे समय से शामिल रहा है।
उसके खिलाफ हत्या, हत्या के प्रयास, रंगदारी, अपहरण और संगठित अपराध से जुड़े कई मामले दर्ज हैं। Indian Express की रिपोर्ट के मुताबिक उसके खिलाफ 30 से अधिक आपराधिक मामले बताए गए हैं, जिनमें कम से कम 16 मामले हत्या या हत्या के प्रयास से संबंधित हैं।
उसके खिलाफ Interpol Red Notice भी जारी किया गया था। रिपोर्टों के मुताबिक अगस्त 2023 में इंटरपोल ने यह नोटिस जारी किया, जिसके बाद भारतीय एजेंसियां उसकी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तलाश कर रही थीं।
हरियाणा पुलिस ने उसकी गिरफ्तारी में मदद के लिए ₹2.5 लाख और दिल्ली पुलिस ने ₹1 लाख का इनाम भी घोषित किया था।
विदेश से गैंग चलाने का आरोप
जांच एजेंसियों के अनुसार हिमांशु भाऊ पर आरोप है कि भारत से बाहर रहने के बावजूद वह अपने नेटवर्क के जरिए रंगदारी और हिंसक वारदातों को अंजाम दिलाता था।
Indian Express के अनुसार जांच एजेंसियों का आरोप है कि गिरोह धमकी भरे फोन करता था और पैसे नहीं देने पर भारत में गोलीबारी करवाने जैसी गतिविधियों में शामिल था। एजेंसियों का यह भी आरोप है कि सोशल मीडिया के जरिए युवाओं को गिरोह से जोड़ने की कोशिश की जाती थी।
रिपोर्टों में हिमांशु भाऊ के Portugal से आपराधिक नेटवर्क संचालित करने के आरोप भी सामने आए हैं। हालांकि उसके नेटवर्क से जुड़े अलग-अलग मामलों में आरोपों की न्यायिक स्थिति अलग-अलग है और अंतिम दोषसिद्धि अदालतों द्वारा तय की जानी है।
नीरज फरीदपुरिया भी साथ पकड़ा गया
इस अमेरिकी कार्रवाई में नीरज फरीदपुरिया के पकड़े जाने की खबर ने मामले को और महत्वपूर्ण बना दिया है।
नीरज के खिलाफ Delhi, Haryana और Punjab में हत्या, रंगदारी और अन्य आपराधिक गतिविधियों से जुड़े 25 से ज्यादा मामले दर्ज होने की रिपोर्ट है। वह हिमांशु भाऊ के साथ कथित तौर पर काम कर रहा था।
रिपोर्टों के मुताबिक नीरज का नाम 2019 में Faridabad में कांग्रेस नेता Vikas Chaudhary की हत्या के मामले में भी सामने आया था। इसके अलावा उसका नाम कई गोलीबारी और हत्या की जांच में सामने आया है। इन मामलों में उसकी भूमिका को लेकर कानूनी प्रक्रिया अलग-अलग स्तरों पर रही है।
नीरज को वर्ष 2012 में एक हत्या के मामले में गिरफ्तार किया गया था और 2015 में उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी। बाद में 2019 में Punjab and Haryana High Court से उसे जमानत मिली और इसके बाद उसके विदेश चले जाने की जानकारी रिपोर्टों में सामने आई है।
अमेरिका में गिरफ्तारी के बाद अब भारत लाने की तैयारी
हिमांशु भाऊ और नीरज फरीदपुरिया के पकड़े जाने के बाद अब भारतीय एजेंसियों की अगली बड़ी चुनौती दोनों को भारत वापस लाना होगी।
Haryana STF के अमेरिकी अधिकारियों और केंद्रीय एजेंसियों के संपर्क में होने की जानकारी सामने आई है। रिपोर्टों के अनुसार भारत दोनों के खिलाफ चल रहे मामलों को देखते हुए उनकी deportation/custody से संबंधित प्रक्रिया आगे बढ़ा रहा है।
यह प्रक्रिया तत्काल नहीं भी हो सकती, क्योंकि अमेरिका में हिरासत के बाद वहां की कानूनी और immigration प्रक्रिया पूरी करनी होगी। इसके बाद भारत में उनके खिलाफ दर्ज मामलों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
लॉरेंस बिश्नोई गैंग से दुश्मनी का भी रहा है कनेक्शन
हिमांशु भाऊ का नाम उत्तर भारत के दूसरे बड़े गैंग नेटवर्कों के साथ कथित टकराव के कारण भी चर्चा में रहा है।
रिपोर्टों में उसे Lawrence Bishnoi network का प्रतिद्वंद्वी बताया गया है। वहीं नीरज फरीदपुरिया को Bambiha gang से जुड़े नेटवर्क के साथ जोड़ा गया है, जिसे बिश्नोई नेटवर्क का विरोधी माना जाता है।
इसी गैंग प्रतिद्वंद्विता के बीच Delhi-NCR, Haryana और Punjab में कई गोलीबारी, हत्या और रंगदारी के मामलों की जांच में इन नेटवर्कों के नाम सामने आते रहे हैं।
सोशल मीडिया और फायरिंग मामलों में भी नाम
हिमांशु भाऊ से जुड़े नेटवर्क का नाम कई हाई-प्रोफाइल फायरिंग मामलों में भी सामने आया है।
पुलिस ने कुछ मामलों में सोशल मीडिया पर सामने आए जिम्मेदारी लेने वाले पोस्ट की भी जांच की है। हालांकि किसी सोशल मीडिया पोस्ट के आधार पर किसी व्यक्ति की आपराधिक जिम्मेदारी स्वतः साबित नहीं होती; पुलिस को मामले में अन्य सबूतों के साथ इसकी पुष्टि करनी होती है।
नीरज फरीदपुरिया का नाम Elvish Yadav के घर के बाहर हुई फायरिंग की जांच में भी सामने आया था।
भारतीय एजेंसियों के लिए क्यों अहम है यह गिरफ्तारी?
विदेश में बैठकर भारत में कथित आपराधिक नेटवर्क चलाने वाले आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई हमेशा चुनौतीपूर्ण रही है। ऐसे मामलों में स्थानीय कानून, immigration proceedings और प्रत्यर्पण या deportation की प्रक्रिया महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
हिमांशु भाऊ की गिरफ्तारी से भारतीय एजेंसियों को उसके कथित नेटवर्क, आर्थिक लेन-देन, सहयोगियों और भारत में दर्ज मामलों की जांच को आगे बढ़ाने का अवसर मिल सकता है।
साथ ही नीरज फरीदपुरिया के पकड़े जाने से दो अलग-अलग गैंग नेटवर्कों के बीच कथित संपर्क और आपराधिक गतिविधियों की जांच में भी नए सुराग मिलने की संभावना है।
अब भारत की नजर अगली कानूनी प्रक्रिया पर
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि हिमांशु भाऊ और नीरज फरीदपुरिया को अमेरिका से भारत कब और किस कानूनी प्रक्रिया के तहत लाया जाएगा।
भारतीय एजेंसियां अमेरिकी अधिकारियों के साथ संपर्क में हैं और दोनों के खिलाफ भारत में दर्ज मामलों की जानकारी के आधार पर आगे की प्रक्रिया की तैयारी कर रही हैं।
यह घटनाक्रम भारत की उन कोशिशों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जिनका उद्देश्य विदेश में छिपे वांछित गैंगस्टरों और उनके भारत स्थित नेटवर्क पर कार्रवाई करना है।
हालांकि, दोनों के खिलाफ लगे आरोपों का अंतिम फैसला संबंधित अदालतों में होने वाली न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगा।