महाराष्ट्र की राजनीति में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) को लेकर एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। पार्टी के छह वरिष्ठ नेताओं ने 2 नवंबर 2026 को नई दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की। इस बैठक में महाराष्ट्र की उपमुख्यमंत्री और NCP अध्यक्ष सुनेत्रा पवार तथा उनके बेटे और राज्यसभा सांसद पार्थ पवार शामिल नहीं थे। उनकी गैरमौजूदगी ने पार्टी के भीतर नेतृत्व और फैसले लेने की प्रक्रिया को लेकर चल रही चर्चाओं को और हवा दे दी।
बैठक के बाद राजनीतिक गलियारों में दो मुद्दों पर खास चर्चा है—महाराष्ट्र सरकार में वित्त मंत्रालय का प्रभार NCP को वापस दिलाना और NCP के दोनों गुटों के संभावित पुनर्मिलन की संभावना। हालांकि, पार्टी नेतृत्व ने विलय की अटकलों को खारिज किया है।
अमित शाह से मिलने वाले छह नेता कौन थे?
दिल्ली में अमित शाह से मुलाकात करने वाले नेताओं में शामिल थे:
- प्रफुल्ल पटेल – NCP के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष
- सुनील तटकरे – महाराष्ट्र NCP अध्यक्ष
- छगन भुजबल – वरिष्ठ मंत्री
- हसन मुश्रीफ – वरिष्ठ मंत्री
- दिलीप वलसे पाटिल – वरिष्ठ नेता
- धनंजय मुंडे – वरिष्ठ नेता
ये नेता 2023 में अजित पवार के नेतृत्व में NCP के विभाजन के समय उनके साथ खड़े रहे थे। बैठक में सुनेत्रा और पार्थ पवार की अनुपस्थिति इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि पार्टी के भीतर नेतृत्व को लेकर मतभेद की खबरें पहले से सामने आ रही थीं।
वित्त मंत्रालय वापस लेने की मांग भी चर्चा में
अजित पवार के निधन के बाद महाराष्ट्र सरकार में वित्त मंत्रालय का प्रभार मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के पास है। NCP के वरिष्ठ नेताओं की ओर से यह मांग उठाए जाने की खबर है कि वित्त मंत्रालय दोबारा पार्टी को सौंपा जाए।
इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, नेताओं ने अमित शाह के सामने यह मुद्दा उठाया। हालांकि, बैठक के एजेंडे को लेकर अलग-अलग रिपोर्टों में अलग-अलग विवरण सामने आए हैं। कुछ रिपोर्टों में इसे वित्त मंत्रालय के साथ-साथ पार्टी के संगठनात्मक कामकाज और नेतृत्व से जुड़ी नाराजगी का मामला बताया गया है।
NCP के भीतर नेतृत्व को लेकर असंतोष की खबरें
हिंदुस्तान टाइम्स और इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्टों के मुताबिक, कुछ वरिष्ठ नेताओं ने पार्टी के मौजूदा कामकाज और नेतृत्व शैली को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर की। उनकी शिकायतों में सामूहिक नेतृत्व की कमी और अहम फैसलों में वरिष्ठ नेताओं की भूमिका सीमित होने की बात शामिल बताई गई।
बैठक में सुनेत्रा और पार्थ पवार की गैरमौजूदगी को इसी आंतरिक खींचतान से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि, इन नेताओं की नाराजगी और बैठक के वास्तविक एजेंडे के बारे में सामने आई जानकारियां मीडिया रिपोर्टों और सूत्रों पर आधारित हैं।
शरद पवार गुट के साथ विलय पर क्या है स्थिति?
NCP के दोनों गुटों—अजित पवार के नेतृत्व वाले गुट और शरद पवार के नेतृत्व वाले NCP (SP)—के फिर एक होने की चर्चा भी तेज हुई है। कुछ रिपोर्टों में दावा किया गया कि अमित शाह के साथ बैठक में दोनों गुटों के संभावित विलय और NDA में उनकी भूमिका पर बातचीत हुई।
लेकिन इस मुद्दे पर तस्वीर साफ नहीं है। NCP के प्रदेश अध्यक्ष सुनील तटकरे ने पार्टी की कोर कमेटी की बैठक के बाद विलय की संभावना को खारिज किया। NDTV की रिपोर्ट के अनुसार, शरद पवार गुट की ओर से भी विलय को लेकर सहमति के संकेत नहीं मिले। इसलिए फिलहाल इसे तय राजनीतिक फैसला नहीं, बल्कि जारी अटकलों के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
कोर कमेटी की बैठक से क्या संकेत मिले?
अमित शाह से मुलाकात के बाद मुंबई में NCP की कोर कमेटी की बैठक हुई। इसमें पार्टी के भीतर एकजुटता बनाए रखने और सुनेत्रा पवार के नेतृत्व में काम करने की बात सामने आई। तटकरे ने कहा कि पार्टी सामूहिक नेतृत्व में विश्वास करती है और संगठन को मजबूत करने की जरूरत है।
इस घटनाक्रम से साफ है कि अजित पवार के निधन के बाद NCP के सामने नेतृत्व, संगठन और सत्ता में अपनी भूमिका को लेकर नई चुनौतियां हैं। आने वाले दिनों में पार्टी के फैसले यह तय करेंगे कि वह मौजूदा नेतृत्व के तहत एकजुट रहती है या महाराष्ट्र की राजनीति में कोई बड़ा संगठनात्मक बदलाव होता है।