बांध विरोधी प्रदर्शन ने लिया हिंसक रूप
अरुणाचल प्रदेश के East Siang जिले के Pasighat में प्रस्तावित Siang Upper Multipurpose Project (SUMP) के विरोध में चल रहा आंदोलन शुक्रवार रात हिंसक हो गया। अधिकारियों के मुताबिक प्रदर्शनकारियों की भीड़ ने NHPC के स्थानीय कार्यालय, एक पुलिस स्टेशन और कई पुलिस वाहनों को निशाना बनाया और आगजनी तथा तोड़फोड़ की।
घटना एक 12 घंटे के बंद (bandh) के बाद हुई। बंद का आह्वान उन संगठनों ने किया था जो प्रस्तावित Siang परियोजना का विरोध कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगों में पहले गिरफ्तार किए गए 10 कार्यकर्ताओं की रिहाई, परियोजना से संबंधित pre-feasibility survey गतिविधियों को रोकना और क्षेत्र में तैनात सुरक्षा बलों को हटाना शामिल है।
NHPC ऑफिस और पुलिस स्टेशन पर हमला
East Siang के अधिकारियों के अनुसार, शाम को स्थिति बिगड़ने के बाद भीड़ ने NHPC कार्यालय को आग के हवाले कर दिया। इसके बाद Pasighat के एक पुलिस स्टेशन को भी निशाना बनाया गया।
अधिकारियों ने बताया कि 7 से 8 पुलिस वाहनों के जलाए या क्षतिग्रस्त किए जाने की सूचना है। पुलिसकर्मियों पर पथराव भी हुआ, जिसमें कुछ पुलिसकर्मी घायल हुए। घटनास्थल पर स्थिति को नियंत्रित करने के लिए सुरक्षा बलों की अतिरिक्त तैनाती की गई।
कुछ रिपोर्टों में NHPC कार्यालय और पुलिस स्टेशन की इमारतों को पूरी तरह जलकर खाक होने के बजाय उनके हिस्सों में आगजनी तथा परिसर में वाहनों को जलाए जाने की बात कही गई है। इसलिए नुकसान की अंतिम सीमा का आधिकारिक आकलन अभी महत्वपूर्ण रहेगा।
हिंसा से पहले क्या हुआ था?
शुक्रवार को Siang, Upper Siang और East Siang के कुछ हिस्सों में 12 घंटे का बंद आयोजित किया गया था। अधिकारियों के अनुसार बंद सुबह करीब 5 बजे से शाम 5 बजे तक था और Pasighat में शुरुआती चरण अपेक्षाकृत शांत रहा।
लेकिन शाम 5 बजे के बाद कुछ प्रदर्शनकारियों ने कथित तौर पर highway blockade जारी रखा। East Siang की Deputy Commissioner Jayanti Pertin के मुताबिक प्रशासन और सुरक्षा बलों ने करीब दो घंटे तक प्रदर्शनकारियों को हटने के लिए समझाने की कोशिश की।
जब भीड़ नहीं हटी, तो मजिस्ट्रेट के आदेश पर tear gas shells का इस्तेमाल किया गया। इसके बाद प्रदर्शनकारियों की ओर से पुलिस पर पथराव शुरू होने की बात अधिकारियों ने कही।
सुबह भी हुई थी झड़प, महिलाएं घायल
रात की आगजनी से पहले शुक्रवार सुबह भी Dite-Dime, Geku क्षेत्र में प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच तनाव हुआ था।
अधिकारियों के मुताबिक वहां भीड़ को नियंत्रित करने के लिए tear gas का इस्तेमाल किया गया। विभिन्न रिपोर्टों में चार से पांच महिलाओं के घायल होने की जानकारी सामने आई है। हालांकि चोटों की संख्या और परिस्थितियों को लेकर अलग-अलग रिपोर्टें हैं।
Siang के पुलिस अधीक्षक Kamdam Sikom के अनुसार, एक समूह ने barricades को पार करने और सुरक्षा कर्मियों की ओर बढ़ने की कोशिश की तथा पथराव भी किया। पुलिस का कहना है कि इसी के बाद crowd-control measures अपनाए गए।
राजनीतिक नेताओं के घर भी निशाने पर
हिंसा केवल सरकारी और पुलिस प्रतिष्ठानों तक सीमित नहीं रही। अधिकारियों के मुताबिक प्रदर्शनकारियों ने BJP के Arunachal Pradesh अध्यक्ष Kaling Moyong तथा विधायकों Ninong Ering और Oni Panyang से जुड़े आवासों में भी तोड़फोड़ की।
Adi Bane Kebang, जो Adi समुदाय की प्रमुख संस्था है, के एक कार्यालय को भी नुकसान पहुंचने की रिपोर्ट है। घटनाओं के दौरान संपत्ति के नुकसान और सामान ले जाने के आरोप भी सामने आए हैं।
प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांग क्या है?
Siang Upper Multipurpose Project का स्थानीय स्तर पर लंबे समय से विरोध हो रहा है। आंदोलन से जुड़े संगठनों का कहना है कि परियोजना से स्थानीय समुदायों, ancestral land, पर्यावरण और आजीविका पर गंभीर असर पड़ सकता है।
प्रदर्शनकारी चाहते हैं कि परियोजना से जुड़े pre-feasibility report यानी PFR surveys और अन्य शुरुआती गतिविधियां रोकी जाएं। इसके अलावा पहले गिरफ्तार किए गए प्रदर्शनकारियों की रिहाई और क्षेत्र से paramilitary तथा central security forces को हटाने की मांग भी की जा रही है।
सरकार के लिए परियोजना क्यों महत्वपूर्ण है?
दूसरी तरफ Arunachal Pradesh सरकार Siang Upper Multipurpose Project को केवल बिजली उत्पादन की परियोजना के रूप में नहीं देखती।
सरकार के अनुसार प्रस्तावित लगभग 11,200 MW की परियोजना का संबंध Siang basin में water storage और regulation, बाढ़ प्रबंधन तथा ऊर्जा सुरक्षा से भी है। सरकार इसे चीन के तिब्बत क्षेत्र में Yarlung Tsangpo पर प्रस्तावित बड़े hydropower infrastructure के संदर्भ में रणनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण मानती है।
हालांकि स्थानीय विरोध करने वाले समूहों का जोर परियोजना के संभावित विस्थापन और पर्यावरणीय प्रभाव पर है।
अभी परियोजना निर्माण के चरण में नहीं
एक महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि SUMP अभी निर्माण के अंतिम चरण में नहीं है। सरकारी पक्ष के अनुसार फिलहाल परियोजना से जुड़े technical और environmental surveys तथा pre-feasibility assessment जैसी शुरुआती गतिविधियां चल रही हैं।
यानी मौजूदा विवाद का केंद्र मुख्य निर्माण से पहले होने वाली survey और assessment प्रक्रिया भी है। सरकार ने लोगों से परियोजना से जुड़ी अफवाहों और अपुष्ट दावों पर भरोसा नहीं करने तथा आधिकारिक सूचनाओं पर निर्भर रहने की अपील की है।
मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने हिंसा की निंदा की
Arunachal Pradesh के मुख्यमंत्री Pema Khandu ने हिंसा की निंदा करते हुए प्रदर्शनकारियों से बातचीत का रास्ता अपनाने की अपील की है।
उन्होंने कहा कि विरोध करना लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन आंदोलन ऐसा नहीं होना चाहिए जिसमें लोगों या सरकारी तथा निजी संपत्ति को नुकसान पहुंचे। मुख्यमंत्री ने SUMP को लेकर चिंताओं पर बातचीत की जरूरत पर जोर दिया।
अब सबसे बड़ी चुनौती—शांति बहाल करना
रिपोर्टों के मुताबिक शनिवार सुबह तक स्थिति को नियंत्रण में बताया गया, हालांकि इलाके में तनाव बना हुआ था और भारी सुरक्षा व्यवस्था की गई।
अब प्रशासन के सामने दोहरी चुनौती है—एक तरफ हिंसा और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वाली घटनाओं पर कार्रवाई करना और दूसरी तरफ स्थानीय समुदायों की भूमि, पर्यावरण, आजीविका और विस्थापन संबंधी चिंताओं को बातचीत के जरिए संबोधित करना।
यह मामला केवल एक dam project का विरोध नहीं रह गया है। Pasighat की घटनाओं ने यह सवाल भी खड़ा किया है कि रणनीतिक महत्व वाली बड़ी infrastructure परियोजनाओं और स्थानीय समुदायों की चिंताओं के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए।
आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रशासन हिंसा के मामले में क्या कार्रवाई करता है, गिरफ्तारियों को लेकर क्या निर्णय होता है और SUMP की survey प्रक्रिया को लेकर सरकार तथा आंदोलनकारी संगठनों के बीच कोई औपचारिक बातचीत शुरू होती है या नहीं।