अरुणाचल प्रदेश में सियांग नदी पर बनने वाली 11,200 MW की बड़ी बाँध परियोजना को लेकर स्थानीय समुदाय का विरोध तेज़ हो गया है। सर्वेक्षण और प्राक्कलन कार्यों के दौरान प्रदर्शनकारी और सुरक्षा कर्मियों के बीच झड़पें भी देखी गई हैं।
सियांग अपर मल्टीपरपज़ प्रोजेक्ट (SUMP) सियांग और अपर सियांग ज़िलों में प्रस्तावित है। इस परियोजना में लगभग 9.2 अरब घन मीटर की ज़लभंडारण क्षमता होगी।
समुदाय की मुख्य चिंताएँ
स्थानीय समुदायों को परियोजना से ज़मीन, जंगल, आजीविका, पर्यावरण और पारंपरिक जीवनशैली को नुक़सान की चिंता है। सितंबर 2026 में यिङ्कियोङ् में प्रदर्शनकारियों ने सर्वेक्षण कार्यों के विरुद्ध नारे लगाए। विरोधियों ने स्थानीय विधायक अलो लिबाङ् के आवास में घुसकर भी प्रदर्शन किया।
आदि समुदायों ने अपनी परंपरागत संस्थाओं का इस्तेमाल करते हुए इस परियोजना पर अपनी चिंताएँ दर्ज की हैं। अगस्त 2025 में चार ज़िलों के आदि गाँवों से सैकड़ों लोगों ने गेकू में बोगुङ् बोकाङ् केबाङ् का आयोजन किया। यह एक पारंपरिक विचार-विमर्श मंच है।
सरकार का दृष्टिकोण
अरुणाचल प्रदेश सरकार का कहना है कि यह परियोजना चीन द्वारा यारलुङ् त्साङ्पो पर प्रस्तावित बाँध परियोजनाओं के संदर्भ में सियांग बेसिन में जल संचयन और नियंत्रण में मदद कर सकती है।
राज्य के मानवाधिकार संगठन ने सर्वेक्षण और ड्रिलिङ् कार्यों को तब तक रोकने का आह्वान किया है जब तक ज़्यादा परामर्श न हो जाए।
अभी कई चरण बाकी
परियोजना अभी प्राक्कलन चरण में है। अगर तकनीकी रूप से व्यावहारिक पाई गई, तो निर्माण शुरू होने से पहले सामाजिक प्रभाव आकलन, पर्यावरणीय प्रभाव आकलन और विस्तृत परियोजना रिपोर्ट की आवश्यकता होगी।