बेंगलुरु में निर्माणाधीन इमारत में हुए विस्फोट की जांच अब एक नए और गंभीर सुराग की ओर बढ़ती दिखाई दे रही है। शुरुआती जांच में आशंका जताई गई है कि जिस वस्तु से विस्फोट हुआ, वह सामान्य बैटरी टॉर्च के रूप में छिपाया गया IED हो सकता है। हालांकि, पुलिस ने अभी इस संभावना की आधिकारिक रूप से अंतिम पुष्टि नहीं की है और विस्फोटक सामग्री की प्रकृति स्पष्ट करने के लिए फॉरेंसिक जांच जारी है।
यह विस्फोट 20 अक्टूबर को बेंगलुरु के पुलकेशीनगर इलाके में एक निर्माणाधीन इमारत में हुआ था। घटना में दो लोग घायल हुए। जांच एजेंसियां मौके से मिले साक्ष्यों, संदिग्ध वस्तु और घायलों के बयानों के आधार पर पूरे घटनाक्रम को जोड़ने में जुटी हैं।
टॉर्च दबाते ही हुआ धमाका?
बेंगलुरु पुलिस कमिश्नर सीमंत कुमार सिंह के मुताबिक, शुरुआती जानकारी में सामने आया कि वहां मौजूद एक व्यक्ति ने एक बैटरी से चलने वाली वस्तु को टॉर्च समझकर उसका बटन दबाया था। इसके तुरंत बाद विस्फोट हुआ।
पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि वह वस्तु वास्तव में क्या थी और उसके भीतर कौन-सी सामग्री मौजूद थी। कमिश्नर ने स्पष्ट किया था कि इस चरण में IED की पुष्टि करना जल्दबाजी होगी और तकनीकी जांच के बाद ही निष्कर्ष निकाला जा सकेगा।
हालांकि, ताजा प्रारंभिक जांच से जुड़े अधिकारियों के हवाले से रिपोर्टों में यह संभावना सामने आई है कि वस्तु को टॉर्च के रूप में छिपाया गया IED हो सकता है। यही सुराग अब जांच का अहम हिस्सा बन गया है।
दो लोग हुए थे घायल
विस्फोट में दो लोग घायल हुए थे। दोनों निर्माणाधीन परिसर में मौजूद थे। रिपोर्टों के मुताबिक, घायलों में एक निर्माण श्रमिक और एक सुरक्षा गार्ड शामिल थे।
विस्फोट के बाद दोनों को इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया। एक घायल को हाथ में गंभीर चोट लगी और उसकी एक उंगली गंवाने की भी जानकारी सामने आई है।
पुलिस ने घायलों से भी जानकारी हासिल की है, लेकिन अधिकारियों के अनुसार उनके बयानों में कुछ असंगतियां सामने आई हैं। इसलिए जांचकर्ता केवल मौखिक बयानों पर निर्भर नहीं हैं और घटनास्थल से मिले तकनीकी तथा फॉरेंसिक साक्ष्यों का मिलान कर रहे हैं।
ATS और बम निरोधक टीम भी जांच में शामिल
घटना की गंभीरता को देखते हुए जांच में कई विशेषज्ञ टीमें शामिल की गई हैं। पुलिस के Anti-Terrorism Cell, Bomb Detection and Disposal Squad और फॉरेंसिक विशेषज्ञों ने घटनास्थल का निरीक्षण किया।
जांचकर्ताओं ने वहां से मिले संदिग्ध पदार्थों और अन्य सामग्री को सुरक्षित कर परीक्षण के लिए भेजा है। इसका उद्देश्य यह पता लगाना है कि वास्तव में विस्फोट किस वजह से हुआ और क्या इसमें किसी विस्फोटक उपकरण का इस्तेमाल किया गया था।
फॉरेंसिक रिपोर्ट से तय होगी असली वजह
फिलहाल जांच का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा फॉरेंसिक रिपोर्ट है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि विस्फोट किसी सामान्य बैटरी या तकनीकी खराबी के कारण हुआ, किसी रासायनिक प्रतिक्रिया से हुआ या फिर किसी जानबूझकर तैयार किए गए विस्फोटक उपकरण के कारण।
कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियांक खरगे ने भी लोगों से जांच पूरी होने तक अफवाहों पर ध्यान नहीं देने की अपील की थी। उन्होंने कहा था कि घटनास्थल से लिए गए नमूनों की जांच के बाद ही तस्वीर साफ होगी।
यानी फिलहाल IED वाली बात जांच का अहम एंगल है, अंतिम निष्कर्ष नहीं।
निर्माणाधीन इमारत में कैसे पहुंची संदिग्ध वस्तु?
पुलिस इस सवाल का भी जवाब तलाश रही है कि संदिग्ध वस्तु वहां तक कैसे पहुंची। प्रारंभिक रिपोर्टों में घटनाक्रम को लेकर अलग-अलग विवरण सामने आए हैं—कुछ रिपोर्टों में वस्तु को बैटरी टॉर्च बताया गया है, जबकि दूसरी शुरुआती रिपोर्टों में एक बैग से जुड़ी जानकारी भी सामने आई थी।
इसी वजह से जांच एजेंसियां घटनास्थल की परिस्थितियों, घायलों के बयान और उपलब्ध फॉरेंसिक साक्ष्यों का मिलान कर रही हैं। अभी किसी एक घटनाक्रम को अंतिम रूप से स्थापित नहीं किया गया है।
क्या पुराने बेंगलुरु विस्फोटों से कोई कनेक्शन है?
जांचकर्ताओं के सामने एक और सवाल यह है कि क्या इस घटना का संबंध बेंगलुरु में पहले सामने आए किसी विस्फोट या विस्फोटक सामग्री से जुड़े मामले से है।
पुलिस इस संभावना को भी देख रही है, लेकिन फिलहाल किसी पुराने मामले से सीधा संबंध स्थापित नहीं हुआ है। अधिकारियों ने सभी संभावनाओं को खुला रखते हुए जांच आगे बढ़ाने की बात कही है।
NIA की भूमिका पर भी नजर
घटना में IED की आशंका सामने आने के बाद राष्ट्रीय जांच एजेंसी NIA की संभावित भूमिका को लेकर भी चर्चा शुरू हो गई है। कुछ रिपोर्टों में बताया गया है कि NIA इस मामले की जांच अपने हाथ में ले सकती है, हालांकि उपलब्ध जानकारी के आधार पर यह कहना जल्दबाजी होगी कि जांच औपचारिक रूप से NIA को सौंप दी गई है।
फिलहाल स्थानीय पुलिस और विशेषज्ञ एजेंसियां घटनास्थल से मिले साक्ष्यों की जांच कर रही हैं।
सुरक्षा एजेंसियों के लिए क्यों अहम है यह मामला?
यदि फॉरेंसिक जांच में यह साबित होता है कि सामान्य वस्तु के रूप में दिखाई देने वाले उपकरण में जानबूझकर विस्फोटक सामग्री छिपाई गई थी, तो यह जांच के लिए एक महत्वपूर्ण तथ्य होगा।
ऐसे मामलों में सुरक्षा एजेंसियों के सामने केवल विस्फोट का कारण पता लगाने की चुनौती नहीं होती, बल्कि यह भी पता लगाना जरूरी होता है कि वस्तु कहां से आई, उसे किसने तैयार या उपलब्ध कराया और घटना के पीछे कोई आपराधिक या आतंकी मकसद था या नहीं।
हालांकि, इस मामले में किसी संगठन या व्यक्ति की भूमिका को लेकर अभी कोई आधिकारिक निष्कर्ष सामने नहीं आया है।
अभी सबसे बड़ा सवाल क्या?
बेंगलुरु पुलिस के सामने फिलहाल तीन बड़े सवाल हैं—
क्या विस्फोट वास्तव में IED से हुआ?
संदिग्ध वस्तु घटनास्थल तक कैसे पहुंची?
क्या यह महज एक दुर्घटना थी या इसके पीछे किसी की सुनियोजित भूमिका थी?
इन सवालों का जवाब फॉरेंसिक जांच और पुलिस की आगे की पड़ताल से मिलने की उम्मीद है।
इसलिए फिलहाल इसे पक्का आतंकी हमला या सुनियोजित ब्लास्ट कहना सही नहीं होगा। जांच एजेंसियां हर संभावित एंगल की जांच कर रही हैं और अंतिम निष्कर्ष रिपोर्ट आने के बाद ही सामने आएगा।