बदायूं के दातागंज कोतवाली क्षेत्र में हुई चर्चित ऑनर किलिंग के मामले में अदालत ने हमशक्ल जुड़वां भाइयों चंद्रपाल और कुंवरपाल समेत चार दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है। इन दोनों भाइयों ने अपनी इकलौती बेटी अर्चना की प्रेम विवाह करने पर थाने के गेट के सामने गला काटकर हत्या कर दी थी।
इस हत्याकांड में जुड़वां भाइयों के दो भतीजे रवित कुमार और पुष्पेंद्र भी शामिल थे। कोर्ट ने चारों को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास के साथ अर्थदंड भी लगाया है। मुख्य दोषी रवित कुमार पर 26 हजार रुपये और बाकी तीन दोषियों पर 25-25 हजार रुपये का जुर्माना तय किया गया है।
एक जैसी शक्ल, एक ही पत्नी
पलिया गूजर गांव के निवासी चंद्रपाल और कुंवरपाल एक साथ जन्मे और बचपन से लेकर जवानी तक साये की तरह एक-दूसरे के साथ रहे। खाना, नहाना और सोना भी दोनों साथ करते थे। दोनों भाइयों ने एक ही महिला से विवाह किया, जिससे अर्चना पैदा हुई। इस असाधारण जोड़ी की कद-काठी और अंदाज इतने चर्चित हुए कि इन पर एक तमिल फिल्म भी बन चुकी है।
प्रेम विवाह बना जानलेवा
अर्चना बीए द्वितीय वर्ष की छात्रा थीं। बरेली के सुभाषनगर थाना क्षेत्र की बीडीए कॉलोनी निवासी देवेंद्र सिंह उर्फ हैप्पी, जिनका ननिहाल पलिया गूजर गांव में ही है, से अर्चना की मुलाकात हुई थी। दोनों ने परिवार की मर्जी के खिलाफ जाकर आर्य समाज मंदिर में विवाह कर लिया।
अर्चना के परिजनों ने देवेंद्र और उनके भाइयों के खिलाफ धारा 366 के तहत मुकदमा दर्ज करा दिया। इसके बाद देवेंद्र हाईकोर्ट पहुंचे। हाईकोर्ट के निर्देश पर अर्चना को अपना धारा 164 का बयान दर्ज कराने के लिए दातागंज कोतवाली आना था।
थाने के सामने ही हुई हत्या
28 जुलाई 2021 को अर्चना और देवेंद्र जब गाड़ी से दातागंज कोतवाली के गेट के पास पहुंचे, तो चंद्रपाल, कुंवरपाल, रवित कुमार और पुष्पेंद्र ने गाड़ी रोक ली। आरोप है कि दोनों को गाड़ी से बाहर खींचकर रवित कुमार ने बाकी आरोपियों के सहयोग से चाकू से अर्चना के गले पर वार कर दिया।
देवेंद्र पर भी हमला किया गया। पुलिस ने मौके पर ही रवित कुमार और पुष्पेंद्र को चाकू सहित पकड़ लिया, जबकि बाकी आरोपी मौके से फरार हो गए। गंभीर हालत में अर्चना को अस्पताल ले जाया गया, जहां उनकी मौत हो गई। थाने के गेट पर हुई इस सरेआम हत्या से इलाके में भगदड़ मच गई थी।
पांच साल बाद फैसला
पुलिस ने विवेचना पूरी कर कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की थी, जिसके बाद मामले की सुनवाई करीब पांच साल तक चली। बृहस्पतिवार को अदालत ने सुनवाई पूरी करते हुए चारों आरोपियों को अर्चना हत्याकांड का दोषी ठहराया और उम्रकैद के साथ अर्थदंड की सजा सुनाई। जुर्माना न भरने पर दोषियों को तीन माह की अतिरिक्त कैद भुगतनी होगी।