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CEC विवाद पर खरगे के बयान से सियासी घमासान, BJP ने खोला मोर्चा; कांग्रेस बोली—वोटर अधिकारों की लड़ाई जारी रहेगी

SIR और Chief Election Commissioner Gyanesh Kumar को लेकर खरगे के हमले के बीच BJP ने कांग्रेस अध्यक्ष की भाषा पर सवाल उठाए; दोनों दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप और तेज

CEC विवाद पर खरगे के बयान से सियासी घमासान, BJP ने खोला मोर्चा; कांग्रेस बोली—वोटर अधिकारों की लड़ाई जारी रहेगी
प्रतीकात्मक तस्वीर, AI से बनाई गई। यह वास्तविक घटना का चित्रण नहीं है।

देश की राजनीति में Election Commission, Special Intensive Revision (SIR) और Chief Election Commissioner (CEC) Gyanesh Kumar को लेकर पहले से चल रहा विवाद अब और तीखा हो गया है। कांग्रेस अध्यक्ष Mallikarjun Kharge के लगातार हमलों के बाद BJP ने उनके बयानों पर कड़ी आपत्ति जताई है। BJP का आरोप है कि कांग्रेस चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्था पर लगातार राजनीतिक दबाव बनाने की कोशिश कर रही है, जबकि कांग्रेस का कहना है कि उसकी लड़ाई वोटर अधिकारों, पारदर्शिता और चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता को लेकर है।

विवाद उस समय और बढ़ गया जब पटना में एक कार्यक्रम के दौरान खरगे ने प्रधानमंत्री Narendra Modi को लेकर आपत्तिजनक मानी जा रही टिप्पणी की। इसके बाद BJP ने कांग्रेस अध्यक्ष से बिना शर्त माफी की मांग की और देशभर में विरोध प्रदर्शन का ऐलान किया।

CEC को लेकर खरगे का लगातार हमला

कांग्रेस अध्यक्ष Mallikarjun Kharge पिछले कई सप्ताह से CEC Gyanesh Kumar की भूमिका पर सवाल उठाते रहे हैं। सितंबर में कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में खरगे ने CEC पर बेहद तीखा हमला करते हुए उन्हें BJP सरकार का “puppet” तक बताया था और उनके तत्काल हटाए जाने की मांग की थी।

खरगे का मुख्य आरोप है कि SIR के दौरान मतदाता सूचियों में बदलाव, नाम हटाने और Form-6 से जुड़े मामलों में पारदर्शिता की कमी है। कांग्रेस ने मांग की है कि चुनावी रोल में किए गए बदलावों का पूरा डेटा सार्वजनिक किया जाए और जिन मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं, उन्हें अपील का पर्याप्त अवसर दिया जाए।

कांग्रेस ने यह भी कहा है कि जहां गंभीर अनियमितताएं सामने आएं, वहां स्वतंत्र और समयबद्ध जांच कराई जानी चाहिए।

BJP ने खरगे की भाषा पर जताई आपत्ति

CEC और SIR को लेकर कांग्रेस के हमलों के बीच अब BJP ने खरगे की हालिया टिप्पणी को राजनीतिक मुद्दा बना दिया है।

25 अक्टूबर को पटना में श्रीकृष्ण सिंह की जयंती के कार्यक्रम में खरगे ने SIR को लेकर BJP और चुनावी प्रक्रिया पर निशाना साधते हुए कहा कि कथित अनियमितताओं के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई होगी। इसी दौरान मंच से एक व्यक्ति ने प्रधानमंत्री मोदी को लेकर टिप्पणी की, जिसके जवाब में खरगे ने ऐसी भाषा का इस्तेमाल किया जिसे BJP ने बेहद आपत्तिजनक बताया।

BJP के राष्ट्रीय प्रवक्ता CR Kesavan ने खरगे की टिप्पणी को “अक्षम्य” बताते हुए कांग्रेस अध्यक्ष और पार्टी नेतृत्व से तत्काल बिना शर्त माफी मांगने की मांग की। BJP ने इसे प्रधानमंत्री के पद और जनादेश के प्रति अपमानजनक टिप्पणी बताया।

इसके बाद BJP ने 26 अक्टूबर को देशभर में विरोध प्रदर्शन करने की घोषणा की।

कांग्रेस का फोकस SIR और वोटर लिस्ट पर

कांग्रेस का कहना है कि BJP द्वारा भाषा और व्यक्तिगत टिप्पणी को मुद्दा बनाकर असली सवालों से ध्यान हटाया जा रहा है।

पार्टी लगातार SIR की प्रक्रिया और चुनावी रोल में कथित बदलावों को लेकर चुनाव आयोग से जवाब मांग रही है। INDIA bloc की ओर से भी CEC Gyanesh Kumar के खिलाफ राजनीतिक अभियान तेज किया गया है।

खरगे ने अपने पहले के बयानों में कहा था कि कांग्रेस किसी एक व्यक्ति या पार्टी के खिलाफ नहीं बल्कि वोटर के अधिकार और लोकतांत्रिक व्यवस्था की विश्वसनीयता के लिए लड़ रही है। उन्होंने मांग की थी कि चुनावी प्रक्रिया ऐसी हो जिस पर सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों भरोसा कर सकें।

INDIA bloc भी कर रहा है आंदोलन की तैयारी

CEC को लेकर विपक्षी दलों का अभियान भी लगातार आगे बढ़ रहा है। INDIA bloc ने SIR और चुनाव आयोग से जुड़े मुद्दों पर देशव्यापी आंदोलन की रणनीति बनाई है।

ताजा रिपोर्टों के अनुसार विपक्ष 30 अक्टूबर को CEC के खिलाफ प्रतीकात्मक “public impeachment” और 1 नवंबर को दिल्ली के Ramlila Maidan में बड़ी रैली की तैयारी कर रहा है। विपक्ष का कहना है कि यह अभियान कथित “vote theft” और चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग को लेकर है।

हालांकि, CEC के खिलाफ विपक्ष के आरोप और चुनावी प्रक्रिया में कथित हेरफेर के दावे राजनीतिक आरोप हैं। इन्हें अंतिम रूप से सिद्ध तथ्य के तौर पर पेश नहीं किया जा सकता।

BJP-कांग्रेस के बीच टकराव क्यों बढ़ रहा है?

दरअसल, इस पूरे विवाद के केंद्र में केवल एक बयान नहीं है। इसके पीछे SIR, मतदाता सूची, CEC की भूमिका और चुनावी संस्थाओं की स्वतंत्रता को लेकर महीनों से चल रही राजनीतिक लड़ाई है।

कांग्रेस का आरोप है कि SIR के नाम पर मतदाता सूची में ऐसे बदलाव हो सकते हैं जिनका असर योग्य मतदाताओं पर पड़े। BJP और चुनाव आयोग की ओर से विपक्ष के आरोपों को राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया जाता रहा है।

इसी बीच चुनाव आयोग ने भी यह स्पष्ट किया है कि अधिकारियों के बीच उठाए गए operational queries, inputs और suggestions को सीधे institutional dissent के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

यानी विवाद का एक हिस्सा चुनावी प्रक्रिया से जुड़े वास्तविक प्रशासनिक सवालों पर है, जबकि दूसरा हिस्सा इस बात पर है कि राजनीतिक दल इन सवालों को किस भाषा और तरीके से जनता के सामने रख रहे हैं।

बयान बनाम संस्थागत सवाल

इस पूरे घटनाक्रम में अब दो अलग-अलग मुद्दे एक-दूसरे से जुड़ते दिखाई दे रहे हैं।

पहला मुद्दा है CEC और SIR पर कांग्रेस के आरोप, जिन पर विपक्ष चुनाव आयोग से जवाब और कार्रवाई की मांग कर रहा है।

दूसरा मुद्दा है खरगे की राजनीतिक भाषा, जिसे BJP ने प्रधानमंत्री और लोकतांत्रिक जनादेश के अपमान से जोड़ दिया है।

BJP चाहती है कि कांग्रेस अध्यक्ष अपनी टिप्पणी पर माफी मांगें, जबकि कांग्रेस अपने अभियान को वोटर लिस्ट और चुनावी पारदर्शिता के सवाल पर आगे बढ़ाने की तैयारी में है।

आगे क्या?

अब आने वाले दिनों में यह विवाद और बढ़ सकता है। BJP के विरोध प्रदर्शन और INDIA bloc की प्रस्तावित गतिविधियों के बीच CEC Gyanesh Kumar, SIR और चुनावी रोल का मुद्दा राजनीतिक बहस के केंद्र में बना रहने की संभावना है।

साथ ही, दोनों दलों के बीच बयानबाजी का स्तर भी महत्वपूर्ण होगा। यदि व्यक्तिगत टिप्पणियां और तीखी होती हैं, तो चुनाव आयोग और मतदाता सूची से जुड़े मूल सवालों पर होने वाली बहस राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप में बदल सकती है।

फिलहाल इतना स्पष्ट है कि BJP और कांग्रेस आमने-सामने हैं, और CEC-संबंधी विवाद अब सिर्फ चुनावी प्रक्रिया का मुद्दा नहीं रह गया है—यह देश की राजनीति में एक बड़ा संवैधानिक और राजनीतिक टकराव बनता जा रहा है।