रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शुक्रवार को लखनऊ में कांग्रेस और उसके सहयोगियों पर बांग्लादेश की तरह सत्ता परिवर्तन लाने का गंभीर आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि विरोधी दल सार्वजनिक असंतोष का दुरुपयोग करके अपने राजनीतिक लक्ष्य हासिल करना चाहते हैं।
सिंह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, "कुछ लोग बांग्लादेश की घटनाओं की तरह सत्ता परिवर्तन चाहते हैं। वे खुलेआम स्वीकार करते हैं कि उन्होंने बांग्लादेश की परिस्थितियों से प्रेरणा ली है।" मंत्री ने यह भी कहा कि "भारत का लोकतंत्र राजनीतिक स्वार्थ की कुर्बानी नहीं दी जा सकती।"
विरोधी दलों पर हमला करते हुए सिंह ने कहा कि वे नौजवानों की ऊर्जा को रचनात्मक कामों की जगह राजनीतिक संघर्ष और अराजकता में झलकाना चाहते हैं। उन्होंने कहा, "देश के नौजवानों को अराजकता की राजनीति का मोहरा बनाया जा रहा है।" सिंह के अनुसार लोकतंत्र किसी को अव्यवस्था फैलाने या लोकतांत्रिक संस्थाओं की विश्वसनीयता को नुकसान पहुँचाने की आजादी नहीं देता।
मंत्री ने कांग्रेस के खिलाफ संवैधानिक संस्थाओं को कमजोर करने का अभियान को पार्टी का "चौथा अक्षम्य अपराध" बताया। सिंह ने आपातकाल, 1984 के दंगों और 1990 की कार सेवक गोलीकाँड जैसी ऐतिहासिक घटनाओं का उल्लेख करते हुए कांग्रेस पर बार-बार लोकतंत्र को खतरे में डालने का आरोप लगाया।
विरोधी दलों के विरोध प्रदर्शन मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने की माँग को लेकर किए जा रहे हैं। उन्हें चुनाव सुधार प्रक्रिया में अनियमितताओं का आरोप लगा है। सिंह का कहना है कि यह संघर्ष वास्तव में सत्ता पर कब्जे का एक षड्यंत्र है, न कि चुनावी सुधार के लिए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के पास उत्तर प्रदेश में 1985 के बाद सरकार बनाने का अनुभव भी नहीं है।