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दिल्ली की जूता फैक्ट्री में आग ने ली 4 मजदूरों की जान, धुएं में फंसे कर्मचारियों को नहीं मिला बचने का मौका

मंगोलपुरी औद्योगिक क्षेत्र फेज-1 में शुक्रवार रात बेसमेंट में लगी आग से मचा हड़कंप। दमकल की 20 गाड़ियों ने चलाया रेस्क्यू ऑपरेशन, छह मजदूरों को बेहोशी की हालत में निकाला गया। दो घायलों का अस्पताल में इलाज जारी।

दिल्ली की जूता फैक्ट्री में आग ने ली 4 मजदूरों की जान, धुएं में फंसे कर्मचारियों को नहीं मिला बचने का मौका
प्रतीकात्मक तस्वीर, AI से बनाई गई। यह वास्तविक घटना का चित्रण नहीं है।

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के मंगोलपुरी औद्योगिक क्षेत्र में जूता बनाने वाली फैक्ट्री में भीषण आग लगने से चार मजदूरों की मौत हो गई, जबकि दो अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। शुक्रवार रात करीब 9:30 बजे फैक्ट्री के बेसमेंट में आग लगी। देखते ही देखते धुआं इमारत की ऊपरी मंजिलों तक फैल गया और अंदर मौजूद मजदूर फंस गए।

सूचना मिलते ही दिल्ली दमकल विभाग और पुलिस की टीमें मौके पर पहुंचीं। दमकल की करीब 20 गाड़ियों ने आग बुझाने और अंदर फंसे लोगों को निकालने का अभियान चलाया। बचावकर्मियों ने छह लोगों को बेहोशी की हालत में बाहर निकाला और संजय गांधी मेमोरियल अस्पताल पहुंचाया। वहां डॉक्टरों ने चार मजदूरों को मृत घोषित कर दिया, जबकि दो घायलों का इलाज जारी है।

बेसमेंट में लगी आग, ऊपरी मंजिलों तक पहुंचा धुआं
यह हादसा दिल्ली के बाहरी इलाके में स्थित मंगोलपुरी औद्योगिक क्षेत्र फेज-1 की जूता निर्माण इकाई में हुआ। दमकल विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, आग सबसे पहले फैक्ट्री के बेसमेंट में लगी थी, जहां जूते बनाने और रखने का काम होता था।

बेसमेंट से उठे घने धुएं ने पूरी इमारत को अपनी चपेट में ले लिया। धुआं सीढ़ियों और अन्य रास्तों से ऊपर की मंजिलों तक पहुंच गया, जिससे वहां मौजूद मजदूरों को बाहर निकलने में परेशानी हुई।

दमकल अधिकारी के अनुसार, बचाव अभियान के दौरान एक व्यक्ति को तीसरी मंजिल की सीढ़ियों से और पांच अन्य लोगों को चौथी मंजिल के एक कमरे से बाहर निकाला गया।

छह मजदूर बेहोशी की हालत में मिले
दमकलकर्मियों ने फैक्ट्री के अंदर फंसे छह लोगों को बाहर निकाला। सभी को तत्काल संजय गांधी मेमोरियल अस्पताल ले जाया गया।

अस्पताल में चार मजदूरों को मृत घोषित कर दिया गया, जबकि दो अन्य को गंभीर हालत में भर्ती किया गया। अधिकारियों के मुताबिक, घायलों का इलाज जारी है।

रिपोर्टों में मृतकों की पहचान इस प्रकार बताई गई है:
- प्रेमचंद (50 वर्ष)
- हरिहर (40 वर्ष)
- अशोक (25 वर्ष)
- लाल बाबू (38 वर्ष)
घायलों की पहचान हरेंद्र (35 वर्ष) और विकास (21 वर्ष) के रूप में की गई है।

तीन घंटे से अधिक चला दमकल अभियान
आग की सूचना मिलने के बाद दमकल विभाग ने करीब 20 गाड़ियां घटनास्थल पर भेजीं। दमकलकर्मियों ने कई घंटों तक आग बुझाने और अंदर फंसे लोगों को सुरक्षित निकालने का प्रयास किया।

आग पर काबू पाने के बाद भी इमारत में धुआं और गर्मी बनी हुई थी। इसलिए दमकलकर्मियों ने कूलिंग ऑपरेशन चलाया, ताकि दोबारा आग भड़कने की आशंका को रोका जा सके।

पुलिस और दमकल विभाग की टीमों ने घटनास्थल पर बचाव कार्य के दौरान इलाके को घेरकर लोगों की आवाजाही नियंत्रित की।

फैक्ट्री मालिक को नोटिस, दो लोगों को हिरासत में लिया गया
हादसे के बाद दिल्ली पुलिस ने मामले में लापरवाही और गैर इरादतन हत्या से जुड़े प्रावधानों के तहत केस दर्ज किया है।

द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस ने इस मामले में दो लोगों को हिरासत में लिया है। उनकी पहचान सुरेश चंद (47) और अशोक (47) के रूप में बताई गई है। पुलिस फैक्ट्री के मालिक और अन्य संबंधित लोगों की भूमिका की भी जांच कर रही है।

जांच का उद्देश्य यह पता लगाना है कि फैक्ट्री में आग से बचाव के पर्याप्त इंतजाम थे या नहीं और घटना के समय कितने मजदूर इमारत के अंदर मौजूद थे।

शॉर्ट सर्किट की आशंका, लेकिन कारण की पुष्टि बाकी
शुरुआती रिपोर्टों में आग लगने की वजह शॉर्ट सर्किट होने की आशंका जताई गई है। हालांकि, दिल्ली पुलिस ने अभी तक आग लगने का अंतिम कारण आधिकारिक रूप से स्पष्ट नहीं किया है।

जूता निर्माण इकाइयों में कच्चा माल, तैयार उत्पाद और अन्य ज्वलनशील सामग्री मौजूद हो सकती है। ऐसे में आग लगने के बाद धुएं और लपटों का तेजी से फैलना बचाव कार्य को कठिन बना सकता है।

पुलिस फैक्ट्री की संरचना, बिजली की वायरिंग, अग्निशमन उपकरणों और सुरक्षा व्यवस्था की जांच कर रही है।

औद्योगिक इलाकों में मजदूरों की सुरक्षा पर सवाल
मंगोलपुरी की घटना ने एक बार फिर औद्योगिक इकाइयों में अग्नि सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। फैक्ट्रियों में काम करने वाले मजदूरों के लिए सुरक्षित निकास, आग बुझाने के उपकरण, अलार्म और आपातकालीन रास्ते बेहद जरूरी होते हैं।

इस हादसे में छह लोगों का इमारत के अंदर बेहोशी की हालत में मिलना बताता है कि घने धुएं ने बचाव कार्य को कितना मुश्किल बना दिया था।

अब जांच में यह स्पष्ट करना महत्वपूर्ण होगा कि फैक्ट्री में सुरक्षा नियमों का पालन किया जा रहा था या नहीं और यदि कोई लापरवाही हुई तो उसके लिए कौन जिम्मेदार है।