एल नीनो के कारण भारत में चीनी की कीमत तेजी से बढ़ी है। सितंबर 2025 में जहाँ चीनी 40 रुपये किलो थी, वहीं अब 75 रुपये किलो तक पहुँच गई है। यह कीमत का इजाफा सूखे मौसम और उत्पादन में भारी गिरावट की वजह से हुआ है।
2025-26 में भारत की चीनी का उत्पादन 30.6 लाख टन रह सकता है। यह आँकड़ा पहले के 34.3 लाख टन के अनुमान से 11 फीसदी कम है। सरकार ने कहा कि उत्पादन में कमी मुख्य रूप से गन्ने की खेती में गिरावट और एल नीनो के दौरान कम बारिश की वजह से हुई है।
सरकार ने आयात की इजाजत दी
बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करने के लिए सरकार ने 31 अक्टूबर 2026 तक एक लाख टन कच्ची चीनी बिना शुल्क के आयात करने की अनुमति दे दी है। इस कदम का मकसद त्योहारी सीजन से पहले आपूर्ति को बेहतर बनाना है।
किसानों को नुकसान
गन्ने के किसान मुकेश चंद्र के अनुसार, किसान गन्ने की खेती छोड़कर दूसरी फसलें उगाने लगे हैं। मजदूरी के खर्च भी बहुत बढ़ गए हैं और गन्ने को शराब बनाने में इस्तेमाल किया जा रहा है।
100 किलो चीनी बनाने में करीब 470 रुपये का खर्च आता है, लेकिन इससे किसान को सिर्फ 416 रुपये की वापसी मिलती है। इस तरह प्रति 100 किलो में किसान को लगभग 54 रुपये का नुकसान होता है।
खीर-हलवे की दुनिया पर असर
भारत में मिठाई का कारोबार 1.1 अरब डॉलर से भी ज्यादा का है। इसमें से 40 फीसदी से अधिक आय त्योहारों के मौसम में आती है। अब चीनी की महँगाई इस पूरी दुनिया को चुनौती दे रही है।
भारत हर साल 29 से 32 लाख मीट्रिक टन चीनी खपत करता है। यह दुनिया की कुल खपत का करीब 15 फीसदी है।
मानसून में रिकॉर्ड कमी
जून से सितंबर के बीच भारत को दो दशक में सबसे कम बारिश मिली। यह एल नीनो के असर का नतीजा है। कमजोर मानसून और सूखा मौसम फसल की पैदावार और गन्ने में शर्करा की मात्रा दोनों को कम करता है।
विश्व बैंक ने कहा कि भारत में मानसून में कमी उम्मीद से ज्यादा है। इससे कृषि उत्पादन घटेगा, ग्रामीण इलाकों में माँग कम होगी और खाने की कीमतें बढ़ेंगी।
भारत के विदेश मंत्री ने चेताया है कि एल नीनो के साथ-साथ जंगों की वजह से खाद की कमी भी आने वाले महीनों में बड़ा खाद्य संकट ला सकती है।