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‘Farzi’ देखकर नकली नोट छापने का प्लान! राजस्थान में बड़ा Fake Currency Racket बेनकाब, Mastermind समेत 6 गिरफ्तार

डूंगरपुर पुलिस का दावा—वेब सीरीज से प्रेरित होकर तैयार किया गया कथित नेटवर्क; शुरुआती कार्रवाई में ₹4.95 लाख के नकली ₹500 नोट बरामद, मुख्य आरोपी को 1,300 किमी पीछा कर लुधियाना से पकड़ा गया

‘Farzi’ देखकर नकली नोट छापने का प्लान! राजस्थान में बड़ा Fake Currency Racket बेनकाब, Mastermind समेत 6 गिरफ्तार
प्रतीकात्मक तस्वीर, AI से बनाई गई। यह वास्तविक घटना का चित्रण नहीं है।

राजस्थान के डूंगरपुर में पुलिस ने कथित अंतरराज्यीय Fake Currency Racket का पर्दाफाश करते हुए छह लोगों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक, इस नेटवर्क में शामिल आरोपियों ने लोकप्रिय वेब सीरीज ‘Farzi’ देखने के बाद नकली भारतीय मुद्रा तैयार करने का विचार बनाया था।

जांच में राजस्थान के अलावा उत्तर प्रदेश, हरियाणा और छत्तीसगढ़ तक फैले कथित संपर्कों की जानकारी सामने आई है। पुलिस का कहना है कि नेटवर्क में अलग-अलग लोगों की कथित भूमिकाएं तय थीं—किसी पर नकली नोट तैयार करने की तकनीक देने, किसी पर कागज उपलब्ध कराने और किसी पर डिजिटल डिजाइन उपलब्ध कराने का आरोप है। हालांकि, इन सभी आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया में होनी बाकी है।

₹4.95 लाख के नकली नोटों से खुला मामला

डूंगरपुर पुलिस के अनुसार, मामले की शुरुआत सितंबर के अंत में हुई, जब पुलिस ने रामसागड़ा थाना क्षेत्र के माडा स्कूल ग्राउंड से दो आरोपियों—भावेश खटीक और नयन जोशी—को पकड़ा।

पुलिस का दावा है कि दोनों के पास से ₹4,95,500 मूल्य के कथित नकली ₹500 के नोट बरामद किए गए। पूछताछ के दौरान पुलिस को कथित नेटवर्क के अन्य सदस्यों के बारे में जानकारी मिली और जांच को दूसरे राज्यों तक बढ़ाया गया।

यहीं से पुलिस के सामने इस पूरे नेटवर्क की कड़ियां खुलनी शुरू हुईं।

Mastermind तक पहुंचने के लिए 1,300 KM का पीछा

पुलिस के मुताबिक, शुरुआती गिरफ्तारी के बाद रवि कुमार मिश्रा, जिसे पुलिस कथित mastermind बता रही है, डूंगरपुर से फरार हो गया।

जांच एजेंसियों का दावा है कि वह गिरफ्तारी से बचने के लिए लगातार अपने ठिकाने बदल रहा था। इसके बाद डूंगरपुर पुलिस की Cyber Cell और Special Team ने तकनीकी सुरागों के आधार पर उसकी तलाश शुरू की।

पुलिस के अनुसार, टीम ने लगभग 1,300 किलोमीटर तक उसका पीछा किया और आखिरकार उसे पंजाब के लुधियाना रेलवे स्टेशन से गिरफ्तार कर लिया। पुलिस का कहना है कि गिरफ्तारी के बाद पूछताछ और तकनीकी जांच से नेटवर्क में कथित रूप से शामिल अन्य लोगों की पहचान हुई।

‘Farzi’ से मिला आइडिया?

इस मामले का सबसे ज्यादा चर्चा में आया पहलू Shahid Kapoor की वेब सीरीज ‘Farzi’ है।

डूंगरपुर पुलिस के अनुसार, पूछताछ में आरोपियों ने कथित तौर पर बताया कि नकली भारतीय करेंसी तैयार करने का विचार उन्हें इसी वेब सीरीज से मिला। पुलिस का दावा है कि नेटवर्क से जुड़े एक आरोपी ने YouTube और Photoshop के जरिए नकली नोट तैयार करने की प्रक्रिया सीखी।

यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि किसी फिल्म या वेब सीरीज से प्रेरित होने का पुलिस का दावा जांच में सामने आई जानकारी है। अदालत में आरोपों और प्रत्येक आरोपी की भूमिका का अंतिम निर्धारण अलग प्रक्रिया के तहत होगा।

अलग-अलग राज्यों तक पहुंची कथित नेटवर्क की कड़ियां

जांच के दौरान पुलिस ने कथित नेटवर्क से जुड़े कई लोगों को अलग-अलग राज्यों से गिरफ्तार किया।

पुलिस के मुताबिक, हरियाणा के अंबाला निवासी आनंद राजपूत पर रवि मिश्रा को नकली नोट बनाने की कथित ट्रेनिंग देने और कागज की व्यवस्था में मदद करने का आरोप है।

इसी तरह उत्तर प्रदेश के कानपुर से मोहम्मद आरिफ को गिरफ्तार किया गया। पुलिस का आरोप है कि वह Telegram पर ‘Ankit Paper Seller’ नाम से चैनल संचालित करता था और कथित तौर पर नकली नोट तैयार करने में इस्तेमाल होने वाला कागज उपलब्ध कराता था।

इसके अलावा छत्तीसगढ़ के दुर्ग निवासी तरुण मालेकर पर ₹500 के नोटों से संबंधित डिजिटल डिजाइन/PSD files उपलब्ध कराने का आरोप है। इन भूमिकाओं की पुष्टि फिलहाल पुलिस जांच के स्तर पर है।

नकली नोटों की Supply Chain की जांच

पुलिस की जांच अब केवल छह गिरफ्तारियों तक सीमित नहीं है। अधिकारी यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि कथित तौर पर तैयार किए गए नकली नोटों की कुल मात्रा कितनी थी, उन्हें कहां-कहां पहुंचाया गया और क्या इस नेटवर्क में और लोग भी शामिल थे।

जांचकर्ताओं के सामने यह भी अहम सवाल है कि शुरुआती बरामदगी में मिले नोटों के अलावा कितनी कथित नकली मुद्रा बाजार में पहुंच चुकी हो सकती है।

इसी कारण पुलिस डिजिटल संपर्कों, आरोपियों के बीच कथित लेनदेन और अन्य राज्यों में उनके संपर्कों की भी जांच कर रही है।

Cyber Cell की भूमिका अहम

इस कार्रवाई में डूंगरपुर पुलिस की Cyber Cell की भूमिका भी महत्वपूर्ण बताई गई है। पुलिस के मुताबिक, तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर मुख्य आरोपी की गतिविधियों को ट्रैक किया गया और उसके लगातार ठिकाने बदलने के बावजूद उसे पकड़ने में सफलता मिली।

अब यही डिजिटल जांच यह पता लगाने में मदद कर सकती है कि कथित नेटवर्क के सदस्य एक-दूसरे से कैसे संपर्क में थे और नकली मुद्रा तैयार करने तथा उसकी आपूर्ति से जुड़े काम को किस तरह coordinate किया जाता था।

छह गिरफ्तारियां, लेकिन जांच अभी बाकी

डूंगरपुर पुलिस के मुताबिक, अब तक गिरफ्तार छह आरोपियों में रवि कुमार मिश्रा, आनंद राजपूत, मोहम्मद आरिफ, तरुण मालेकर, भावेश खटीक और नयन जोशी शामिल हैं।

पुलिस का कहना है कि इन गिरफ्तारियों से कथित अंतरराज्यीय नेटवर्क की कई कड़ियां सामने आई हैं। हालांकि, किस आरोपी की वास्तविक भूमिका क्या थी, नेटवर्क ने कुल कितनी नकली मुद्रा तैयार की और इसे कहां circulate किया गया, इन सवालों पर जांच अभी जारी है।

यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि गिरफ्तार किए गए सभी लोग फिलहाल आरोपी हैं, दोष सिद्ध नहीं हुआ है। उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों का अंतिम फैसला अदालत में उपलब्ध साक्ष्यों और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर होगा।

आगे पुलिस की नजर किन सवालों पर?

अब जांच के अगले चरण में पुलिस मुख्य रूप से तीन चीजों पर ध्यान दे सकती है—नकली नोटों का पूरा नेटवर्क, कथित supply chain और संभावित circulation।

अगर जांच में यह साबित होता है कि नकली नोट कई राज्यों तक पहुंचाए गए थे, तो पुलिस को इस नेटवर्क के अन्य संभावित सदस्यों तक पहुंचने के लिए जांच का दायरा और बढ़ाना पड़ सकता है।

फिलहाल डूंगरपुर पुलिस की कार्रवाई ने एक ऐसे कथित नेटवर्क का खुलासा किया है, जिसकी कड़ियां कई राज्यों तक जुड़ी होने का दावा किया जा रहा है और जिसकी शुरुआत पुलिस के अनुसार एक लोकप्रिय crime web series से मिले कथित आइडिया से हुई।