गोरखपुर में नेपाल और महराजगंज से आ रहे पानी ने राप्ती नदी को उफान पर ला दिया है। महानगर के बहरामपुर सहित तीन गांवों में नदी का पानी घुस गया है।
जलस्तर बढ़ने से घरों में फंसे लोगों को निकालने में दिक्कत हुई, जिसके बाद प्रशासन ने प्रयागराज से सात स्टीमर मंगवाकर राहत कार्य शुरू किया।
सरयू ने भी धारण किया विकराल रूप
बड़हलगंज के कछार इलाके में राप्ती का साथ पाकर सरयू नदी भी खतरनाक होती जा रही है। यहां भी घरों में पानी घुसने लगा है।
बरहज में सरयू नदी खतरे के निशान से 1.50 मीटर ऊपर बह रही है। हालांकि सुबह से शाम तक इसके जलस्तर में पांच सेंटीमीटर की कमी दर्ज की गई।
बाढ़ प्रभावित गांवों की संख्या पर अलग-अलग दावे
स्थानीय प्रशासन के अनुसार जिले में 35 गांव बाढ़ से प्रभावित हुए हैं। वहीं एक अन्य रिपोर्ट में यह संख्या 57 बताई गई है, जिसमें गोला तहसील के 42, सदर के आठ और बांसगांव के सात गांव शामिल हैं।
गोला तहसील क्षेत्र सबसे अधिक प्रभावित बताया जा रहा है। सरयू नदी के पानी से यहां लोगों को ज्यादा नुकसान झेलना पड़ रहा है।
विशेषज्ञ बोले, नदी किनारे न जाएं
आपदा विशेषज्ञ गौतम गुप्ता ने कहा कि नदियों के पानी में वेग सामान्य से कहीं ज्यादा है। उन्होंने बताया कि इसी वजह से सभी को अलर्ट पर रखा गया है।
गुप्ता ने चेतावनी दी कि किसी भी हाल में कोई व्यक्ति नदियों के किनारे न जाए। प्रशासन ने गांवों में मुनादी कराकर लोगों को सतर्क किया है।
राहत सामग्री का वितरण शुरू
केंद्रीय राज्यमंत्री कमलेश पासवान ने बाढ़ प्रभावित 800 परिवारों को राहत सामग्री की किट बांटी। प्रशासन का कहना है कि जरूरतमंद परिवारों तक मदद पहुंचाने का काम लगातार जारी रहेगा।
नदियों के जलस्तर पर प्रशासन लगातार नजर बनाए हुए है। स्थिति में सुधार न होने पर और गांवों को प्रभावित क्षेत्र में शामिल किया जा सकता है।