गोरखपुर में IAS बनने का सपना लिए चाय बेच रही तीन बहनों से DM दीपक मीणा ने रविवार रात फोन पर बात की। उन्होंने परिवार का हालचाल लिया और पैरालाइज पिता की सेहत के बारे में पूछा।
DM ने बहनों को सोमवार सुबह 10 बजे अपने आवास पर बुलाया है और हर संभव मदद का भरोसा दिया। बड़ी बहन वर्तिका उपाध्याय ने बताया कि रात करीब 9 बजे DM के ऑफिस से फोन आया और कहा गया कि साहब मिलना चाहते हैं।
दैनिक भास्कर की खबर के बाद मिली मदद
कुछ समय पहले दैनिक भास्कर ने इन बहनों के संघर्ष की कहानी प्रमुखता से छापी थी। उसी रिपोर्ट के बाद प्रशासन हरकत में आया और मदद के लिए आगे बढ़ा।
पिता की बीमारी से बिगड़े हालात
महराजगंज निवासी वंदिता उपाध्याय ने बताया कि परिवार बरगदवां में किराए के मकान में रहता है। पिता रामसकल उपाध्याय पहले रिलायंस लाइफ एंड इंश्योरेंस कंपनी में ब्रांच मैनेजर थे।
2017 में पिता पैरालाइज हो गए, जिसके बाद उनकी नौकरी छूट गई। मां माधुरी हाउसवाइफ हैं और घर में कमाई का कोई स्थायी जरिया नहीं बचा।
वंदिता ने ट्यूशन पढ़ाना शुरू किया और छोटी-मोटी नौकरी भी की, फिर भी घर का खर्च पूरा नहीं हो पाता था। आर्थिक तंगी का असर बड़े भाई 26 वर्षीय शिवम की पढ़ाई पर भी पड़ा, जो 12वीं के बाद पढ़ाई छोड़ चुके हैं और अब घर से टेलीकॉलर का काम करते हैं।
8 हजार से शुरू हुआ 'बिलीवर बिस्ट्रो'
करीब चार साल पहले तीनों बहनों ने चाय की दुकान खोलने की योजना बनाई थी, लेकिन मां ने रिश्तेदारों के मजाक बनाने के डर से मना कर दिया था। चार महीने पहले बहनों ने 8 हजार रुपये से DDU गेट के सामने चाय का स्टॉल खोला और उसका नाम 'बिलीवर बिस्ट्रो' रखा।
शुरुआत में अजीब लगा क्योंकि वे उसी कॉलेज में पढ़ती थीं, पर धीरे-धीरे ग्राहक बढ़ने लगे। मुनाफा होने पर चाय के साथ मैगी भी मेन्यू में जोड़ दी गई।
रात में पढ़ाई, दिन में दुकान
तीनों बहनें दिन भर दुकान चलाती हैं और रात 12 से 2 बजे तक पढ़ाई करती हैं। बड़ी बहन वर्तिका सेल्फ स्टडी से IAS की तैयारी कर रही हैं, वंदिता IPS बनना चाहती हैं और अवंतिका का लक्ष्य IAS है।
मां माधुरी ने कहा,