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गोरखपुर में अवैध ब्लड सप्लाई का पर्दाफाश, कार से 100 यूनिट PRBC बरामद; दो गिरफ्तार

रामगढ़ताल पुलिस और औषधि विभाग की संयुक्त कार्रवाई में मुरादाबाद से लाई जा रही रक्त की खेप पकड़ी गई। रक्त की गुणवत्ता पर संदेह के बाद नमूने जांच के लिए सुरक्षित किए गए हैं। बरामद रक्त के दूषित होने की अभी पुष्टि नहीं हुई है। फिलहाल उसकी गुणवत्ता की जांच होनी बाकी है। इसलिए खबर में इसे संदिग्ध गुणवत्ता वाला रक्त कहना अधिक सटीक होगा।

गोरखपुर में अवैध ब्लड सप्लाई का पर्दाफाश, कार से 100 यूनिट PRBC बरामद; दो गिरफ्तार
प्रतीकात्मक तस्वीर, AI से बनाई गई। यह वास्तविक घटना का चित्रण नहीं है।

गोरखपुर में अवैध रूप से रक्त की खरीद-बिक्री करने वाले कथित अंतरराज्यीय नेटवर्क का खुलासा हुआ है। रामगढ़ताल पुलिस और औषधि विभाग की संयुक्त टीम ने मंगलवार, 3 नवंबर को भगत चौराहे के पास एक कार को रोककर तलाशी ली। कार से रेड ब्लड सेल्स (PRBC) के 100 बैग बरामद किए गए। इस मामले में मुरादाबाद के दो लोगों को गिरफ्तार किया गया है।

कार में दो डिब्बों के अंदर रखे थे 100 ब्लड बैग
पुलिस के मुताबिक, टीम ने एलआईसी कार्यालय के पास उत्तराखंड नंबर प्लेट वाली सफेद ऑल्टो कार को रोका। तलाशी के दौरान पिछली सीट पर रखे गत्ते के डिब्बे से 40 ब्लड बैग, जबकि कार की डिक्की में रखे थर्माकोल के डिब्बे से 60 ब्लड बैग मिले।

इस तरह कुल 100 यूनिट PRBC बरामद हुईं। पुलिस ने कार में सवार फहीम अहमद और ताज गुड्डू, दोनों निवासी मुरादाबाद, को गिरफ्तार कर लिया।

सस्ते में खरीदकर महंगे दाम पर बेचने का आरोप
पुलिस की पूछताछ में आरोपियों ने कथित तौर पर बताया कि वे मुरादाबाद के एसएस चैरिटेबल ब्लड बैंक से कम कीमत पर रक्त लेते थे और अलग-अलग ब्लड बैंकों की मांग के अनुसार उसे अधिक कीमत पर बेचते थे।

पुलिस के अनुसार, बरामद खेप मुरादाबाद से गोरखपुर लाई जा रही थी और इसे शहर के आरोग्य ब्लड बैंक में पहुंचाया जाना था। हालांकि, इस सप्लाई व्यवस्था और संबंधित संस्थानों की भूमिका की जांच अभी जरूरी है। केवल आरोपियों के कथित बयान के आधार पर किसी ब्लड बैंक की संलिप्तता को साबित नहीं माना जा सकता।

रक्त की गुणवत्ता पर संदेह, जांच के लिए नमूने सुरक्षित
इस मामले का सबसे गंभीर पहलू बरामद रक्त की गुणवत्ता है। औषधि निरीक्षक श्रीध्वजेश्वर शुक्ला ने दोनों डिब्बों से एक-एक यूनिट का नमूना लेकर जांच के लिए सुरक्षित किया है।

अभी यह पुष्टि नहीं हुई है कि सभी 100 यूनिट रक्त दूषित थे या निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं थे। नमूनों की जांच से ही पता चलेगा कि रक्त सुरक्षित था या नहीं। यदि रक्त संक्रमित अथवा अनुचित तरीके से संग्रहित या परिवहन किया गया पाया जाता है, तो इससे मरीजों के स्वास्थ्य को गंभीर खतरा हो सकता है।

पुलिस ने किन धाराओं में की कार्रवाई?
पुलिस ने दोनों आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(2) और औषधि एवं प्रसाधन अधिनियम की धारा 18/27 के तहत कार्रवाई की है। जिस कार से रक्त की खेप ले जाई जा रही थी, उसे भी जब्त कर लिया गया है।

अब जांच में यह पता लगाने की कोशिश होगी कि रक्त कहां से प्राप्त किया गया, किन-किन स्थानों पर इसकी सप्लाई की गई और इस कथित नेटवर्क में अन्य कौन लोग शामिल हैं।