गुजरात के समान नागरिक संहिता (यूसीसी) विधेयक को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की मंजूरी मिल गई है। राज्य सरकार अब इसके नियमों की आधिकारिक घोषणा करेगी, जिसके बाद यह कानून पूरे राज्य में लागू हो जाएगा।
इस मंजूरी के साथ ही गुजरात, उत्तराखंड के बाद यूसीसी लागू करने वाला देश का दूसरा राज्य बन गया है। उत्तराखंड ने सबसे पहले यह कानून पास किया था।
विधानसभा से गजट तक का सफर
गुजरात विधानसभा ने मार्च 2026 में साढ़े सात घंटे की बहस के बाद यह विधेयक पारित किया था। राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद इसे गुजरात अधिनियम संख्या 15/2026 के रूप में अधिसूचित कर राज्य के सरकारी गजट में प्रकाशित किया गया है।
कानून में क्या प्रावधान हैं
नए कानून के तहत हर विवाह का 60 दिन के भीतर पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा। लिव-इन रिश्तों में रह रहे जोड़ों को भी 30 दिन के भीतर पंजीकरण कराना होगा।
पंजीकरण न कराने पर 10,000 रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। लिव-इन रिश्ता खत्म होने पर भी प्रशासन को सूचना देनी होगी, और ऐसे रिश्तों से जन्मे बच्चों को वैध संतान माना जाएगा।
कानून में बहुविवाह पर पूरी तरह रोक लगाई गई है। जबरन शादी कराने पर सात साल तक की सजा का प्रावधान रखा गया है।
अदालती आदेश के बिना किसी और तरीके से तलाक लेने पर तीन साल तक की जेल हो सकती है। कानून संपत्ति और वारसाई के मामलों में महिलाओं को पुरुषों के बराबर अधिकार देता है।
राज्य के आदिवासी समाज को इस कानून की जोगवाइयों से छूट दी गई है।
सरकार और विपक्ष आमने-सामने
मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने कहा कि यह कानून सभी को बराबर अधिकार देता है। कांग्रेस और आम आदमी पार्टी ने विधेयक पारित होने के दौरान इसका विरोध किया था।
विपक्ष का कहना है कि यह कानून व्यक्तिगत और धार्मिक पहचान को प्रभावित कर सकता है। कुछ विपक्षी नेताओं ने इसे