हरियाणा में बिजली वितरण के निजीकरण को लेकर कर्मचारियों का आंदोलन अब आम लोगों की परेशानी में बदलता दिखाई दे रहा है। बिजली कर्मचारियों और इंजीनियरों की तीन दिवसीय प्रदेशव्यापी हड़ताल के कारण गुरुग्राम, फरीदाबाद और नूंह समेत कई इलाकों में बिजली आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित हुई है। कई जगह लंबे समय तक बिजली गुल रहने से घरों में पानी की समस्या पैदा हुई, जबकि औद्योगिक क्षेत्रों में उत्पादन भी प्रभावित हुआ है।
कर्मचारी 22, 23 और 24 अक्टूबर 2026 को हड़ताल पर हैं। उनका विरोध हरियाणा विद्युत नियामक आयोग यानी HERC के उस फैसले के खिलाफ है, जिसके तहत गुरुग्राम और नूंह में निजी कंपनी Eleven Power Private Limited को 25 साल का समानांतर बिजली वितरण लाइसेंस दिया गया है।
गुरुग्राम में हजारों शिकायतें, कई इलाकों में अंधेरा
हड़ताल का सबसे गंभीर असर गुरुग्राम में दिखाई दिया। रिपोर्ट के अनुसार, हड़ताल शुरू होने के बाद शुरुआती करीब 12 घंटों में ही बिजली विभाग को 3,000 से ज्यादा बिजली कटौती संबंधी शिकायतें मिलीं। कई रिहायशी और औद्योगिक इलाकों में लंबे समय तक सप्लाई बहाल नहीं हो सकी।
गुरुग्राम के सेक्टर 5, सेक्टर 7, सेक्टर 10A, सेक्टर 52, पालम विहार और दौलताबाद जैसे इलाकों से बिजली बाधित होने की खबरें सामने आईं। कई स्थानों पर फॉल्ट होने के बाद भी मरम्मत में देरी हुई। इनवर्टर की बैटरी खत्म होने के बाद लोगों को और ज्यादा परेशानी का सामना करना पड़ा।
बिजली की कटौती का सीधा असर पानी की सप्लाई पर भी पड़ा। कई रिहायशी इलाकों में पानी की मोटर और पंप नहीं चल पाए, जिससे लोगों के घरों में जमा पानी खत्म होने लगा।
फरीदाबाद में भी सड़क पर उतरे लोग
फरीदाबाद में भी बिजली संकट को लेकर लोगों में नाराजगी देखने को मिली। रिपोर्टों के अनुसार, NIT-2 क्षेत्र में लंबे समय तक बिजली नहीं आने के बाद लोगों ने सड़क पर आकर विरोध किया। बिजली कटौती की वजह से वहां पानी की सप्लाई भी प्रभावित हुई। पुलिस मौके पर पहुंची और प्रदर्शनकारियों को समझाकर रास्ता खुलवाया।
फरीदाबाद के ग्रामीण और अन्य इलाकों में भी बिजली आपूर्ति बाधित होने की खबरें सामने आई हैं। ऐसे में लोगों की चिंता सिर्फ बिजली तक सीमित नहीं है, बल्कि पानी, घरेलू कामकाज और छोटे कारोबार भी प्रभावित हो रहे हैं।
औद्योगिक क्षेत्रों में उत्पादन पर असर
गुरुग्राम NCR का बड़ा औद्योगिक और कॉरपोरेट केंद्र है। इसलिए बिजली संकट का असर घरों के साथ-साथ फैक्ट्रियों और औद्योगिक इकाइयों पर भी पड़ा है।
सेक्टर-37, कादीपुर और बसई जैसे औद्योगिक इलाकों में बिजली आपूर्ति बाधित होने की वजह से मशीनें बंद होने और उत्पादन प्रभावित होने की रिपोर्ट है। कई उद्योगों ने जनरेटर के जरिए काम जारी रखने की कोशिश की, लेकिन लंबे समय तक ऐसा करना महंगा पड़ सकता है।
उद्योग जगत ने चिंता जताई है कि यदि बिजली आपूर्ति लंबे समय तक सामान्य नहीं हुई तो उत्पादन, तैयार माल की उपलब्धता और सप्लाई की समयसीमा पर असर पड़ सकता है। बड़े औद्योगिक नुकसान की आशंका भी जताई जा रही है।
आखिर निजीकरण को लेकर विवाद क्या है?
पूरे आंदोलन की जड़ HERC के समानांतर वितरण लाइसेंस के फैसले में है।
आयोग ने गुरुग्राम और नूंह में Eleven Power Private Limited को 25 साल के लिए समानांतर बिजली वितरण लाइसेंस देने का फैसला किया है। इसका मतलब यह है कि निजी कंपनी को मौजूदा सरकारी बिजली वितरण व्यवस्था के समानांतर बिजली वितरण का अधिकार मिल सकता है।
बिजली कर्मचारी संगठनों का आरोप है कि गुरुग्राम जैसे उच्च राजस्व वाले क्षेत्रों को निजी कंपनी के लिए खोलने से सरकारी बिजली वितरण निगम, यानी DHBVN की आर्थिक स्थिति प्रभावित हो सकती है।
कर्मचारियों का तर्क है कि अगर निजी कंपनी मुख्य रूप से अधिक लाभ वाले उपभोक्ताओं और इलाकों पर ध्यान देगी, तो ग्रामीण और कृषि क्षेत्रों की जिम्मेदारी सरकारी निगमों पर अधिक रह सकती है।
कर्मचारियों को नौकरी और उपभोक्ताओं को महंगी बिजली का डर
कर्मचारी संगठनों ने निजीकरण के खिलाफ कई सवाल उठाए हैं। उनका दावा है कि इस व्यवस्था से भविष्य में करीब 40 हजार कर्मचारियों और इंजीनियरों के रोजगार पर असर पड़ सकता है।
उनका यह भी आरोप है कि निजी क्षेत्र के आने से आम उपभोक्ताओं, किसानों और छोटे कारोबारियों पर बिजली की लागत बढ़ने का खतरा है। हालांकि, ये कर्मचारी संगठनों की आशंकाएं और दावे हैं, इन्हें भविष्य का निश्चित परिणाम नहीं माना जा सकता।
कर्मचारियों का संयुक्त संघर्ष मोर्चा मांग कर रहा है कि निजी कंपनी को दिया गया समानांतर लाइसेंस वापस लिया जाए और बिजली वितरण व्यवस्था में निजीकरण की प्रक्रिया को आगे न बढ़ाया जाए।
सरकार ने क्या कहा?
बिजली संकट के बीच हरियाणा सरकार पर भी दबाव बढ़ा है। ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने कर्मचारियों से हड़ताल खत्म कर बातचीत और कानूनी रास्ते पर आगे बढ़ने की अपील की है।
सरकार का कहना है कि निजी कंपनी को लाइसेंस देने का फैसला सीधे राज्य सरकार ने नहीं, बल्कि स्वायत्त नियामक संस्था HERC ने लिया है। सरकार ने इस फैसले को Appellate Tribunal for Electricity यानी APTEL के सामने चुनौती देने की बात कही है।
अनिल विज ने कर्मचारियों को यह भी भरोसा दिलाया है कि सरकार कर्मचारियों के हितों के खिलाफ नहीं है और किसी कर्मचारी को नौकरी से हटाने की योजना नहीं है। उन्होंने आंदोलन खत्म कर कानूनी लड़ाई में सरकार के साथ आने की अपील की है।
बातचीत से नहीं निकला समाधान
गुरुग्राम के उपायुक्त उत्तम सिंह ने कर्मचारियों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर हड़ताल खत्म कराने की कोशिश की, लेकिन बातचीत से तत्काल कोई समाधान नहीं निकल सका। इसके बाद हड़ताल जारी रही और बिजली व्यवस्था पर दबाव बना रहा।
कर्मचारी संगठन अपने फैसले पर कायम हैं और उनका कहना है कि जब तक समानांतर वितरण लाइसेंस वापस नहीं लिया जाता, आंदोलन जारी रखा जाएगा।
सिर्फ गुरुग्राम-फरीदाबाद नहीं, कई जिलों पर असर
यह आंदोलन केवल गुरुग्राम और फरीदाबाद तक सीमित नहीं रहा। रिपोर्टों के मुताबिक, हड़ताल से हरियाणा के करीब 15 जिलों में बिजली सेवाएं प्रभावित हुई हैं। कई जगह फॉल्ट समय पर ठीक नहीं होने के कारण लंबे पावर कट की शिकायतें सामने आई हैं।
नूंह के पुन्हाना, नगीना और फिरोजपुर झिरका जैसे इलाकों में भी बिजली आपूर्ति प्रभावित हुई। कुछ अन्य जिलों में भी लंबे कट और बिजली संबंधी शिकायतों की जानकारी सामने आई है।
आंदोलन को मिला दूसरे संगठनों का समर्थन
बिजली कर्मचारियों के आंदोलन को कई कर्मचारी और किसान संगठनों का समर्थन मिला है। संयुक्त किसान मोर्चा, सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा और CITU समेत विभिन्न संगठनों ने प्रदर्शन में समर्थन जताया है।
समर्थन करने वाले संगठनों का कहना है कि बिजली जैसी आवश्यक सेवा को लेकर होने वाले फैसलों में कर्मचारियों और उपभोक्ताओं के हितों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
24 अक्टूबर के बाद क्या होगा?
फिलहाल घोषित कार्यक्रम के अनुसार हड़ताल 24 अक्टूबर तक है। लेकिन कर्मचारी संगठनों ने संकेत दिया है कि यदि उनकी मांगों पर ठोस फैसला नहीं हुआ तो आंदोलन को आगे बढ़ाया जा सकता है।
यानी आने वाले दिनों में सबसे बड़ा सवाल यही रहेगा कि HERC के समानांतर लाइसेंस पर सरकार और कर्मचारी संगठनों के बीच कोई समझौता होता है या नहीं।
दूसरी ओर, आम लोगों के लिए तत्काल चिंता बिजली और पानी की सप्लाई सामान्य होने की है। औद्योगिक इकाइयां भी जल्द से जल्द बिजली व्यवस्था बहाल होने की उम्मीद कर रही हैं, क्योंकि लंबे समय तक सप्लाई बाधित रहने से उत्पादन और कारोबार पर सीधा असर पड़ सकता है।
आम लोगों के लिए सबसे बड़ी परेशानी
यह पूरा विवाद भले ही निजीकरण बनाम सरकारी बिजली व्यवस्था की बहस से जुड़ा हो, लेकिन फिलहाल इसका सबसे सीधा असर आम उपभोक्ताओं पर पड़ रहा है।
बिजली जाने से पानी की मोटर बंद हो रही है, घरों में इनवर्टर जवाब दे रहे हैं, छोटे कारोबार प्रभावित हो रहे हैं और उद्योगों में मशीनें रुक रही हैं। यही वजह है कि कर्मचारियों का आंदोलन अब केवल विभागीय या नीतिगत मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि जनजीवन से जुड़ा बड़ा संकट बनता जा रहा है।
आगे समाधान इस बात पर निर्भर करेगा कि सरकार, HERC और कर्मचारी संगठन समानांतर वितरण लाइसेंस के मुद्दे पर किस तरह का रास्ता निकालते हैं।