मध्य प्रदेश के जबलपुर जिले के मझौली में दुर्गा प्रतिमा विसर्जन के दौरान एक दर्दनाक बिजली हादसा हो गया। बुधवार देर रात विसर्जन के लिए जा रही श्रद्धालुओं से भरी ट्रैक्टर-ट्रॉली हाईटेंशन बिजली लाइन की चपेट में आ गई। करंट फैलने के बाद दो युवकों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि कई अन्य लोग झुलस गए। हादसे के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई और स्थानीय लोगों में नाराजगी भी देखने को मिली।
पुलिस के अनुसार मृतकों की पहचान विकास राजपूत (22) और प्रिंस चौहान (23) के रूप में हुई है। दोनों ट्रैक्टर पर सवार थे। घायलों को उपचार के लिए अस्पताल भेजा गया है और उनमें से एक की हालत गंभीर बताई गई है।
आधी रात को हुआ दर्दनाक हादसा
बताया गया है कि घटना रात करीब 12:04 बजे मझौली थाना क्षेत्र में हुई। 50 से अधिक लोग दुर्गा प्रतिमा को लेकर सिविल लाइन पथ से नरीली तालाब की ओर विसर्जन के लिए जा रहे थे।
जुलूस में शामिल ट्रैक्टर-ट्रॉली के रास्ते में बिजली का एक तार नीचे लटक रहा था। प्रत्यक्ष जानकारी के मुताबिक, ट्रैक्टर-ट्रॉली को रास्ते से निकालने के लिए कुछ लोगों ने तार को डंडे की मदद से ऊपर उठाने की कोशिश की। इसी दौरान यह तार पास से गुजर रही हाईटेंशन लाइन के संपर्क में आ गया। करंट प्रवाहित होने के बाद तार टूटकर ट्रैक्टर-ट्रॉली पर जा गिरा।
ट्रैक्टर-ट्रॉली में फैल गया करंट
हाईटेंशन तार के संपर्क में आते ही ट्रैक्टर-ट्रॉली में करंट फैल गया। वहां मौजूद लोगों को संभलने का मौका भी नहीं मिला और कई लोग बिजली की चपेट में आ गए।
हादसे में ट्रैक्टर पर बैठे विकास राजपूत और प्रिंस चौहान की मौके पर ही मौत हो गई। कई अन्य श्रद्धालु झुलस गए। पुलिस ने घायलों को अस्पताल पहुंचाए जाने की पुष्टि की है। शुरुआती पुलिस जानकारी में छह लोगों के घायल होने की बात सामने आई है, जबकि अन्य स्थानीय रिपोर्टों में इससे ज्यादा लोगों के झुलसने का उल्लेख है।
हादसे के बाद मचा हड़कंप
घटना के तुरंत बाद जुलूस में अफरा-तफरी मच गई। आसपास मौजूद लोगों ने घायलों को अस्पताल पहुंचाने में मदद की। पुलिस और प्रशासन को घटना की सूचना दी गई और इलाके में स्थिति संभाली गई।
मृतकों के शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। पुलिस ने मामला दर्ज कर हादसे की परिस्थितियों की जांच शुरू कर दी है।
बिजली के लटकते तार को लेकर उठे सवाल
हादसे के बाद स्थानीय लोगों ने बिजली व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका दावा है कि इलाके में बिजली के तार पहले से नीचे लटके हुए थे और इस समस्या के बारे में संबंधित अधिकारियों तथा आयोजन से जुड़े लोगों को जानकारी दी गई थी।
स्थानीय लोगों के मुताबिक, तारों को दुरुस्त कराने की मांग भी पहले उठाई गई थी, लेकिन इस दिशा में पर्याप्त कार्रवाई नहीं हुई। हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है और पुलिस जांच के बाद ही जिम्मेदारी तय होने की स्थिति स्पष्ट होगी।
यही पहलू अब जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया है कि बिजली लाइन की स्थिति क्या थी, तार इतना नीचे क्यों था और विसर्जन जुलूस के दौरान सुरक्षा व्यवस्था के लिए क्या इंतजाम किए गए थे।
घटना के बाद लोगों में नाराजगी
हादसे में दो युवकों की मौत की खबर फैलते ही स्थानीय लोगों में गुस्सा बढ़ गया। गुरुवार सुबह मझौली में लोगों के सड़क पर जुटने और आवागमन प्रभावित होने की जानकारी सामने आई।
पुलिस के मुताबिक, बाद में अधिकारियों और स्थानीय लोगों के बीच बातचीत के जरिए स्थिति को संभाल लिया गया। वहीं कुछ रिपोर्टों में इसे चक्काजाम और कार्रवाई की मांग से जोड़कर बताया गया है।
स्थानीय लोगों की मांग है कि हादसे की जिम्मेदारी तय की जाए और भविष्य में धार्मिक जुलूसों के रास्तों पर बिजली की लाइनों को लेकर पहले से सुरक्षा जांच सुनिश्चित की जाए।
अब जांच में किन सवालों के जवाब तलाशे जाएंगे?
जबलपुर पुलिस और प्रशासन के सामने अब कई अहम सवाल हैं। सबसे पहले यह पता लगाया जाएगा कि हाईटेंशन लाइन की स्थिति क्या थी और तार नीचे क्यों लटक रहा था।
इसके अलावा जांच में यह भी देखा जाएगा कि विसर्जन जुलूस के लिए निर्धारित मार्ग का पहले से निरीक्षण हुआ था या नहीं। बिजली विभाग को लाइन के संबंध में कोई शिकायत मिली थी या नहीं, और यदि मिली थी तो उस पर क्या कार्रवाई की गई—इन पहलुओं की भी जांच महत्वपूर्ण होगी।
इसी तरह ट्रैक्टर-ट्रॉली पर मौजूद लोहे के ढांचे या अन्य सामान की ऊंचाई और उसके बिजली लाइन के संपर्क में आने की परिस्थितियों को भी जांच में शामिल किया जा सकता है।
प्रशासन के सामने सुरक्षा की बड़ी चुनौती
दुर्गा प्रतिमा विसर्जन जैसे आयोजनों में बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर निकलते हैं। ट्रैक्टर-ट्रॉली, ऊंची प्रतिमाएं, सजावट और बिजली की लाइनें कई बार गंभीर जोखिम पैदा कर सकती हैं।
जबलपुर की यह घटना एक बार फिर दिखाती है कि ऐसे जुलूसों के दौरान रूट की सुरक्षा जांच, बिजली लाइनों की ऊंचाई और आपातकालीन बिजली कटौती की व्यवस्था कितनी महत्वपूर्ण है।
अगर किसी मार्ग पर हाईटेंशन लाइन या नीचे लटके तार मौजूद हों, तो जुलूस शुरू होने से पहले संबंधित विभागों के बीच समन्वय और सुरक्षा निरीक्षण जरूरी हो जाता है।
दो परिवारों में पसरा मातम
हादसे में जान गंवाने वाले विकास राजपूत और प्रिंस चौहान के परिवारों के लिए धार्मिक उत्सव की रात अचानक मातम में बदल गई। जिस जुलूस में लोग श्रद्धा और उत्साह के साथ शामिल हुए थे, वही कुछ ही क्षणों में एक दर्दनाक हादसे में बदल गया।
अब परिवार और स्थानीय लोग जांच के नतीजे और जिम्मेदारी तय होने का इंतजार कर रहे हैं।
आगे क्या होगा?
फिलहाल पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। मृतकों के शवों का पोस्टमार्टम कराया जा रहा है और घायलों का उपचार जारी है।
जांच में बिजली लाइन की तकनीकी स्थिति, घटनास्थल की परिस्थितियों, जुलूस के मार्ग और कथित लापरवाही से जुड़े पहलुओं को देखा जाएगा। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि हादसे के लिए किसी व्यक्ति या विभाग की जिम्मेदारी तय होती है या नहीं।
फिलहाल सबसे बड़ी प्राथमिकता घायलों का इलाज और ऐसी घटना दोबारा न हो, इसके लिए जरूरी सुरक्षा इंतजाम सुनिश्चित करना है।