दिल्ली की Jamia Millia Islamia University में छात्र संघ की बहाली और चुनाव कराने की मांग को लेकर चल रहा आंदोलन शुक्रवार को और ज्यादा राजनीतिक और प्रशासनिक तनाव में बदल गया। छात्रों के प्रदर्शन में समर्थन देने पहुंचे कांग्रेस सांसद इमरान मसूद को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में ले लिया। उनके साथ समाजवादी पार्टी सांसद मौलाना मोहिबुल्लाह नदवी को भी पुलिस ने हिरासत में लिया। रिपोर्टों के अनुसार, नदवी बाद में रिहा कर दिए गए।
पुलिस के अनुसार, दोनों सांसद विश्वविद्यालय परिसर में बिना अनुमति प्रवेश कर प्रदर्शन में शामिल होने की कोशिश कर रहे थे। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के हवाले से रिपोर्टों में कहा गया कि दोनों को परिसर के बाहर से preventive detention में लिया गया था। पुलिस ने यह भी कहा कि उस कार्रवाई में छात्रों को हिरासत में नहीं लिया गया। हालांकि, प्रदर्शन से जुड़े लोगों ने पुलिस पर छात्रों और नेताओं के साथ धक्का-मुक्की का आरोप लगाया है।
12 अक्टूबर से जारी है छात्र आंदोलन
जामिया में मौजूदा आंदोलन की शुरुआत 12 अक्टूबर 2026 से हुई थी। छात्र Jamia Millia Islamia Students’ Union (JMISU) को बहाल करने और छात्र संघ चुनाव के लिए स्पष्ट कार्यक्रम घोषित करने की मांग कर रहे हैं।
इसके अलावा प्रदर्शनकारियों की मांगों में कुछ छात्रों के खिलाफ की गई disciplinary action वापस लेना, कैंपस प्रशासन से जुड़े मुद्दों पर कार्रवाई और छात्र प्रतिनिधित्व बहाल करना शामिल है। कुछ छात्र इस मांग को लेकर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर भी हैं।
जामिया में निर्वाचित छात्र संघ लंबे समय से मौजूद नहीं है। रिपोर्टों के अनुसार, आखिरी छात्र संघ चुनाव 2005 में हुए थे और 2006 में छात्र संघ को भंग कर दिया गया था। अब छात्रों का कहना है कि विश्वविद्यालय में लोकतांत्रिक छात्र प्रतिनिधित्व दोबारा शुरू किया जाना चाहिए।
छात्रों के समर्थन में पहुंचे इमरान मसूद
कांग्रेस सांसद इमरान मसूद छात्रों से मिलने और उनकी मांगों के समर्थन में जामिया पहुंचे थे। उन्होंने छात्र संघ बहाली का समर्थन करते हुए कहा कि छात्रों की मांगों पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए।
मसूद ने यह भी कहा कि वह भारत की एकता के खिलाफ किसी भी नारे का समर्थन नहीं करते। कैंपस में सामने आए विवादित पोस्टरों के संबंध में उन्होंने पुलिस से कार्रवाई की मांग की और कहा कि ऐसे पोस्टरों के जरिए छात्र आंदोलन को कमजोर करने की कोशिश नहीं होनी चाहिए।
यह बयान ऐसे समय आया जब कैंपस में ‘Free Kashmir’ और ‘Free Sharjeel Imam’ जैसे संदेशों वाले पोस्टर/ग्रैफिटी को लेकर अलग विवाद खड़ा हो गया था। हालांकि, इन पोस्टरों को किसने लगाया और क्या उनका छात्र आंदोलन से संबंध था, यह अभी स्पष्ट नहीं है। छात्रों ने इन संदेशों से दूरी बनाने और जांच की मांग की है।
SP सांसद नदवी ने पुलिस कार्रवाई पर उठाए सवाल
समाजवादी पार्टी सांसद मौलाना मोहिबुल्लाह नदवी भी प्रदर्शनकारी छात्रों से मिलने जा रहे थे। पुलिस ने उन्हें भी हिरासत में लिया। नदवी ने आरोप लगाया कि पुलिस ने उनके साथ धक्का-मुक्की की।
हालांकि, पुलिस का पक्ष अलग है। पुलिस के मुताबिक दोनों सांसदों को बिना अनुमति परिसर में प्रवेश करने की कोशिश के कारण बाहर से preventive detention में लिया गया। इस तरह घटना को लेकर पुलिस और प्रदर्शन से जुड़े लोगों के दावों में अंतर सामने आया है।
कुल 10 लोगों की हिरासत की रिपोर्ट
Indian Express और Outlook की रिपोर्टों के अनुसार, शुक्रवार की कार्रवाई में 10 लोगों को हिरासत में लिया गया, जिनमें इमरान मसूद शामिल थे। नदवी की हिरासत और बाद में रिहाई की भी रिपोर्ट है।
पुलिस कार्रवाई के बाद जामिया के आसपास सुरक्षा बढ़ा दी गई। प्रदर्शनकारी छात्रों और पुलिस के बीच तनाव को देखते हुए विश्वविद्यालय के आसपास भारी सुरक्षा व्यवस्था की गई थी। घटनाक्रम ने छात्र आंदोलन को एक बार फिर राष्ट्रीय राजनीतिक बहस के केंद्र में ला दिया है।
विवादित पोस्टरों से बढ़ा राजनीतिक तापमान
छात्र संघ की मांग के बीच कैंपस में कथित ‘Free Kashmir’ और ‘Free Sharjeel Imam’ संदेश सामने आने से विवाद और बढ़ गया। कुछ रिपोर्टों में इन्हें दीवारों पर लिखे संदेश और पोस्टर बताया गया, जबकि प्रदर्शनकारियों ने आंदोलन को बदनाम करने की कोशिश का आरोप लगाया।
इमरान मसूद ने सार्वजनिक रूप से कहा कि कश्मीर भारत का अभिन्न हिस्सा है और उन्होंने ऐसे नारों का समर्थन नहीं किया। दूसरी ओर, छात्रों ने कहा है कि विवादित संदेशों की जांच होनी चाहिए और उन्हें उनके आंदोलन से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए।
इसलिए फिलहाल यह कहना उचित नहीं होगा कि इन विवादित पोस्टरों के पीछे प्रदर्शनकारी छात्र ही थे। जिम्मेदार व्यक्ति या समूह की पहचान जांच का विषय है।
विश्वविद्यालय ने बनाई हाई-Level Committee
जामिया प्रशासन ने आंदोलन को खत्म करने और छात्रों की मांगों पर बातचीत के लिए सात सदस्यीय High-Level Committee बनाई है। समिति को छात्रों से बातचीत करने, उनकी मांगों की समीक्षा करने और कैंपस में सामान्य स्थिति बहाल करने के उपाय सुझाने की जिम्मेदारी दी गई है।
समिति ने छात्रों से आंदोलन खत्म करने और बातचीत की प्रक्रिया में सहयोग करने की अपील भी की है। हालांकि, प्रदर्शनकारी अभी भी चुनाव की स्पष्ट तारीख और छात्र संघ की बहाली की मांग पर कायम हैं।
अब आगे क्या?
जामिया विवाद में अब तीन स्तरों पर घटनाक्रम महत्वपूर्ण होगा—छात्रों और प्रशासन के बीच बातचीत, छात्र संघ चुनाव की प्रक्रिया पर विश्वविद्यालय का फैसला और पुलिस कार्रवाई को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रिया।
फिलहाल छात्रों का आंदोलन पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। वहीं, सांसदों की हिरासत ने मामले को विश्वविद्यालय परिसर से निकालकर राष्ट्रीय राजनीतिक बहस तक पहुंचा दिया है।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि विवादित पोस्टरों और नारों को लेकर कई दावे सामने आए हैं, लेकिन उनकी जिम्मेदारी और आंदोलन से उनके संबंध पर अंतिम निष्कर्ष अभी नहीं आया है। इसी तरह सांसदों की हिरासत को लेकर पुलिस का कहना है कि यह preventive action था, जबकि प्रदर्शन समर्थकों ने इसे छात्रों की आवाज दबाने की कार्रवाई बताया है।
आने वाले दिनों में जामिया प्रशासन, दिल्ली पुलिस और प्रदर्शनकारी छात्रों के बीच बातचीत इस पूरे विवाद की दिशा तय कर सकती है।