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लद्दाख में सोनम वांगचुक के संस्थान की जमीन पर घमासान, 1076 कनाल आवंटन का मामला हाईकोर्ट में

Phyang Thang की जमीन पर प्रशासन ने आवंटन रद्द करने का बचाव किया, HIAL ने फैसले को दी चुनौती; हाईकोर्ट ने फिलहाल जमीन पर तीसरे पक्ष के अधिकार बनाने पर रोक लगाई

लद्दाख में सोनम वांगचुक के संस्थान की जमीन पर घमासान, 1076 कनाल आवंटन का मामला हाईकोर्ट में
प्रतीकात्मक तस्वीर, AI से बनाई गई। यह वास्तविक घटना का चित्रण नहीं है।

लद्दाख में पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक से जुड़े हिमालयन इंस्टीट्यूट ऑफ अल्टरनेटिव्स, लद्दाख (HIAL) की जमीन का विवाद अब कानूनी लड़ाई में बदल चुका है। मामला लेह के Phyang Thang क्षेत्र में स्थित करीब 1,076 कनाल और 1 मरला जमीन के आवंटन से जुड़ा है, जिसे प्रशासन ने अगस्त 2025 में रद्द कर दिया था। HIAL ने इस फैसले को जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख हाईकोर्ट में चुनौती दी है।

ताजा सुनवाई में लद्दाख प्रशासन ने अदालत के सामने अपने फैसले का जोरदार बचाव किया है। प्रशासन का कहना है कि जमीन का आवंटन निर्धारित शर्तें पूरी नहीं होने के कारण कानूनी रूप से प्रभावहीन हो गया था, जबकि HIAL का पक्ष है कि उसने लीज डीड के लिए समय रहते आवेदन किया था और आगे की प्रक्रिया में हुई देरी उसकी वजह से नहीं थी।

2018 में 40 साल के लिए हुआ था जमीन का आवंटन

विवाद की शुरुआत 5 मई 2018 से होती है। उस समय HIAL को पहाड़ी क्षेत्रों के विकास पर केंद्रित एक वैकल्पिक विश्वविद्यालय स्थापित करने के उद्देश्य से Phyang Thang में जमीन आवंटित की गई थी।

आवंटन करीब 40 साल की लीज के लिए था। इसमें अलग-अलग खसरा नंबरों के तहत कुल 1,076 कनाल और 1 मरला जमीन शामिल थी।

HIAL के अनुसार, आवंटन मिलने के कुछ ही समय बाद उसने लीज डीड के निष्पादन के लिए आवेदन कर दिया था। संस्थान का दावा है कि इसके बाद उसने प्रस्तावित संस्थान के लिए आधारभूत ढांचे और शैक्षणिक गतिविधियों से जुड़े काम भी शुरू किए। HIAL का तर्क है कि लीज डीड पूरी होने में हुई देरी के लिए प्रशासनिक प्रक्रियाएं जिम्मेदार थीं।

प्रशासन ने क्यों रद्द किया जमीन का आवंटन?

लद्दाख प्रशासन ने 21 अगस्त 2025 को जमीन का आवंटन रद्द कर दिया था। प्रशासन का कहना है कि मूल आवंटन आदेश में स्पष्ट शर्तें थीं और निर्धारित समय के भीतर लीज डीड निष्पादित करना तथा जरूरी भुगतान करना आवश्यक था।

अब हाईकोर्ट में दाखिल अपने विस्तृत हलफनामे में प्रशासन ने कहा है कि HIAL ने जमीन के लिए निर्धारित प्रीमियम और ग्राउंड रेंट का भुगतान नहीं किया और लीज डीड भी निष्पादित नहीं हुई। प्रशासन के मुताबिक, इन शर्तों को पूरा नहीं किए जाने के कारण आवंटन 5 मई 2019 को ही कानूनी रूप से समाप्त हो गया था।

प्रशासन ने अदालत में यह भी कहा कि जमीन जिस उद्देश्य से दी गई थी, उसके अनुरूप वहां वैकल्पिक विश्वविद्यालय स्थापित नहीं हुआ। अक्टूबर 2026 में लद्दाख के उच्च शिक्षा विभाग ने भी कथित तौर पर यह प्रमाणित किया कि HIAL कोई मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय नहीं है और उसके पाठ्यक्रम University of Ladakh या किसी अन्य वैधानिक संस्था से संबद्ध नहीं हैं।

HIAL का दावा—देरी प्रशासन की वजह से हुई

दूसरी ओर, HIAL ने प्रशासन के आरोपों को स्वीकार नहीं किया है। संस्थान की ओर से अदालत में कहा गया है कि उसने आवंटन के करीब 15 दिन के भीतर लीज डीड के लिए आवेदन कर दिया था।

HIAL का दावा है कि जमीन पर गतिविधियां शुरू करने के प्रयास किए गए और लीज की औपचारिक प्रक्रिया आगे बढ़ाने में प्रशासनिक स्तर पर देरी हुई। संस्थान ने यह भी तर्क दिया कि लद्दाख के केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद नई लीज नीति और अन्य प्रशासनिक बदलावों के कारण प्रक्रिया प्रभावित हुई।

HIAL ने अदालत में प्रशासन के फैसले को चुनौती देते हुए आवंटन बहाल करने तथा मूल आवंटन के अनुरूप लीज डीड जारी करने की मांग की है।

हाईकोर्ट ने सितंबर में दिया था अहम अंतरिम आदेश

इस मामले में सितंबर 2026 में हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण अंतरिम आदेश जारी किया था। अदालत ने लद्दाख प्रशासन को निर्देश दिया था कि विवादित 1,076 कनाल और 1 मरला जमीन पर किसी तीसरे पक्ष का अधिकार या हित पैदा न किया जाए।

हालांकि, अदालत ने उस समय जमीन का आवंटन रद्द करने वाले प्रशासनिक आदेश पर रोक नहीं लगाई थी। यानी मामला अभी अंतिम रूप से तय नहीं हुआ है और जमीन को लेकर दोनों पक्षों के दावों पर न्यायिक प्रक्रिया जारी है।

प्रशासन का गंभीर आरोप—सिर्फ जमीन ही नहीं, पुराने रिकॉर्ड भी उठाए

ताजा हलफनामे में प्रशासन ने इस विवाद को केवल एक लीज या जमीन के भुगतान का मामला नहीं बताया है। प्रशासन ने HIAL और सोनम वांगचुक से जुड़े पुराने मामलों और सरकारी जमीन के इस्तेमाल को लेकर भी कई आरोप अदालत के सामने रखे हैं।

प्रशासन का दावा है कि Phyang Thang की जमीन लंबे समय तक वैध लीज और भुगतान के बिना संस्थान के कब्जे में रही। उसने यह भी आरोप लगाया कि स्थानीय लोगों और Phyang Welfare Society की ओर से जमीन, चरागाह और पारंपरिक सिंचाई व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को लेकर शिकायतें की गई थीं।

हालांकि, ये प्रशासन द्वारा अदालत में रखे गए आरोप और दावे हैं, जिन्हें अदालत द्वारा अंतिम रूप से सही ठहराया जाना अभी बाकी है। HIAL की ओर से प्रशासन के दावों को खारिज किया गया है।

सरकार ने सार्वजनिक जमीन के इस्तेमाल का तर्क दिया

लद्दाख प्रशासन ने हाईकोर्ट में Public Trust Doctrine का भी हवाला दिया है। प्रशासन का कहना है कि सरकारी जमीन जनता के हित में रखी जाती है और किसी निजी संस्था को केवल प्रतिष्ठा या उपलब्धियों के आधार पर उस पर स्थायी अधिकार नहीं दिया जा सकता।

प्रशासन ने अदालत से HIAL की याचिका खारिज करने की मांग करते हुए यह सुझाव भी दिया है कि अगर जमीन वापस ली जाती है तो उसका इस्तेमाल किसी प्रतिष्ठित राष्ट्रीय शैक्षणिक संस्था, जैसे Sainik School, Eklavya Model Residential School या Sindhu Central University जैसी परियोजनाओं के लिए किया जा सकता है।

अब आगे क्या होगा?

फिलहाल यह मामला अदालत में विचाराधीन है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि 2018 के जमीन आवंटन की शर्तें पूरी हुई थीं या नहीं, लीज डीड में देरी के लिए कौन जिम्मेदार था और क्या प्रशासन को 2025 में आवंटन रद्द करने का कानूनी अधिकार था।

एक तरफ प्रशासन भुगतान, लीज डीड और जमीन के निर्धारित उद्देश्य के अनुरूप इस्तेमाल न होने को अपना आधार बता रहा है। दूसरी तरफ HIAL का कहना है कि उसने प्रक्रिया पूरी करने की कोशिश की थी और प्रशासनिक देरी के कारण लीज पूरी नहीं हो सकी।

इसलिए अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि जमीन पर अंतिम अधिकार किसका होगा। हाईकोर्ट के अंतिम फैसले से ही यह स्पष्ट होगा कि Phyang Thang की यह जमीन HIAL को वापस मिलती है या प्रशासन के कब्जे में रहती है।

यह विवाद इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें केवल एक संस्थान की जमीन का सवाल नहीं है, बल्कि सरकारी जमीन के आवंटन, लीज की शर्तों, प्रशासनिक जवाबदेही और वैकल्पिक शिक्षा परियोजनाओं से जुड़े कई कानूनी और प्रशासनिक मुद्दे शामिल हो गए हैं।