उत्तर प्रदेश के महराजगंज जिले में ग्रामीण डाक सेवक भर्ती को लेकर बड़ा मामला सामने आया है। भर्ती प्रक्रिया में कथित तौर पर फर्जी अंकपत्रों का इस्तेमाल कर नौकरी हासिल करने के आरोपों के बाद स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने जांच तेज कर दी है। इस जांच की आंच अब महराजगंज तक पहुंच गई है, जहां करीब 85 ग्रामीण डाक सेवक STF के रडार पर हैं।
अमर उजाला की 6 नवंबर 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक, महराजगंज और आनंदनगर डाक सर्किल के इन कर्मचारियों के शैक्षिक दस्तावेजों की जांच शुरू की गई है। जांच का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना है कि नियुक्ति के समय जमा किए गए हाईस्कूल और इंटरमीडिएट के अंकपत्र असली हैं या उनमें किसी तरह की हेराफेरी की गई है।
गोंडा और बलरामपुर में 42 कर्मचारियों पर हुई कार्रवाई
इस पूरे मामले की शुरुआत गोंडा और बलरामपुर जिलों में सामने आए भर्ती फर्जीवाड़े से हुई। जांच में कथित तौर पर पाया गया कि कुछ अभ्यर्थियों ने हाईस्कूल और इंटरमीडिएट के फर्जी अंकपत्र जमा कर मेरिट सूची में अधिक अंक हासिल किए थे।
दस्तावेजों का संबंधित शिक्षा बोर्डों से सत्यापन कराया गया तो कथित गड़बड़ी सामने आई। इसके बाद विभाग ने 42 ग्रामीण डाक सेवकों को बर्खास्त कर दिया और उनके खिलाफ प्राथमिकी भी दर्ज कराई।
इस खुलासे के बाद डाक विभाग और जांच एजेंसियों ने प्रदेश के अन्य जिलों में भी नियुक्तियों के दस्तावेजों का सत्यापन शुरू कराया।
महराजगंज में 85 कर्मचारियों के दस्तावेजों का सत्यापन
STF की जांच में महराजगंज और आनंदनगर सर्किल के लगभग 85 ग्रामीण डाक सेवकों के शैक्षिक प्रमाणपत्रों की पड़ताल की जा रही है।
इस प्रक्रिया में मुख्य रूप से निम्न बिंदुओं की जांच होगी:
- हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की मार्कशीट की वास्तविकता।
- संबंधित शिक्षा बोर्डों से प्रमाणपत्रों का मिलान।
- मेरिट में दर्ज अंकों और मूल रिकॉर्ड का सत्यापन।
- नियुक्ति के समय जमा किए गए दस्तावेजों की जांच।
महराजगंज के डाक उपमंडलीय निरीक्षक बसंत कुमार ने बताया कि गोंडा और बलरामपुर में हुई जांच में फर्जी अंकपत्रों के आधार पर चयन का मामला सामने आया था। इसी के बाद अन्य डाक सर्किलों में भी दस्तावेजों का सत्यापन शुरू कराया गया है।
गाजीपुर में भी पहले सामने आ चुका है फर्जीवाड़ा
ग्रामीण डाक सेवक भर्ती में फर्जी प्रमाणपत्रों का मामला नया नहीं है। रिपोर्ट के मुताबिक, अगस्त 2022 में गाजीपुर में 112 आवेदकों में से 33 के दस्तावेज फर्जी पाए गए थे।
उस मामले में बिहार, झारखंड और दूसरे राज्यों के शिक्षा बोर्डों के कथित फर्जी प्रमाणपत्र लगाए जाने की बात सामने आई थी। इससे भर्ती प्रक्रिया में दस्तावेजों के सत्यापन की गंभीरता और बढ़ गई है।
क्या 85 ग्रामीण डाक सेवकों की नौकरी जाएगी?
फिलहाल महराजगंज और आनंदनगर के 85 ग्रामीण डाक सेवकों के खिलाफ बर्खास्तगी का कोई आदेश सामने नहीं आया है। अभी उनके दस्तावेजों की जांच चल रही है।
यदि सत्यापन में किसी कर्मचारी के प्रमाणपत्र फर्जी पाए जाते हैं, तो संबंधित विभाग नियमानुसार कार्रवाई कर सकता है। इसमें नौकरी समाप्त करने और प्राथमिकी दर्ज कराने जैसी कार्रवाई भी शामिल हो सकती है।
इसलिए फिलहाल इन 85 कर्मचारियों को दोषी मानना सही नहीं होगा।