महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग (MPSC) के अध्यक्ष विवेक भिमनवार को पेपर लीक मामले की जांच पूरी होने तक अनिवार्य अवकाश पर भेज दिया गया है। महाराष्ट्र सरकार ने यह फैसला रविवार की रात को लिया।
पुणे में 11 दिन तक चले तीव्र प्रदर्शन के बाद सरकार ने यह कदम उठाया है। प्रदर्शनकारी छात्र भिमनवार के इस्तीफे की मांग कर रहे थे। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद चंद्र पवार) के विधायक रोहित पवार इस आंदोलन का नेतृत्व कर रहे थे।
जांच समिति का गठन
महाराष्ट्र सरकार ने आयोग की पूरी परीक्षा प्रक्रिया की समीक्षा के लिए एक जांच समिति का गठन किया है। वरिष्ठ IAS अधिकारी तुकाराम मुंढे को समिति का सचिव नियुक्त किया गया है। मुंढे फूड एंड ड्रग्स अथॉरिटी (FDA) के आयुक्त हैं।
पूर्व न्यायाधीश दिलीप भोसले को जांच समिति का अध्यक्ष बनाया गया है। समिति को पेपर लीक और प्रशासनिक अनियमितताओं की जांच करनी है।
छात्रों के आरोपों को वापस लिया जाएगा
राज्य मंत्री शिवेंद्ररार्जे भोसले ने प्रदर्शनकारी छात्रों से मुलाकात की। उन्होंने घोषणा की कि आंदोलन के सिलसिले में दर्ज किए गए सभी मामले वापस लिए जाएंगे। सरकार ने यह भी आश्वास दिया कि पेपर लीक मामले में दोषी पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
मार्च की परीक्षा रद्द की गई थी
MPSC ने 22 मार्च को आयोजित की गई स्क्रीनिंग परीक्षा में अनियमितताओं की शिकायत के बाद एक प्रारंभिक जांच शुरू की थी। इसके बाद पूरी भर्ती प्रक्रिया को रद्द कर दिया गया था।
भिमनवार ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए कहा कि सरकार ने MPSC पेपर लीक मामले में न्यायिक जांच की घोषणा की है। उन्होंने कहा कि जांच चल रहे समय अपने पद पर बने रहने के बजाय वह अवकाश पर जा रहे हैं।