क्या है पूरा मामला?
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने 2 नवंबर 2026 को मुंबई में भारतीय जनता पार्टी की ओर से आयोजित पदयात्रा में हिस्सा लिया। यह कार्यक्रम पार्टी के ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ अभियान का हिस्सा था। इसका उद्देश्य विपक्ष की ओर से चुनावी प्रक्रिया और संवैधानिक संस्थाओं पर उठाए जा रहे सवालों के जवाब में भाजपा का पक्ष जनता तक पहुंचाना था।
इस पदयात्रा में महाराष्ट्र भाजपा अध्यक्ष रवींद्र चव्हाण, मुंबई भाजपा अध्यक्ष अमित साटम, केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले, राज्य सरकार के मंत्री आशीष शेलार और मंगल प्रभात लोढ़ा सहित कई नेता शामिल हुए।
फडणवीस ने विपक्ष पर साधा निशाना
पदयात्रा के दौरान फडणवीस ने कांग्रेस और INDIA गठबंधन पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष का अभियान केवल सरकार बदलने तक सीमित नहीं है, बल्कि संवैधानिक संस्थाओं और लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर करने की कोशिश है।
फडणवीस ने कहा कि लोकतंत्र में चुनाव के जरिए सरकार बदलना हर नागरिक और राजनीतिक दल का अधिकार है, लेकिन उनके मुताबिक विपक्ष का कथित ‘रेजीम चेंज’ अभियान इससे अलग है। उन्होंने संविधान और लोकतांत्रिक संस्थाओं की रक्षा करने की बात कही।
सीमित भागीदारी को लेकर क्यों हुई चर्चा?
इस कार्यक्रम को लेकर एक ABP Live शॉर्ट वीडियो की हेडलाइन में ‘Limited Participation’ यानी सीमित भागीदारी का उल्लेख किया गया। इससे पदयात्रा में जुटी भीड़ को लेकर राजनीतिक चर्चा सामने आई।
ABP Live English
हालांकि, उपलब्ध रिपोर्टों में पदयात्रा में शामिल लोगों की कोई प्रमाणित आधिकारिक संख्या या स्वतंत्र रूप से सत्यापित भीड़ का आंकड़ा नहीं मिला है। इसलिए इसे निश्चित रूप से कम भीड़ वाला कार्यक्रम बताना उचित नहीं होगा। इतना जरूर है कि आयोजन की जनभागीदारी को लेकर सवाल और चर्चा हुई।
भाजपा का व्यापक राजनीतिक अभियान
यह पदयात्रा केवल मुंबई तक सीमित नहीं थी। भाजपा ने महाराष्ट्र सहित देश के विभिन्न राज्यों में ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ अभियान के तहत रैलियां और पदयात्राएं आयोजित करने की योजना बनाई थी।
हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, पार्टी ने प्रत्येक पदयात्रा में लगभग 10,000 लोगों को जुटाने का लक्ष्य रखा था। अभियान के जरिए भाजपा चुनावी मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर अपना पक्ष जनता तक पहुंचाना चाहती है।