बैंक का लोगो देखकर भरोसा करना पड़ा भारी
नोएडा-ग्रेटर नोएडा क्षेत्र में साइबर ठगी का एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसमें जालसाजों ने एक राष्ट्रीयकृत बैंक के लोगो और Life Certificate की प्रक्रिया का इस्तेमाल कर पीड़ित को अपने जाल में फंसा लिया। Greater Noida के सूरजपुर निवासी 61 वर्षीय रिटायर्ड सरकारी कर्मचारी के अनुसार, उन्हें Facebook पर पंजाब नेशनल बैंक यानी PNB के लोगो वाला एक विज्ञापन दिखाई दिया, जिसमें जीवन प्रमाण पत्र जमा करने से जुड़ी जानकारी दी गई थी।
विज्ञापन देखने के बाद उन्होंने उसमें दिए गए लिंक पर क्लिक कर दिया। यहीं से साइबर ठगी की पूरी प्रक्रिया शुरू हुई। पुलिस के मुताबिक, इस फर्जी लिंक के जरिए पीड़ित को ऐसी प्रक्रिया में ले जाया गया, जिससे बाद में उनके मोबाइल और बैंकिंग जानकारी से छेड़छाड़ की आशंका सामने आई।
पहले जानकारी मांगी, फिर फाइल डाउनलोड कराई
पीड़ित ने पुलिस को बताया कि 16 अक्टूबर को Facebook पर विज्ञापन देखने के कुछ समय बाद शाम करीब 6:30 बजे उनके मोबाइल पर एक अज्ञात नंबर से कॉल आया। कॉल करने वाले व्यक्ति ने खुद को बैंक से जुड़ा बताकर उनसे जन्मतिथि और बैंक खाते से संबंधित जानकारी मांगी।
इसके बाद कथित तौर पर उन्हें एक फाइल डाउनलोड करने के लिए कहा गया और करीब 24 घंटे इंतजार करने की बात कही गई।
कुछ समय बाद पीड़ित को अपने मोबाइल में डाउनलोड की गई फाइल को लेकर शक हुआ। उन्होंने फाइलें डिलीट कर दीं और अपने बैंक खातों की जांच की, लेकिन उस समय उन्हें कोई बड़ी गड़बड़ी नजर नहीं आई।
WhatsApp पर फिर आया PNB HRMS का फर्जी संदेश
मामला यहीं खत्म नहीं हुआ। अगले दिन, 17 अक्टूबर, उसी अज्ञात नंबर से WhatsApp पर एक संदेश आया, जिसमें PNB HRMS के लोगो का इस्तेमाल किया गया था।
पीड़ित ने अपने पेंशन खाते को सुरक्षित करने के लिए बैंक की हेल्पलाइन से संपर्क किया। इसी दौरान उनके मोबाइल पर अलग-अलग रकम के लेनदेन से संबंधित कई OTP संदेश आने लगे।
रिपोर्ट के अनुसार, ₹20,000, ₹55,000, ₹40,000 और ₹5,000 जैसे लेनदेन के OTP के अलावा बाद में ₹1 लाख और ₹97,802 से जुड़े संदेश भी मिले। लगातार ट्रांजैक्शन अलर्ट मिलने के बाद पीड़ित ने साइबर हेल्पलाइन 1930 पर भी सूचना दी।
कई खातों से निकली लाखों की रकम
जांच के दौरान सामने आया कि साइबर अपराधियों ने पीड़ित के अलग-अलग बैंकिंग स्रोतों को निशाना बनाया। पुलिस के मुताबिक, उनके क्रेडिट कार्ड समेत अन्य बैंक खातों से कई ट्रांजैक्शन किए गए।
कुल मिलाकर करीब ₹16.87 लाख की रकम कथित तौर पर निकाल ली गई। पीड़ित ने इसके बाद National Cyber Crime Reporting Portal पर शिकायत की और मामले में साइबर क्राइम ब्रांच थाने में BNS और Information Technology Act की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया। पुलिस अब ठगी में इस्तेमाल किए गए मोबाइल नंबर, लिंक, डिजिटल फाइल और बैंकिंग ट्रांजैक्शन की जांच कर रही है।
बैंक का असली लोगो, लेकिन विज्ञापन फर्जी
इस घटना की सबसे अहम बात यह है कि जालसाजों ने बैंक की पहचान और लोगो का इस्तेमाल भरोसा पैदा करने के लिए किया। यही तरीका साइबर अपराधियों के लिए तेजी से प्रभावी हथियार बनता जा रहा है।
हाल में साइबर सुरक्षा एजेंसियों ने भी चेतावनी दी है कि ठग बैंक, सरकारी विभाग या दूसरी विश्वसनीय संस्थाओं के नाम और लोगो का इस्तेमाल करके लोगों को फर्जी लिंक, ऐप या वेबसाइट तक पहुंचाते हैं। ऐसे लिंक के जरिए संवेदनशील जानकारी हासिल करने या मोबाइल में malicious files इंस्टॉल कराने की कोशिश की जा सकती है।
Life Certificate के नाम पर क्यों बढ़ा खतरा?
पेंशनरों के लिए Life Certificate एक जरूरी प्रक्रिया है। साइबर अपराधी इसी जरूरत का फायदा उठाकर फर्जी विज्ञापन और संदेश तैयार कर सकते हैं।
पीड़ित को ऐसा लगा कि वह बैंक की आधिकारिक प्रक्रिया पूरी कर रहा है। लेकिन असली बैंकिंग वेबसाइट या आधिकारिक ऐप के बजाय विज्ञापन से मिले लिंक का इस्तेमाल करना भारी पड़ गया।
यही वजह है कि किसी भी बैंकिंग प्रक्रिया के लिए Facebook, Instagram, WhatsApp या SMS में मिले लिंक पर सीधे भरोसा नहीं करना चाहिए। बैंक की आधिकारिक वेबसाइट या बैंक की ओर से उपलब्ध आधिकारिक ऐप के माध्यम से ही प्रक्रिया पूरी करना ज्यादा सुरक्षित है।
साइबर ठगी से बचने के लिए इन बातों का रखें ध्यान
अगर किसी बैंक के नाम से आपको कोई लिंक, APK या फाइल भेजी जाती है, तो उसे डाउनलोड न करें। बैंक आमतौर पर WhatsApp या SMS के जरिए कोई संदिग्ध ऐप फाइल भेजकर उसे इंस्टॉल करने के लिए नहीं कहता।
OTP, UPI PIN, कार्ड नंबर, CVV, नेट बैंकिंग पासवर्ड या अन्य संवेदनशील जानकारी किसी अनजान व्यक्ति को फोन पर नहीं देनी चाहिए।
अगर मोबाइल में संदिग्ध ऐप या फाइल डाउनलोड हो गई है और बैंकिंग फ्रॉड का शक है, तो तुरंत इंटरनेट कनेक्शन बंद करके बैंक से आधिकारिक नंबर पर संपर्क करें। साथ ही वित्तीय साइबर अपराध की स्थिति में 1930 पर तत्काल शिकायत करना महत्वपूर्ण है।
जांच में अब किन बिंदुओं पर नजर
पुलिस इस मामले में यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि Facebook पर विज्ञापन किसने चलाया, लिंक किस सर्वर या वेबसाइट से जुड़ा था, मोबाइल में डाउनलोड कराई गई फाइल में क्या था और रकम किन बैंक खातों में ट्रांसफर हुई।
इसके अलावा जिस नंबर से पीड़ित को कॉल और WhatsApp संदेश आए, उसकी भी जांच की जा रही है। जांच आगे बढ़ने पर यह पता चल सकता है कि इसके पीछे स्थानीय साइबर अपराधी थे या किसी बड़े अंतरराज्यीय नेटवर्क का हिस्सा।
यह मामला एक बार फिर दिखाता है कि सिर्फ बैंक का लोगो देखकर किसी ऑनलाइन विज्ञापन को असली मान लेना कितना जोखिम भरा हो सकता है।