चर्चित सीओ जियाउल हक हत्याकांड में कुंडा विधायक रघुराज प्रताप सिंह (राजा भैया) समेत पांच लोगों के खिलाफ दर्ज मुकदमे में विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीबीआई) लखनऊ ने केंद्रीय जांच ब्यूरो की क्लोजर रिपोर्ट स्वीकार कर ली है।
यह मुकदमा सीओ की पत्नी परवीन आजाद ने तीन मार्च 2013 को दर्ज कराया था। दोबारा विवेचना के बाद सीबीआई ने 22 दिसंबर 2023 को क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की थी। अदालत ने दोनों पक्षों को सुनने और पत्रावली में मौजूद साक्ष्यों की जांच के बाद इसे मंजूरी दी।
कैसे हुई थी घटना
अभियोजन पत्रावली के मुताबिक दो मार्च 2013 की शाम करीब साढ़े सात बजे जमीन विवाद में प्रतापगढ़ के कुंडा स्थित बलीपुर गांव के प्रधान नन्हे यादव की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। घटना की खबर मिलते ही उनके समर्थक गांव पहुंचे और आरोपित के घर में आग लगा दी।
हालात बिगड़ने की सूचना पर तत्कालीन सीओ कुंडा जियाउल हक पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। भीड़ को काबू करने के दौरान सीओ और ग्रामीणों के बीच झड़प हो गई, जिसमें प्रधान के भाई सुरेश यादव की गोली लगने से मौत हो गई। इसके बाद उग्र भीड़ ने सीओ जियाउल हक को घेरकर पीटा और गोली मारकर उनकी हत्या कर दी।
चार एफआईआर, सीबीआई जांच
तिहरे हत्याकांड से जुड़ी चार एफआईआर दर्ज हुई थीं। इनमें पुलिस की ओर से दर्ज मुकदमे के अलावा प्रधान नन्हे यादव और सुरेश यादव की हत्या के मामले शामिल थे। सीओ की पत्नी परवीन आजाद ने चौथी एफआईआर में तत्कालीन कुंडा विधायक रघुराज प्रताप सिंह समेत पांच लोगों को नामजद किया था।
मामले की गंभीरता देखते हुए विवेचना सीबीआई को सौंपी गई। सीबीआई ने 31 जुलाई 2013 को पहली क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की थी, जिसका परवीन आजाद ने प्रोटेस्ट प्रार्थना पत्र दाखिल कर विरोध किया। अदालत के आठ जुलाई 2014 के आदेश पर मामले की दोबारा विवेचना हुई।
अन्य आरोपितों को उम्रकैद
दोबारा विवेचना के बाद सीबीआई ने 22 दिसंबर 2023 को फिर क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की, जिसे अब अदालत ने स्वीकार कर लिया है। इस बीच जियाउल हक हत्याकांड के अन्य आरोपितों के खिलाफ चली सुनवाई में अक्टूबर 2024 में 10 आरोपितों को दोषी करार देकर उम्रकैद की सजा सुनाई जा चुकी है।