अयोध्या के राम मंदिर से दान चोरी के मामले में गिरफ्तार आठ आरोपियों के खिलाफ पुलिस ने बुधवार को विशेष अदालत में चार्जशीट दाखिल कर दी। इसी दिन आरोपियों की गिरफ्तारी को पूरे 90 दिन हो रहे थे।
विशेष न्यायाधीश रजत वर्मा की अदालत में विवेचक दो बक्सों में कई पन्नों की चार्जशीट लेकर पहुंचे। अदालत खुलते ही चार्जशीट जमा हो गई, लेकिन इसकी जानकारी वकीलों को पहले से नहीं दी गई थी।
वकीलों में नाराजगी, बार एसोसिएशन ने बुलाई बैठक
चार्जशीट गुपचुप तरीके से दाखिल होने की खबर मिलते ही बड़ी संख्या में अधिवक्ता कोर्ट परिसर में जमा हो गए। बार एसोसिएशन ने इस पर तुरंत बैठक बुलाकर विरोध दर्ज कराया।
वकीलों ने अदालत से मांग की कि चार्जशीट पर संज्ञान लेने से पहले बार अध्यक्ष का पक्ष सुना जाए। अदालत ने बार अध्यक्ष को अपनी बात रखने के लिए समय देने पर सहमति जताई।
चंपत राय और अनिल मिश्रा का नाम गायब
वकील यह जानना चाहते थे कि चार्जशीट में ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय और सदस्य डॉक्टर अनिल मिश्रा का नाम शामिल है या नहीं। जांच में सामने आया कि इन दोनों नामों का चार्जशीट में उल्लेख नहीं है, जिससे मौजूद अधिवक्ताओं में नाराजगी फैल गई।
राम मंदिर ट्रस्ट के सदस्य गोपाल राव समेत अन्य पदाधिकारियों के नाम शामिल किए गए हैं या नहीं, इस पर भी वकीलों ने स्पष्टता मांगी।
बरामदगी और गवाहों का ब्योरा
चार्जशीट में 173 गवाहों के बयान दर्ज किए गए हैं। रिपोर्ट में कुल 105 बार चोरी की घटनाओं का जिक्र किया गया है।
जांच में 803 वस्तुओं का रिकॉर्ड सही पाया गया, जबकि 86 कीमती चीजों की रसीद नहीं मिल सकी। चार्जशीट में कार, गहने और 79.85 लाख रुपये नकद की बरामदगी का भी उल्लेख किया गया है।
पुलिस ने अभी यह स्पष्ट नहीं किया है कि चार्जशीट में आरोपियों की संख्या बढ़ाई गई है या पहले से गिरफ्तार आठ लोगों के खिलाफ ही आरोपपत्र दाखिल हुआ है। किन धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया, इसकी जानकारी भी सार्वजनिक नहीं की गई। बताया जा रहा है कि अदालती प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही इसका खुलासा हो पाएगा।
जून में सामने आया था मामला
राम मंदिर दान चोरी का मामला जून में उजागर हुआ था, जिसके बाद एसआईटी ने जांच शुरू की। एसआईटी के निर्देश पर पुलिस ने आठ लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार किया था।
आरोपियों को समय-समय पर रिमांड पर लिया गया और उनसे रुपये भी बरामद किए गए थे। मामले में चंपत राय के पूर्व चालक टिन्नू यादव पर आरोप है कि वह श्रद्धालुओं से दर्शन कराने के नाम पर पैसे लेता था और उससे गहने खरीदता था। उस पर मंदिर से जुड़े संपर्कों का इस्तेमाल कर वाहन किराए पर देने से हर महीने करीब 90,000 रुपये कमाने का भी आरोप है।
अब आगे बार अध्यक्ष की सुनवाई के बाद अदालत चार्जशीट पर संज्ञान लेने की प्रक्रिया आगे बढ़ाएगी।