अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे और दान की कथित चोरी से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अपनी निगरानी में चल रही जांच संबंधी कार्यवाही समाप्त कर दी है। यह फैसला 2 नवंबर 2026 को उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से अदालत को यह जानकारी दिए जाने के बाद आया कि विशेष जांच दल (SIT) ने आठ आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर दी है।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने मामले को संबंधित न्यायिक मजिस्ट्रेट के पास आगे की कानूनी कार्यवाही के लिए भेज दिया। पीठ में न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना भी शामिल थे।
60 हजार से ज्यादा पन्नों की चार्जशीट
उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि जांच पूरी कर ली गई है और चार्जशीट अयोध्या की संबंधित अदालत में सितंबर में दाखिल की गई थी। रिपोर्टों के मुताबिक, यह चार्जशीट 60 हजार से अधिक पन्नों की है।
सरकार की ओर से अदालत में कहा गया कि कथित गड़बड़ी मंदिर परिसर में दान की नकदी गिनने के दौरान हुई। जांच एजेंसी ने आरोप लगाया कि नकदी गिनने की प्रक्रिया से जुड़े कुछ लोगों ने कथित तौर पर रकम निकाली और उसे बैंक खातों या संपत्ति में लगाया। ये आरोप अभी अदालत में विचाराधीन हैं।
CCTV फुटेज में 105 संदिग्ध घटनाओं का दावा
SIT की जांच के बारे में अदालत को बताया गया कि मंदिर परिसर में दान की नकदी की गिनती के दौरान 105 ऐसी घटनाएं सामने आईं, जिन्हें कथित तौर पर नकदी हटाने या छिपाने से जुड़ा माना गया। जांच में CCTV फुटेज, गवाहों के बयान, इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड, बैंक दस्तावेज और वित्तीय लेन-देन की पड़ताल की गई।
रिपोर्टों के अनुसार, जांच में 173 गवाहों के बयान दर्ज किए गए। आरोपियों और उनके करीबी परिजनों के बैंक खातों, संपत्तियों, वाहनों और अन्य खर्चों की भी जांच की गई।
सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को दी ट्रायल में सहायता की अनुमति
सुप्रीम कोर्ट ने जांच की निगरानी से जुड़ी याचिकाओं का निपटारा करते हुए याचिकाकर्ताओं को संबंधित न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष कार्यवाही में सहायता करने की छूट दी। अदालत ने कहा कि मामले में सार्वजनिक हित जुड़ा है और कानून अपराध के पीड़ितों को अदालत की सहायता करने की अनुमति देता है।
हालांकि, पीठ ने स्पष्ट किया कि उसने आरोपों के गुण-दोष यानी उनकी सच्चाई पर कोई राय नहीं दी है। इसलिए सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश को आरोपियों के दोषी या निर्दोष होने का फैसला नहीं माना जा सकता। अब मामले में आगे की सुनवाई निचली अदालत में कानून के अनुसार होगी।
कीमती चढ़ावे और दान की वस्तुओं का भी हुआ सत्यापन
जांच के दौरान मंदिर में चढ़ाई गई कीमती वस्तुओं का भी सत्यापन किया गया। रिपोर्टों के मुताबिक, सॉफ्टवेयर के जरिए रसीद जारी की गईं 803 मूल्यवान वस्तुओं और बिना रसीद वाली 86 अन्य वस्तुओं का भौतिक सत्यापन किया गया। अधिकारियों के हवाले से बताया गया कि इन वस्तुओं के मिलान में कोई विसंगति नहीं मिली। इसके अलावा पिघलाने के लिए भेजी गई करीब 944.411 किलोग्राम चांदी का भी सत्यापन किया गया।