भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार को भारी बिकवाली देखने को मिली। सेंसेक्स 1,045 अंक से ज्यादा टूट गया, जबकि निफ्टी भी 371 अंक की गिरावट के साथ 22,231 के स्तर पर बंद हुआ। बाजार में इस तेज गिरावट से निवेशकों की संपत्ति में करीब ₹11 लाख करोड़ की कमी आई।
गुरुवार का कारोबार शुरू होने के साथ ही बाजार पर दबाव दिखाई देने लगा था। दिन बढ़ने के साथ बिकवाली तेज होती गई और प्रमुख सूचकांक लगातार नीचे जाते रहे।
सेंसेक्स 1,045 अंक टूटा
कारोबार के अंत में सेंसेक्स 1,045.46 अंक यानी 1.44 फीसदी गिरकर 71,593.24 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं निफ्टी 371.25 अंक यानी 1.64 फीसदी की गिरावट के साथ 22,231.80 पर बंद हुआ।
निफ्टी कारोबार के दौरान 22,179.90 के स्तर तक फिसल गया। यह उसका नया 52-सप्ताह का निचला स्तर रहा।
निफ्टी 18 महीने के निचले स्तर पर
गुरुवार की गिरावट के बाद निफ्टी करीब 18 महीने के निचले स्तर पर पहुंच गया। बाजार में लगातार दूसरे कारोबारी सत्र में बड़ी गिरावट देखने को मिली।
सेंसेक्स भी फरवरी 2024 के बाद के सबसे निचले बंद स्तरों में पहुंच गया। बाजार के इस प्रदर्शन ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है।
क्यों गिरा शेयर बाजार?
शेयर बाजार में गिरावट के पीछे कई कारण बताए जा रहे हैं। इनमें कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें, RBI की सख्त मौद्रिक नीति, विदेशी निवेशकों की बिकवाली और कमजोर वैश्विक संकेत प्रमुख हैं।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत 104 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गई। भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है। ऐसे में कच्चा तेल महंगा होने से देश के आयात बिल और महंगाई पर दबाव बढ़ने की आशंका रहती है।
RBI के फैसले का भी असर
भारतीय रिजर्व बैंक ने बुधवार को रेपो रेट में 0.25 फीसदी की बढ़ोतरी करते हुए इसे 5.5 फीसदी कर दिया था। RBI ने अपनी नीति के रुख में भी बदलाव किया।
बाजार के लिहाज से केंद्रीय बैंक का यह रुख उम्मीद से ज्यादा सख्त माना गया। ब्याज दरों में बढ़ोतरी से कंपनियों की उधारी लागत बढ़ सकती है और आर्थिक गतिविधियों पर भी इसका असर पड़ सकता है।
विदेशी निवेशकों ने जमकर की बिकवाली
विदेशी संस्थागत निवेशकों की लगातार बिकवाली भी बाजार के लिए बड़ा दबाव बनी हुई है। गुरुवार को विदेशी निवेशकों ने करीब ₹6,121 करोड़ की शुद्ध बिकवाली की।
इसके मुकाबले घरेलू संस्थागत निवेशकों ने करीब ₹4,596 करोड़ की शुद्ध खरीदारी की। हालांकि घरेलू निवेशकों की खरीदारी विदेशी निवेशकों की बिकवाली के दबाव को पूरी तरह संभाल नहीं सकी।
निवेशकों के ₹11 लाख करोड़ कम हुए
बाजार में आई भारी गिरावट का सीधा असर निवेशकों की संपत्ति पर पड़ा। गुरुवार के कारोबार के बाद निवेशकों की कुल संपत्ति में करीब ₹11 लाख करोड़ की कमी आई।
पिछले दो कारोबारी सत्रों में BSE पर सूचीबद्ध कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण भी करीब ₹12 लाख करोड़ से ज्यादा घट गया।
किन शेयरों में सबसे ज्यादा गिरावट?
निफ्टी 50 में अडानी एंटरप्राइजेज प्रमुख गिरावट वाले शेयरों में रहा। इसमें करीब 5.4 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई।
इसके अलावा JSW Steel और ITC में भी 4 फीसदी से ज्यादा की गिरावट आई। अडानी पोर्ट्स, इंटरग्लोब एविएशन समेत कई बड़े शेयर भी दबाव में रहे।
बाजार की गिरावट केवल कुछ चुनिंदा शेयरों तक सीमित नहीं रही। प्रमुख सेक्टरों में व्यापक बिकवाली देखने को मिली।
सिर्फ तीन शेयर बढ़त में रहे
निफ्टी 50 के ज्यादातर शेयरों में गिरावट रही। भारी बिकवाली के बीच केवल Infosys, Tech Mahindra और Axis Bank बढ़त के साथ बंद हुए।
मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों पर भी दबाव देखने को मिला और दोनों इंडेक्स करीब 2 फीसदी से ज्यादा नीचे रहे।
रुपये पर भी दबाव
शेयर बाजार में गिरावट के साथ भारतीय रुपये पर भी दबाव बना हुआ है। गुरुवार को रुपया करीब ₹96.78 प्रति डॉलर के स्तर पर बंद हुआ।
कमजोर रुपया और महंगा कच्चा तेल भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए चिंता बढ़ा सकते हैं। इससे आयात महंगा होने के साथ महंगाई पर भी दबाव बढ़ सकता है।
अब आगे क्या?
बाजार की नजर अब कंपनियों के जुलाई-सितंबर तिमाही के नतीजों, कच्चे तेल की कीमतों, विदेशी निवेशकों की गतिविधियों और RBI की आगे की नीतियों पर रहेगी।
IT सेक्टर की दिग्गज कंपनी TCS के तिमाही नतीजों के साथ कमाई का नया सीजन शुरू हो रहा है। आने वाले दिनों में कंपनियों के वित्तीय नतीजे बाजार की दिशा के लिए अहम हो सकते हैं।
फिलहाल बाजार के सामने महंगा कच्चा तेल, विदेशी निवेशकों की बिकवाली और ब्याज दरों को लेकर चिंता तीन बड़े दबाव हैं। इन मोर्चों पर राहत मिलने तक शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रहने की संभावना बनी हुई है।