लखनऊ के केजीएमयू ट्रामा सेंटर में गिलियन-बैरे सिंड्रोम, गंभीर निमोनिया और सेप्टिक शाक से पीड़ित एक 7 साल के बच्चे को बचाया गया। बच्चा 22 दिन के इलाज के बाद पूरी तरह ठीक होकर घर लौट गया।
प्रयागराज से गंभीर हालत में बच्चे को ट्रामा सेंटर लाया गया था। पीडियाट्रिक आईसीयू में बेड न मिलने के कारण उसे ट्रामा क्रिटिकल केयर यूनिट में भर्ती किया गया और तुरंत वेंटिलेटर सपोर्ट दिया गया।
गंभीर सांस की परेशानी थी
बच्चे को सांस लेने में बेहद मुश्किल आ रही थी। सेप्टिक शाक की वजह से उसकी हालत नाजुक बनी रही। डॉक्टरों की टीम ने दवाओं और नियमित निगरानी से इलाज जारी रखा।
धीरे-धीरे बच्चे की सेहत में सुधार आने लगा। 14 दिन वेंटिलेटर पर रहने के बाद उसे सफलतापूर्वक मशीन से अलग किया गया।
रिहैबिलिटेशन के बाद पूरी तरह स्वस्थ
रिहैबिलिटेशन और देखभाल के माध्यम से बच्चा चलने-फिरने और सामान्य गतिविधियों के लिए पूरी तरह स्वस्थ हो गया। ट्रामा क्रिटिकल केयर यूनिट की प्रभारी डॉ. जिया अरशद की देखरेख में डा. राम गोपाल मौर्य और उनकी टीम ने इलाज किया।
ट्रामा सेंटर के प्रभारी प्रो. प्रेमराज सिंह के अनुसार, समय पर सही उपचार मिलने से ही बच्चे की जान बचाई जा सकी। ट्रामा क्रिटिकल केयर यूनिट गंभीर मरीजों को तत्काल जीवनरक्षक इलाज देने के लिए तैयार रहती है।