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सीवान में पटाखों से भरे मकान में भीषण धमाका, 5 की मौत; FSL ने संभाली जांच की कमान

आलमपुर में करीब दो मंजिला मकान का हिस्सा ढहा, घंटों तक रुक-रुककर धमाके; दो-तीन लोगों के अब भी लापता होने की सूचना, लाइसेंस और सुरक्षा मानकों की भी जांच

सीवान में पटाखों से भरे मकान में भीषण धमाका, 5 की मौत; FSL ने संभाली जांच की कमान
प्रतीकात्मक तस्वीर, AI से बनाई गई। यह वास्तविक घटना का चित्रण नहीं है।

सीवान में शाम को दहला आलमपुर गांव

बिहार के सीवान जिले में शुक्रवार शाम एक भीषण पटाखा विस्फोट ने पूरे इलाके को हिलाकर रख दिया। घटना जामो बाजार थाना क्षेत्र के आलमपुर गांव में उस मकान में हुई, जहां पटाखों के निर्माण और भंडारण की जानकारी सामने आई है।

विस्फोट इतना शक्तिशाली था कि मकान का अगला हिस्सा बुरी तरह क्षतिग्रस्त होकर ढह गया और मलबा सड़क तक फैल गया। धमाके के बाद लगी आग में परिसर में रखे दूसरे पटाखे भी चपेट में आ गए, जिसके कारण रुक-रुककर कई विस्फोट होते रहे। इससे बचाव दलों के लिए मकान के भीतर पहुंचना बेहद मुश्किल हो गया।

नवीनतम उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक 5 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। अधिकारियों ने बताया कि कुछ लोग अभी भी लापता हो सकते हैं, इसलिए मलबे की विस्तृत तलाशी जारी है।

पटाखों में आग लगी और लगातार होते रहे धमाके

प्रारंभिक जानकारी के अनुसार मकान में रखे पटाखों में आग लगने के बाद पहला बड़ा विस्फोट हुआ। इसके बाद वहां मौजूद अन्य पटाखों ने भी आग पकड़ ली और लगातार धमाके होने लगे।

रिपोर्टों के मुताबिक धमाकों का सिलसिला करीब दो घंटे या उससे अधिक समय तक रुक-रुककर चलता रहा। कुछ स्थानीय रिपोर्टों में इससे भी लंबी अवधि तक धमाके जारी रहने की बात कही गई है।

लगातार विस्फोटों के कारण पुलिस और दमकल कर्मियों को घटनास्थल के पास जाने में काफी सावधानी बरतनी पड़ी। आसपास के लोगों को भी मौके से दूर रहने की अपील की गई।

मकान के मलबे में तलाश, 5 मौतों की पुष्टि

सीवान के पुलिस अधीक्षक Bharat Soni के मुताबिक मेडिकल टीम के आकलन के आधार पर पांच शव बरामद किए गए हैं।

अधिकारियों के मुताबिक मकान में परिवार के कई सदस्य मौजूद थे। कुछ लोगों के बाहर होने की भी जानकारी सामने आई है। इसलिए पुलिस और प्रशासन यह पता लगाने में जुटे हैं कि हादसे के समय मकान के भीतर वास्तव में कितने लोग मौजूद थे।

नवीनतम रिपोर्टों में दो लोगों के लापता होने की बात सामने आई है, जबकि कुछ शुरुआती रिपोर्टों में यह संख्या तीन बताई गई थी। इसलिए लापता लोगों की अंतिम संख्या की आधिकारिक पुष्टि का इंतजार है।

FSL टीम ने शुरू की वैज्ञानिक जांच

हादसे के बाद Forensic Science Laboratory (FSL) की टीम को घटनास्थल पर बुलाया गया। टीम का उद्देश्य विस्फोट के कारणों और घटनास्थल पर मौजूद सामग्री की प्रकृति को वैज्ञानिक तरीके से जांचना है।

पुलिस ने इलाके को घेरकर सुरक्षित किया है ताकि घटनास्थल पर मौजूद महत्वपूर्ण साक्ष्य नष्ट न हों। FSL टीम मलबे, जले हुए सामान और अन्य संभावित साक्ष्यों की जांच कर रही है।

इसके अलावा Bomb Detection and Disposal Squad (BDDS) की टीम भी मौके पर मौजूद रही और ड्रोन के जरिए क्षेत्र का सर्वे किया गया।

जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि विस्फोट का मूल कारण क्या था और क्या किसी नियम या सुरक्षा व्यवस्था की अनदेखी हुई थी।

क्या पटाखा यूनिट के पास वैध लाइसेंस था?

इस हादसे ने पटाखों के निर्माण और भंडारण के लाइसेंस को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

अधिकारियों ने बताया कि जांच में यह पता लगाया जा रहा है कि संबंधित परिसर के पास पटाखे बनाने और रखने के लिए वैध लाइसेंस था या नहीं और क्या लाइसेंस की शर्तों का पालन किया जा रहा था।

कुछ रिपोर्टों के अनुसार स्थानीय स्तर पर यह जानकारी सामने आई है कि परिवार लंबे समय से पटाखे के कारोबार से जुड़ा था और लाइसेंस होने का दावा किया गया है। लेकिन पुलिस और प्रशासन अभी दस्तावेजों और लाइसेंस की वैधता की जांच कर रहे हैं। इसलिए फिलहाल इसे निश्चित रूप से अवैध इकाई कहना उचित नहीं होगा।

घनी आबादी में पटाखा निर्माण ने बढ़ाया खतरा

आलमपुर गांव में पटाखा निर्माण का काम कुछ परिवारों द्वारा लंबे समय से किए जाने की बात स्थानीय लोगों ने बताई है।

हादसा जिस मकान में हुआ, वह घनी आबादी वाले इलाके में बताया जा रहा है। ऐसे में पटाखों का निर्माण या बड़ी मात्रा में भंडारण आग लगने की स्थिति में आसपास के मकानों के लिए भी बड़ा खतरा पैदा कर सकता है।

विस्फोट की तीव्रता से मकान का हिस्सा ढह गया और मलबा सड़क तक पहुंच गया। इससे यह सवाल भी उठ रहा है कि आवासीय इलाके में विस्फोटक सामग्री के भंडारण और सुरक्षा व्यवस्था की पर्याप्त जांच हुई थी या नहीं।

पुलिस अधिकारियों पर भी कार्रवाई

हादसे के बाद पुलिस प्रशासन ने स्थानीय स्तर पर कथित लापरवाही को लेकर कार्रवाई की है।

सीवान के SP ने जामो बाजार थाना के SHO Dhiraj Kumar और स्थानीय चौकीदार Chandrika Manjhi को कथित लापरवाही के आरोप में निलंबित कर दिया है।

SP ने मामले की विस्तृत जांच के लिए SDPO महाराजगंज के नेतृत्व में विशेष जांच टीम (SIT) गठित की है। मामले में FIR दर्ज कर जांच की जिम्मेदारी महाराजगंज के Circle Inspector को दी गई है।

पहले भी निरीक्षण के निर्देश दिए गए थे?

जांच का एक अहम पहलू यह भी है कि क्या प्रशासन को इस तरह की पटाखा गतिविधियों के बारे में पहले से जानकारी थी और क्या परिसर का सुरक्षा निरीक्षण किया गया था।

SP के मुताबिक पुलिस की ओर से ऐसे प्रतिष्ठानों के लाइसेंस और संचालन की जांच के निर्देश दिए गए थे। अब जांच इस बात पर भी होगी कि संबंधित परिसर का निरीक्षण हुआ था या नहीं और यदि हुआ था तो उसकी रिपोर्ट में क्या पाया गया।

अगर जांच में नियमों के उल्लंघन या अधिकारियों की लापरवाही की पुष्टि होती है, तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ आगे कार्रवाई की जा सकती है।

बचाव अभियान में लगातार बनी रही चुनौती

घटना के बाद पुलिस, दमकल, स्वास्थ्य विभाग, बिजली विभाग और प्रशासन की टीमें मौके पर पहुंचीं।

मकान के भीतर पटाखों के मौजूद होने और रुक-रुककर विस्फोट होने के कारण बचावकर्मियों के लिए सीधे मलबे में प्रवेश करना जोखिम भरा था। पहले आग को पूरी तरह नियंत्रित किया गया और उसके बाद मलबे की व्यवस्थित तलाशी शुरू की गई।

FSL, मेडिकल टीम, डॉग स्क्वॉड और अन्य विशेषज्ञ टीमों की मदद से घटनास्थल की जांच की जा रही है। अधिकारियों का उद्देश्य एक तरफ संभावित लापता लोगों का पता लगाना है, वहीं दूसरी तरफ विस्फोट के वास्तविक कारण का पता लगाना भी है।

अब जांच के सामने सबसे बड़े सवाल

इस हादसे की जांच में कई अहम सवालों के जवाब तलाशे जाएंगे:

मकान में पटाखों की कितनी मात्रा रखी गई थी?

क्या निर्माण और भंडारण के लिए वैध लाइसेंस मौजूद था?

लाइसेंस की शर्तों और सुरक्षा मानकों का पालन हुआ या नहीं?

आग की शुरुआत कैसे हुई?

क्या किसी सुरक्षा नियम की अनदेखी हुई?

क्या स्थानीय अधिकारियों को पहले से इस गतिविधि की जानकारी थी?

हादसे के समय मकान में कितने लोग मौजूद थे?

क्या मलबे में अभी कोई व्यक्ति फंसा है?

FSL की रिपोर्ट और पुलिस की विस्तृत जांच इन सवालों के जवाब देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

अब आगे क्या होगा?

फिलहाल 5 मौतों की पुष्टि हो चुकी है, लेकिन लापता लोगों की तलाश और मलबे की जांच जारी है। इसलिए अंतिम casualty figure में बदलाव की संभावना बनी हुई है।

पुलिस ने FIR दर्ज कर विशेष जांच टीम गठित कर दी है। FSL और अन्य विशेषज्ञ एजेंसियां घटनास्थल से साक्ष्य जुटा रही हैं। साथ ही प्रशासन यह भी जांच रहा है कि पटाखा निर्माण और भंडारण के लिए जरूरी अनुमति मौजूद थी या नहीं।

अगर जांच में नियमों का उल्लंघन या लापरवाही साबित होती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

यह हादसा एक बार फिर इस सवाल को सामने लाता है कि घनी आबादी वाले इलाकों में पटाखों का निर्माण और भंडारण कितनी सुरक्षित व्यवस्था के तहत किया जा रहा है।