दिल्ली का AQI 379, पंजाबी बाग में 458
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में वायु प्रदूषण का संकट गहराता जा रहा है। 4 नवंबर 2026 को केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के आंकड़ों के अनुसार सुबह दिल्ली का औसत AQI 379 दर्ज किया गया, जो बहुत खराब (Very Poor) श्रेणी में आता है।
राजधानी के कुछ इलाकों में स्थिति इससे भी अधिक चिंताजनक रही। पंजाबी बाग में AQI 458 दर्ज किया गया, जो गंभीर (Severe) श्रेणी है। यानी दिल्ली के औसत से भी ज्यादा प्रदूषण कई स्थानीय इलाकों में लोगों को प्रभावित कर रहा है।
कई निगरानी केंद्रों पर गंभीर प्रदूषण
इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार, 4 नवंबर की सुबह दिल्ली के 59 निगरानी केंद्रों में से 20 केंद्रों पर AQI 400 से ऊपर दर्ज किया गया। जहांगीरपुरी, मुंडका और IIT दिल्ली के आसपास भी प्रदूषण का स्तर गंभीर श्रेणी में पहुंचा।
PM2.5 प्रमुख प्रदूषकों में शामिल रहा। ये बेहद छोटे कण सांस के साथ फेफड़ों के भीतर तक पहुंच सकते हैं।
GRAP का दूसरा चरण लागू, फिर भी राहत नहीं
बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने 2 नवंबर से दिल्ली-NCR में GRAP के दूसरे चरण के प्रतिबंध लागू किए हैं।
इस चरण के तहत प्रमुख उपायों में शामिल हैं:
- सड़कों पर मशीनों से सफाई और पानी का छिड़काव बढ़ाना।
- निर्माण स्थलों पर धूल नियंत्रण के नियमों का सख्ती से पालन।
- डीजल जनरेटर के इस्तेमाल पर नियमन।
- सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देने के लिए पार्किंग शुल्क बढ़ाने जैसे कदम।
- कचरा और अन्य सामग्री खुले में जलाने पर रोक को प्रभावी बनाना।
प्रदूषण बढ़ने के पीछे कौन-से कारण?
दिल्ली की हवा खराब होने के पीछे कई कारक एक साथ काम कर रहे हैं। इनमें वाहनों से निकलने वाला धुआं, निर्माण कार्यों से उड़ने वाली धूल, औद्योगिक उत्सर्जन, कचरा जलाना और आसपास के राज्यों में पराली जलाने से आने वाला धुआं शामिल हैं।
इंडिया टुडे की रिपोर्ट में निर्णय सहायता प्रणाली (DSS) के आंकड़ों के हवाले से बताया गया कि परिवहन क्षेत्र का योगदान लगभग 15.8 प्रतिशत और पराली जलाने का योगदान करीब 15.3 प्रतिशत था। ये अनुमानित हिस्सेदारी हैं; प्रदूषण के स्रोतों का योगदान मौसम और हवा की दिशा के अनुसार बदल सकता है।
आने वाले दिनों में और बिगड़ सकती है स्थिति
पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के तहत भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान (IITM) के 4 नवंबर के पूर्वानुमान के अनुसार, दिल्ली में 4 और 5 नवंबर को हवा की गुणवत्ता बहुत खराब श्रेणी में रहने की आशंका थी। 6 और 7 नवंबर को गंभीर श्रेणी में पहुंचने का अनुमान जताया गया।
कम हवा की गति और प्रदूषकों के पर्याप्त रूप से न फैल पाने की स्थिति में प्रदूषण जमीन के करीब जमा रह सकता है।
आम लोगों की सेहत पर असर
AQI 301 से 400 के बीच होने पर सभी लोगों को स्वास्थ्य संबंधी परेशानी हो सकती है। गंभीर श्रेणी में जोखिम और बढ़ जाता है। बच्चों, बुजुर्गों और पहले से सांस या हृदय संबंधी परेशानी वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है।
लोगों को सलाह दी जाती है कि प्रदूषण अधिक होने पर बाहर लंबे समय तक व्यायाम या दौड़ने से बचें, बाहर निकलते समय अच्छी गुणवत्ता वाला मास्क इस्तेमाल करें और घर के अंदर भी धुएं तथा धूल से बचाव रखें।